{"_id":"6ad90d2633aa5700440b39a7","slug":"first-case-of-chikungunya-reported-in-kaithal-45-year-old-man-infected-kaithal-news-c-245-1-kht1014-156888-2026-10-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: कैथल में चिकनगुनिया का पहला मामला मिला, 45 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: कैथल में चिकनगुनिया का पहला मामला मिला, 45 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित
विज्ञापन
जिला नागरिक अस्पताल कैथल। संवाद
- फोटो : सांकेतिक
कैथल। जिले में इस साल चिकनगुनिया का पहला मामला सामने आया है। अंबाला रोड निवासी 45 वर्षीय व्यक्ति की जांच रिपोर्ट बुधवार को पॉजिटिव आई। मरीज तेज बुखार और घुटनों में दर्द से परेशान था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मरीज की हालत स्थिर है। जिले में अब तक चिकनगुनिया के संदिग्ध मरीजों के करीब 35 सैंपल लिए जा चुके हैं। पिछले साल जिले में चिकनगुनिया के तीन मामले सामने आए थे।
वहीं इस साल अब तक डेंगू के आठ और स्वाइन फ्लू के नौ मामले भी मिल चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार चिकनगुनिया के संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांच करवाई जाती है। आमतौर पर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मिल जाती है। उप सिविल सर्जन डॉ. नीरज मंगला ने लोगों को मच्छरों से बचाव करने और लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी है।
तेज बुखार और जोड़ों में दर्द प्रमुख लक्षण
चिकनगुनिया एडीज प्रजाति के संक्रमित मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। इसके लक्षण आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के कुछ दिनों बाद दिखाई देते हैं। मरीज को अचानक तेज बुखार, घुटनों, हाथ-पैरों और अन्य जोड़ों में तेज दर्द हो सकता है। इसके अलावा सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और त्वचा पर लाल चकत्ते भी पड़ सकते हैं। जोड़ों का दर्द कई बार लंबे समय तक बना रहता है।
विज्ञापन
बरसात और नमी वाले मौसम में बढ़ता है खतरा
चिकनगुनिया फैलाने वाले एडीज मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। बारिश के मौसम और उसके बाद तापमान अनुकूल रहने और नमी बढ़ने पर इनके प्रजनन के लिए परिस्थितियां बन सकती हैं। घरों में रखे कूलर, गमले, टंकियां, पुराने बर्तन और अन्य पात्रों में जमा पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। ये मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय काटते हैं।
बचाव के लिए बरतें सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, घरों और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर और पानी के बर्तनों को नियमित रूप से साफ करें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छरों से बचाव के लिए रेपेलेंट का इस्तेमाल करें। दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगाना भी मददगार है।
चिकनगुनिया का कोई विशिष्ट एंटी वायरल उपचार नहीं है। मरीज को पर्याप्त आराम, तरल पदार्थ और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार बुखार की दवा लेनी चाहिए। डेंगू की आशंका को देखते हुए डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं न लें। तेज बुखार या जोड़ों में असहनीय दर्द होने पर चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
विज्ञापन
वहीं इस साल अब तक डेंगू के आठ और स्वाइन फ्लू के नौ मामले भी मिल चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार चिकनगुनिया के संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांच करवाई जाती है। आमतौर पर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मिल जाती है। उप सिविल सर्जन डॉ. नीरज मंगला ने लोगों को मच्छरों से बचाव करने और लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी है।
विज्ञापन
तेज बुखार और जोड़ों में दर्द प्रमुख लक्षण
चिकनगुनिया एडीज प्रजाति के संक्रमित मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। इसके लक्षण आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के कुछ दिनों बाद दिखाई देते हैं। मरीज को अचानक तेज बुखार, घुटनों, हाथ-पैरों और अन्य जोड़ों में तेज दर्द हो सकता है। इसके अलावा सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और त्वचा पर लाल चकत्ते भी पड़ सकते हैं। जोड़ों का दर्द कई बार लंबे समय तक बना रहता है।
विज्ञापन
बरसात और नमी वाले मौसम में बढ़ता है खतरा
चिकनगुनिया फैलाने वाले एडीज मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। बारिश के मौसम और उसके बाद तापमान अनुकूल रहने और नमी बढ़ने पर इनके प्रजनन के लिए परिस्थितियां बन सकती हैं। घरों में रखे कूलर, गमले, टंकियां, पुराने बर्तन और अन्य पात्रों में जमा पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। ये मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय काटते हैं।
बचाव के लिए बरतें सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, घरों और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर और पानी के बर्तनों को नियमित रूप से साफ करें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छरों से बचाव के लिए रेपेलेंट का इस्तेमाल करें। दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगाना भी मददगार है।
चिकनगुनिया का कोई विशिष्ट एंटी वायरल उपचार नहीं है। मरीज को पर्याप्त आराम, तरल पदार्थ और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार बुखार की दवा लेनी चाहिए। डेंगू की आशंका को देखते हुए डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं न लें। तेज बुखार या जोड़ों में असहनीय दर्द होने पर चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

जिला नागरिक अस्पताल कैथल। संवाद- फोटो : सांकेतिक