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धान न बिकने पर भड़के किसान, लगाया जाम
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कैथल। धान की फसल न बिकने के कारण गुस्साए किसानों ने शुक्रवार की दोपहर करीब 12 बजे जींद-कैथल मार्ग पर जाखौली अड्डा पर जाम लगा दिया। इससे पहले किसानों ने विरोध स्वरूप मार्केट कमेटी के कार्यालय में तालाबंदी भी की। जाम के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और यहां पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। करीब दो घंटे के बाद एसडीएम संजय कुमार के आश्वासन के बाद जाम खोला।
गौरतलब है कि पिछले पांच दिन से जारी आढ़तियों की हड़ताल से मजदूरों का काम भी ठप है। इससे उनमें भी रोष है और वे भी जाम में शामिल हुए। जाम लगा रहे किसानों का आरोप था कि सुबह के समय के उन्हें मंडी में धान लेकर आने के लिए कहा गया, लेकिन जब धान मंडी में लेकर पहुंचे तो बारिश हो गई। इससे धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं, किसानों ने धान की सरकारी खरीद शुरू न करने और आढ़तियों की हड़ताल समाप्त न करवाने पर विरोध जताया। आरोप लगाया कि एक तो पहले ही आढ़तियों की हड़ताल के कारण धान नहीं बिक रहा। दूसरा, खेतों से काटी गई धान की फसल भी खराब हो रही है। किसानों ने फसल काटकर ट्रॉलियों में रखी है, जो अब गर्मी के कारण खराब होने लगी है। मंडी में बारिश के पानी की निकासी को लेकर कोई प्रबंध नहीं किए।
दोपहर करीब 12 बजे नाराज किसानों ने जींद-कैथल मार्ग पर जाम लगाकर विरोध जताया। किसानों के लगाए जाम में उनके साथ मजदूर व कुछ आढ़ती भी शामिल हुए। पहले तो किसानों व मजदूरों को समझाने के लिए मार्केट कमेटी सचिव सतबीर राविश व रविंद्र सांगवान पहुंचे, लेकिन उन्होंने उनका कोई आश्वासन नहीं माना। इसके बाद एसडीएम संजय कुमार व तहसीलदार सुदेश मेहरा पहुंची। उन्होंने किसानों को मंडी में जलभराव की समस्या के 12 घंटे के भीतर समाधान के आश्वासन मिलने पर जाम खोल दिया गया। इसके बाद एसडीएम ने स्वयं मंडी में पहुंचकर जलभराव की स्थिति पर दौरा किया।
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किसान बोले, पड़ रही है दोहरी मार
किसान जसविंद्र, रामलाल, रामस्वरूप, अजीत, सरदार निशान सिंह व राम सिंह ने बताया कि वह शुक्रवार सुबह के समय नई अनाज मंडी में 1509 किस्म का धान बेचने के लिए पहुंचे थे। यहां पर बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी थी। वहीं, आढ़तियों की तरफ से खरीद नहीं की गई। इसके बाद वे रोष जताते हुए मार्केट कमेटी के कार्यालय में पहुंचे। यहां पर सरकारी खरीद न होने पर मार्केट कमेटी पर ताला लगाया था। इन किसानों ने कहा कि इस बार सीजन में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ मौसम ने परेशान किया है दूसरा मंडियों में चल रही हड़ताल ने। अब तो उन्हें हड़ताल के बीच अपनी फसल को बारिश से बचाने के लिए मंडी में ही खाट बिछाकर मंडी में पहरा देना पड़ रहा है। मंडी में न तो धान की खरीद हो रही है और न ही उठान का कार्य हो रहा है।
वहीं, मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन धर्मपाल कठवाड़ ने कहा कि ई-नेम पोर्टल प्रणाली के फैसले को वापस लेने सहित अन्य मांगों को पूरा नहीं किया जाता। तब तक हड़ताल लगातार जारी रहेगी। वे किसानों की समस्या को समझते हैं, लेकिन सरकार को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। उधर, एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि किसानों को मंडी में जलभराव की समस्या को लेकर आश्वासन दिया गया है। जल्द ही उनकी सभी समस्याओं का समाधान करवा दिया जाएगा।
मंडियों में धान की खरीद का कार्य बंद
ढांड। आढ़तियों की हड़ताल के कारण मंडियों में धान की खरीद का कार्य बंद है। ऐसे में मंडियों में धान के ढेर लगे हुए है। लगातार हुई बरसात के चलते ढांड की अनाज मंडियों में जलभराव के हालात हैं। इससे किसानों का ‘पीला सोना’ पानी में डूब कर ‘मिट्टी’ होता जा रहा है। ढांड मंडी में पड़ा हुआ हजारों किंवटल धान के नीचे पानी फिर गया है। किसानों का कहना है कि मंडी से पानी निकासी की व्यवस्था नही होने के चलते तीन से चार फीट तक जलभराव हुआ है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंडी में जो धान की ढेरियां पड़ी हुई है, उनका क्या हाल हुआ होगा। इस मंजर को किसान अपनी आंखों से देखकर सोचने पर मजबूर हो रहा है कि करें तो क्या करें। किसान करेशन, जसमेर, कृष्ण चंद, संजीव कुमार, जसबीर, प्रवीण कुमार, बलकार सिंह, बलजीत सिंह ने बताया कि पांच दिनों से मंडी में धान लिए बैठे है। किसानों ने मार्केट कमेटी अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि मंडी में पानी निकासी करना उनकी जिम्मेदारी बनती है लेकिन दिनभर मंडियों में पानी खड़ा रहा। दूसरी ओर मार्केट कमेटी का कोई भी कर्मचारी उनकी सुध लेने नहीं आया।
