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Kaithal News: श्री कपिल मुनि सरोवर मेंं फिर मरीं मछलियां
Thu, 08 Feb 2024 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 08 Feb 2024 02:09 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्री कपिल मुनि सरोवर में एक बार फिर से मछलियों के मरने का मामला प्रकाश में आया है। इस बार व्यापक स्तर पर मछलियों के मरने से सरोवर में बदबू का आलम है। पिछले साल मई-जून में भी इस तरह की घटना हुई थी। इस समस्या पर विश्वकर्मा संगठन के प्रवक्ता प्रीत जगदेवा ने एसडीएम देवेंद्र शर्मा को इसकी जानकारी दी है।
उन्होंने बताया कि सरोवर मेंं साफ पानी व निकासी की कोई व्यवस्था न होने कारण ऐसे हालत बने हैं। सरोवर में मछलियों के मरने की समस्या पुरानी है। पिछले साल भी सरोवर में बड़ी संख्या में मछलियां मर गई थीं। इस सूचना पर एसडीएम की ओर से संज्ञान लेने के बाद नगर पालिका, सिंचाई, जन स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, केडीबी व अन्य विभाग हरकत में आए थे। एसडीएम देवेंद्र शर्मा ने कहा कि प्राचीन श्री कपिल मुनि सरोवर में व्यापक स्तर पर अचानक मछलियोंं के मरने का जो मामला प्रकाश में आया है। वह संज्ञान में है। मछलियों को बचाने के लिए कवायद की जा रही है।
महाभागवत पुराण में है कपिलमुनि तीर्थ का उल्लेख
कपिलमुनि को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना गया है। उनके पिता करदम ऋषि और माता देवहूति थी। उन्होंने अपनी माता को सरोवर तट पर ही सांख्यदर्शन का ज्ञान दिया था। तट पर कपिलमुनि ने तपस्या की थी। पहले कलायत को कपिलायत बोला था, लेकिन धीरे-धीरे अब कलायत नाम हो गया। हर महीने की पूर्णिमा पर यहां मेला लगता है। 2006 में तीर्थ पर राष्ट्रीय सरस्वती अनुसंधान के वैज्ञानिक आए थे। उन्होंने माना था सरोवर में जलधारा अपने आप फूट जाती है। साल 2005 में तीर्थ के कायाकल्प पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ।
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कलायत। श्री कपिल मुनि सरोवर में एक बार फिर से मछलियों के मरने का मामला प्रकाश में आया है। इस बार व्यापक स्तर पर मछलियों के मरने से सरोवर में बदबू का आलम है। पिछले साल मई-जून में भी इस तरह की घटना हुई थी। इस समस्या पर विश्वकर्मा संगठन के प्रवक्ता प्रीत जगदेवा ने एसडीएम देवेंद्र शर्मा को इसकी जानकारी दी है।
उन्होंने बताया कि सरोवर मेंं साफ पानी व निकासी की कोई व्यवस्था न होने कारण ऐसे हालत बने हैं। सरोवर में मछलियों के मरने की समस्या पुरानी है। पिछले साल भी सरोवर में बड़ी संख्या में मछलियां मर गई थीं। इस सूचना पर एसडीएम की ओर से संज्ञान लेने के बाद नगर पालिका, सिंचाई, जन स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, केडीबी व अन्य विभाग हरकत में आए थे। एसडीएम देवेंद्र शर्मा ने कहा कि प्राचीन श्री कपिल मुनि सरोवर में व्यापक स्तर पर अचानक मछलियोंं के मरने का जो मामला प्रकाश में आया है। वह संज्ञान में है। मछलियों को बचाने के लिए कवायद की जा रही है।
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महाभागवत पुराण में है कपिलमुनि तीर्थ का उल्लेख
कपिलमुनि को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना गया है। उनके पिता करदम ऋषि और माता देवहूति थी। उन्होंने अपनी माता को सरोवर तट पर ही सांख्यदर्शन का ज्ञान दिया था। तट पर कपिलमुनि ने तपस्या की थी। पहले कलायत को कपिलायत बोला था, लेकिन धीरे-धीरे अब कलायत नाम हो गया। हर महीने की पूर्णिमा पर यहां मेला लगता है। 2006 में तीर्थ पर राष्ट्रीय सरस्वती अनुसंधान के वैज्ञानिक आए थे। उन्होंने माना था सरोवर में जलधारा अपने आप फूट जाती है। साल 2005 में तीर्थ के कायाकल्प पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ।
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