रूस-यूक्रेन युद्ध: खारकीव से पोलैंड पहुंचना आसान नहीं, धमाकों के बीच ठंड में कांपते सब-वे के नीचे गुजारी रात
विद्यार्थी ने बताया कि बर्फबारी के साथ बमबारी हो रही है। आसमान में फर्राटा भरते फाइटर जेट भी धड़कने बढ़ा रहे हैं। कई विद्यार्थियों के पास सिर्फ एक दिन का राशन बचा है। सरकार से बचाव के लिए गुहार लगा रहे हैं।
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एयरपोर्ट ठप होने के बाद भारत सरकार की ओर से भले ही यूक्रेन में फंसे लोगों को पोलैंड सीमा से वापस लाने की बात कही जा रही है, लेकिन खारकीव में फंसे चार से पांच हजार विद्यार्थियों के लिए यह राह आसान नहीं है। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि खारकीव से पोलैंड की सीमा करीब दो हजार किलोमीटर दूर है, जहां जाने के लिए कोई साधन भी नहीं है। साथ ही रास्ते में बर्फबारी संग बमबारी हो रही है। ऐसे में वहां पहुंचना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि धमाकों के बीच बीती रात मेट्रो सब-वे के नीचे जागकर ठंड में कांपते हुए गुजारनी पड़ी। खारकीव में फंसे कैथल के विद्यार्थियों के अनुसार युद्ध के दौरान हो रहे धमाकों और आसमान में फर्राटा भरते फाइटर जेट की आवाज से वे सहमे हुए हैं। अमर उजाला से बातचीत में लोगों ने वहां के हालात साझा किए। वहां फंसे कुछ विद्यार्थियों के भय और परेशानियों की कहानी उन्हीं की जुबानी।
यूक्रेन में फंसे लोगों की जुबानी
मैं कैथल के चंदाना गेट से हूं। मैं यहां खारकीव शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हूं। रूस के हमले में सबसे ज्यादा प्रभावित यही इलाका है। हमने वीरवार की रात मेट्रो स्टेशन में सब वे के नीचे गुजारी। जहां शौचालय तो हैं, लेकिन प्रयोग करने लायक नहीं हैं। खाने की कमी है। शुक्रवार सुबह वे बर्फबारी और बमबारी के डर के बीच अपने कमरों तक पहुंचे, जहां खाने-पीने व नहाने के बाद फिर से सुरक्षा के लिहाज से सब-वे के नीचे जाना पड़ रहा है। दूतावास से ज्यादा मदद नहीं मिल रही। कहा जा रहा है कि पोलैंड सीमा पर बच्चों को बुलाया जा रहा है, लेकिन खारकीब से पोलैंड 2000 किलोमीटर दूरी पर है। नहीं पता आगे क्या होने वाला है? हर तरफ घबराहट है। -काजल, एमबीबीएस की छात्रा
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यहां बर्फ पड़ रही है। हम बिना कंबलों के सब-वे में रात को रुके। अब फिर वहीं जा रहे हैं। खारकीव रूस और बेलारूस की सीमा से घिरा है। यह पोलैंड से इतनी दूर है कि हम वहां नहीं जा सकते, या तो विशेष अनुमति लेकर भारतीय सेना यहां आए और उन्हें ले जाए, या फिर किसी अन्य माध्यम से उन्हें पोलैंड सीमा तक पहुंचाया जाए। तभी बचाव हो सकता है। अन्यथा यहां करीब 4 से 5 हजार विद्यार्थी खतरे में हैं। रात को ब्लास्ट नहीं हुए। अभी बमबारी की आवाजें आ रही हैं। एयरपोर्ट से मदद तो दूर कोई जानकारी भी यहां नहीं पहुंच रही है। उनके कंसल्टेंट हरदीप मदद कर रहे हैं। दिल्ली में शनिवार को परिवार व अन्य लोगों से रूसी दूतावास के बाहर एकत्रित होने की अपील व्हाट्सएप के माध्यम से की जा रही है। हम यहां दहशत में हैं। पूरी रात ब्लैक आउट रहा। सड़कों पर रूसी सैनिक बताए जा रहे हैं। पैदल जा नहीं सकते। पोलैंड के लिए कोई यातायात का साधन नहीं है। कमल, हांसी से
हम यहां इवानो फ्रेंकविस्क में अपने फ्लैट में हैं। अभी कहा जा रहा है एयर इंडिया ने फ्लाइट भेज दी है। हमारी यूनिवर्सिटी ने बसें उपलब्ध करवाने की बात कही है। उम्मीद है कि जल्द हम यहां से निकल पाएंगे। कई बार चेतावनी भरे सायरन बज चुके हैं। सायरन बजने का मतलब हमें बंकर में जाना होगा। खाने का एक दिन का राशन बचा हुआ है। मेरे साथ यहां पूंडरी से विकास, यमुनानगर से रेसिपी सिंह और पानीपत से रोशन सिंह भी हैं। यहां के आसमान में फाइटर जेट घूम रहे हैं। बाहर निकलने में डर लग रहा है।- अंकित, कैथल।

यूक्रेन में मैट्रो स्टेशन पर शरण लिए भारतीय विद्यार्थी एवं अन्य लोग।

कलायत। बच्चों की सकुशल वतन वापसी के लिए शिव मंदिर में पूजा अर्चना करते हुए परिजन।