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काली माता मंदिर में पहुंचे पचास हजार श्रद्धालु
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Fifty thousand devotees reached Kali Mata temple
- फोटो : Kaithal
माता गेट स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में दो दिवसीय राज्य स्तरीय मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंगलवार को करीब 50 हजार श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचे। सोमवार सुबह चार बजे शुरू हुई पूजा अर्चना मंगलवार रात तक जारी रहेगी। काली माता बाजीगर समाज की कुलदेवी हैं। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश से बाजीगर समाज के लोग पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं।
महंत रमनपुरी ने बताया कि अमावस्या व पहले नवरात्र पर बाजीगर समाज के लोगों सहित जिलेभर से श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए आते हैं। पहले नवरात्र पर पूजा करने के बाद घरों में घट स्थापना करते हैं। बाजीगर समाज से नवविवाहित पूजा के लिए जरूर आते हैं। वे यहां सुखमय जीवन व अच्छी संतान की प्राप्ति के लिए पूजा अर्चना करते हैं।
महंत रमनपुरी ने बताया कि जब भारत और पाकिस्तान एक होते थे। उस समय पाकिस्तान से काली माता का स्थान यहां पर स्थापित किया गया था। तब से नववर्ष के प्रारंभ में प्रतिपदा प्रथम नवरात्र चैत्र मास को मेले का आयोजन होता है। पूरे भारत वर्ष से बाजीगर समाज के लोग अमावस्या की रात्रि से प्रतिपदा की प्रथम चैत्र की नवरात्र को सायं कालीन तक माता की पूजा अर्चना करते हैं। कोरोना को देखते हुए इस बार लगभग 150 सेवादारों को श्रद्धालुओं को मास्क व सैनिटाइजर देने और सामाजिक दूरी रखने में ड्यूटी लगाई गई है। इस बार भी केवल 10 फीसदी श्रद्धालु माता रानी के दर्शन करने पहुंचे हैं।
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प्रशासन ने नाइट कर्फ्यू भी लगाया है। इसलिए दिन में भी जो श्रद्धालु आ रहे हैं, वह दर्शन करके लौट रहे हैं। कोरोना महामारी को देखते हुए प्रशासन की हिदायतों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंगलवार सांय मेला का समापन हो जाएगा। इसके बाद नवरात्रों की पूजा अर्चना लगातार चलती रहेगी। नाइट कर्फ्यू के चलते सुबह छह बजे मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इस अवसर पर सेवादार राजीव कुमार, आनंद शास्त्री, तरसेम गुप्ता, रमेश जांगड़ा, गुरनाम बाजीगर, जोगीबाबा व बलकार सैनी मौजूद रहे।
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महंत रमनपुरी ने बताया कि अमावस्या व पहले नवरात्र पर बाजीगर समाज के लोगों सहित जिलेभर से श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए आते हैं। पहले नवरात्र पर पूजा करने के बाद घरों में घट स्थापना करते हैं। बाजीगर समाज से नवविवाहित पूजा के लिए जरूर आते हैं। वे यहां सुखमय जीवन व अच्छी संतान की प्राप्ति के लिए पूजा अर्चना करते हैं।
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महंत रमनपुरी ने बताया कि जब भारत और पाकिस्तान एक होते थे। उस समय पाकिस्तान से काली माता का स्थान यहां पर स्थापित किया गया था। तब से नववर्ष के प्रारंभ में प्रतिपदा प्रथम नवरात्र चैत्र मास को मेले का आयोजन होता है। पूरे भारत वर्ष से बाजीगर समाज के लोग अमावस्या की रात्रि से प्रतिपदा की प्रथम चैत्र की नवरात्र को सायं कालीन तक माता की पूजा अर्चना करते हैं। कोरोना को देखते हुए इस बार लगभग 150 सेवादारों को श्रद्धालुओं को मास्क व सैनिटाइजर देने और सामाजिक दूरी रखने में ड्यूटी लगाई गई है। इस बार भी केवल 10 फीसदी श्रद्धालु माता रानी के दर्शन करने पहुंचे हैं।
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प्रशासन ने नाइट कर्फ्यू भी लगाया है। इसलिए दिन में भी जो श्रद्धालु आ रहे हैं, वह दर्शन करके लौट रहे हैं। कोरोना महामारी को देखते हुए प्रशासन की हिदायतों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंगलवार सांय मेला का समापन हो जाएगा। इसके बाद नवरात्रों की पूजा अर्चना लगातार चलती रहेगी। नाइट कर्फ्यू के चलते सुबह छह बजे मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इस अवसर पर सेवादार राजीव कुमार, आनंद शास्त्री, तरसेम गुप्ता, रमेश जांगड़ा, गुरनाम बाजीगर, जोगीबाबा व बलकार सैनी मौजूद रहे।