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Kaithal News: सर्दी की छुट्टियों के बाद स्कूल पहुंचे कम विद्यार्थी
Tue, 20 Jan 2026 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 20 Jan 2026 01:40 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/राजौंद। ठंड की छुट्टियों के बाद सोमवार से जिलेभर में सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षाएं दोबारा शुरू हो गईं। पहले दिन कई दिनों की खामोशी के बाद स्कूलों की घंटियां तो गूंजीं, लेकिन कक्षाओं में बच्चों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। लंबी छुट्टियों का सीधा असर उपस्थिति पर देखने को मिला।
शहर के प्रमुख निजी स्कूलों में उपस्थिति करीब 70 से 80 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों और सरकारी स्कूलों में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत से भी कम रहा। कक्षा पहली से आठवीं तक की कक्षाएं काफी हद तक खाली नजर आईं। इसके विपरीत बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की उपस्थिति तुलनात्मक रूप से अधिक रही। कई अभिभावकों का कहना है कि सुबह के समय तापमान कम रहने के कारण छोटे बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में नन्हे बच्चों को स्कूल भेजना फिलहाल जोखिम भरा प्रतीत हो रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि आने वाले दो-तीन दिनों में विद्यार्थियों की उपस्थिति में सुधार होने की पूरी संभावना है। छुट्टियों के बाद पहले दिन आमतौर पर उपस्थिति कुछ कम रहती है, क्योंकि कई परिवार अभी यात्रा से लौट रहे होते हैं। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि शुरुआती दिनों में पढ़ाई का दबाव कम रखा जाए और बच्चों को धीरे-धीरे स्कूल के माहौल में ढलने में मदद दी जाए।
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उधर, राजौंद में स्कूल आने वाले अधिकतर विद्यार्थियों की संख्या 40 से 50 प्रतिशत ही रही। हालांकि स्टाफ मौजूद रहा। 18 तक अवकाश था इसलिए 19 को असमंजस की स्थिति रही।
ठंड लगने और वायरल संक्रमण ने बढ़ाई चिंता
वायरल संक्रमण, खांसी-जुकाम और बुखार के मामलों में बढ़ोतरी ने भी अभिभावकों को सतर्क कर दिया है। चिकित्सकों की सलाह है कि बच्चों को ठंड से बचाकर रखा जाए, क्योंकि तापमान में गिरावट से उनका श्वसन तंत्र प्रभावित हो सकता है। बढ़ती ठंड को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों के समय में बदलाव के निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकांश स्कूलों में अब कक्षाएं सुबह 9:00 या 9:30 बजे से शुरू की जा रही हैं। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को ठंड से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कई स्कूलों में खुले मैदान की बजाय कक्षाओं के भीतर ही प्रार्थना सभा कराई गई और बच्चों को आउटडोर गतिविधियों से दूर रखा गया।
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कैथल/राजौंद। ठंड की छुट्टियों के बाद सोमवार से जिलेभर में सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षाएं दोबारा शुरू हो गईं। पहले दिन कई दिनों की खामोशी के बाद स्कूलों की घंटियां तो गूंजीं, लेकिन कक्षाओं में बच्चों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। लंबी छुट्टियों का सीधा असर उपस्थिति पर देखने को मिला।
शहर के प्रमुख निजी स्कूलों में उपस्थिति करीब 70 से 80 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों और सरकारी स्कूलों में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत से भी कम रहा। कक्षा पहली से आठवीं तक की कक्षाएं काफी हद तक खाली नजर आईं। इसके विपरीत बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की उपस्थिति तुलनात्मक रूप से अधिक रही। कई अभिभावकों का कहना है कि सुबह के समय तापमान कम रहने के कारण छोटे बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में नन्हे बच्चों को स्कूल भेजना फिलहाल जोखिम भरा प्रतीत हो रहा है।
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शिक्षकों का कहना है कि आने वाले दो-तीन दिनों में विद्यार्थियों की उपस्थिति में सुधार होने की पूरी संभावना है। छुट्टियों के बाद पहले दिन आमतौर पर उपस्थिति कुछ कम रहती है, क्योंकि कई परिवार अभी यात्रा से लौट रहे होते हैं। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि शुरुआती दिनों में पढ़ाई का दबाव कम रखा जाए और बच्चों को धीरे-धीरे स्कूल के माहौल में ढलने में मदद दी जाए।
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उधर, राजौंद में स्कूल आने वाले अधिकतर विद्यार्थियों की संख्या 40 से 50 प्रतिशत ही रही। हालांकि स्टाफ मौजूद रहा। 18 तक अवकाश था इसलिए 19 को असमंजस की स्थिति रही।
ठंड लगने और वायरल संक्रमण ने बढ़ाई चिंता
वायरल संक्रमण, खांसी-जुकाम और बुखार के मामलों में बढ़ोतरी ने भी अभिभावकों को सतर्क कर दिया है। चिकित्सकों की सलाह है कि बच्चों को ठंड से बचाकर रखा जाए, क्योंकि तापमान में गिरावट से उनका श्वसन तंत्र प्रभावित हो सकता है। बढ़ती ठंड को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों के समय में बदलाव के निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकांश स्कूलों में अब कक्षाएं सुबह 9:00 या 9:30 बजे से शुरू की जा रही हैं। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को ठंड से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कई स्कूलों में खुले मैदान की बजाय कक्षाओं के भीतर ही प्रार्थना सभा कराई गई और बच्चों को आउटडोर गतिविधियों से दूर रखा गया।