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गौरतलब है कि पिछले पांच दिन से जारी आढ़तियों की हड़ताल से मजदूरों का काम भी ठप है। इससे उनमें भी रोष है और वे भी जाम में शामिल हुए। जाम लगा रहे किसानों का आरोप था कि सुबह के समय के उन्हें मंडी में धान लेकर आने के लिए कहा गया, लेकिन जब धान मंडी में लेकर पहुंचे तो बारिश हो गई। इससे धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं, किसानों ने धान की सरकारी खरीद शुरू न करने और आढ़तियों की हड़ताल समाप्त न करवाने पर विरोध जताया। आरोप लगाया कि एक तो पहले ही आढ़तियों की हड़ताल के कारण धान नहीं बिक रहा। दूसरा, खेतों से काटी गई धान की फसल भी खराब हो रही है। किसानों ने फसल काटकर ट्रॉलियों में रखी है, जो अब गर्मी के कारण खराब होने लगी है। मंडी में बारिश के पानी की निकासी को लेकर कोई प्रबंध नहीं किए।
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दोपहर करीब 12 बजे नाराज किसानों ने जींद-कैथल मार्ग पर जाम लगाकर विरोध जताया। किसानों के लगाए जाम में उनके साथ मजदूर व कुछ आढ़ती भी शामिल हुए। पहले तो किसानों व मजदूरों को समझाने के लिए मार्केट कमेटी सचिव सतबीर राविश व रविंद्र सांगवान पहुंचे, लेकिन उन्होंने उनका कोई आश्वासन नहीं माना। इसके बाद एसडीएम संजय कुमार व तहसीलदार सुदेश मेहरा पहुंची। उन्होंने किसानों को मंडी में जलभराव की समस्या के 12 घंटे के भीतर समाधान के आश्वासन मिलने पर जाम खोल दिया गया। इसके बाद एसडीएम ने स्वयं मंडी में पहुंचकर जलभराव की स्थिति पर दौरा किया।
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किसान बोले, पड़ रही है दोहरी मार
किसान जसविंद्र, रामलाल, रामस्वरूप, अजीत, सरदार निशान सिंह व राम सिंह ने बताया कि वह शुक्रवार सुबह के समय नई अनाज मंडी में 1509 किस्म का धान बेचने के लिए पहुंचे थे। यहां पर बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी थी। वहीं, आढ़तियों की तरफ से खरीद नहीं की गई। इसके बाद वे रोष जताते हुए मार्केट कमेटी के कार्यालय में पहुंचे। यहां पर सरकारी खरीद न होने पर मार्केट कमेटी पर ताला लगाया था। इन किसानों ने कहा कि इस बार सीजन में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ मौसम ने परेशान किया है दूसरा मंडियों में चल रही हड़ताल ने। अब तो उन्हें हड़ताल के बीच अपनी फसल को बारिश से बचाने के लिए मंडी में ही खाट बिछाकर मंडी में पहरा देना पड़ रहा है। मंडी में न तो धान की खरीद हो रही है और न ही उठान का कार्य हो रहा है।
वहीं, मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन धर्मपाल कठवाड़ ने कहा कि ई-नेम पोर्टल प्रणाली के फैसले को वापस लेने सहित अन्य मांगों को पूरा नहीं किया जाता। तब तक हड़ताल लगातार जारी रहेगी। वे किसानों की समस्या को समझते हैं, लेकिन सरकार को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। उधर, एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि किसानों को मंडी में जलभराव की समस्या को लेकर आश्वासन दिया गया है। जल्द ही उनकी सभी समस्याओं का समाधान करवा दिया जाएगा।
मंडियों में धान की खरीद का कार्य बंद
ढांड। आढ़तियों की हड़ताल के कारण मंडियों में धान की खरीद का कार्य बंद है। ऐसे में मंडियों में धान के ढेर लगे हुए है। लगातार हुई बरसात के चलते ढांड की अनाज मंडियों में जलभराव के हालात हैं। इससे किसानों का ‘पीला सोना’ पानी में डूब कर ‘मिट्टी’ होता जा रहा है। ढांड मंडी में पड़ा हुआ हजारों किंवटल धान के नीचे पानी फिर गया है। किसानों का कहना है कि मंडी से पानी निकासी की व्यवस्था नही होने के चलते तीन से चार फीट तक जलभराव हुआ है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंडी में जो धान की ढेरियां पड़ी हुई है, उनका क्या हाल हुआ होगा। इस मंजर को किसान अपनी आंखों से देखकर सोचने पर मजबूर हो रहा है कि करें तो क्या करें। किसान करेशन, जसमेर, कृष्ण चंद, संजीव कुमार, जसबीर, प्रवीण कुमार, बलकार सिंह, बलजीत सिंह ने बताया कि पांच दिनों से मंडी में धान लिए बैठे है। किसानों ने मार्केट कमेटी अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि मंडी में पानी निकासी करना उनकी जिम्मेदारी बनती है लेकिन दिनभर मंडियों में पानी खड़ा रहा। दूसरी ओर मार्केट कमेटी का कोई भी कर्मचारी उनकी सुध लेने नहीं आया।

05-कैथल। मौके पर पहुंचे एसडीएम संजय कुमार ने अपनी सुझबुझ से किसानो व मजदूरों से बात कर जाम खुलवाया।- फोटो : Kaithal