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मौसम ने बढ़ाई किसानों की बेचैनी
ब्यूरो कैथल
Updated Wed, 27 Jul 2016 12:00 AM IST
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खेतों में पड़ी दरारें
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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इंद्र देवता के विमुख हो जाने के कारण कलायत क्षेत्र के किसानों में भारी बेचैनी है। बरसात न होने से खेतों में दरारें पड़ गईं तथा धान की फसल के सूखने की कगार पर पहुंच गई है। किसान रामदिया, गोपाल, राजकुमार, ब्रह्मपाल, रत्ना, ओमपाल ने बताया कि उन लोगों ने जैसे तैसे अपने खेतों में समयानुसार धान की फसल की रोपाई तो कर दी थी, पर बरसात की भारी कमी के कारण लगाई गई धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई। किसानों ने बताया कि पानी की कमी के कारण खरपतवार को रोकने के लिए डाली गई दवा भी बेअसर हो गई तथा सूखे खेतों में धान के पौधों से अधिक संख्या में खरपतवार नजर आ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि धान की फसल की रोपाई करने से पूर्व खेतों की तैयारी व रोपाई के अलावा उर्वरकों आदी पर उनके हजारों रुपए खर्च हो चुके हैं पर पानी की कमी के कारण वे सब सूखे की भेंट चढ़ रहे हैं। नहरी पानी से महरूम कलायत क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा भूमिगत पानी फसल के लायक न होने के कारण पूरी तरह से बरसात पर ही निर्भर करता है।
कलायत क्षेत्र के अधिकांश खेतों में इस बार किसानों ने धान की 1121 किस्म की बिजाई की है। श्रावण मास में आने वाली बरसात से धान की फसल पूरी तरह से विकसित हो जाती है तथा आगे कम पानी में भी फसल की पकाई हो जाती है। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में भूमिगत पानी खेती के योग्य है वहां ट्यूबवेल से दिए जाने वाले पानी के कारण फसल पर लागत इतनी आ रही है कि किसान को कुछ भी बचने वाला नहीं है। उनका कहना है कि यदि एक सप्ताह तक और कलायत हलका के किसान मानसून से वंचित रहते हैं तो खरीफ के चल रहे इस सीजन में किसान के हाथ कर्ज के अतिरिक्त कुछ भी नहीं आने वाला।
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किसानों का कहना है कि धान की फसल की रोपाई करने से पूर्व खेतों की तैयारी व रोपाई के अलावा उर्वरकों आदी पर उनके हजारों रुपए खर्च हो चुके हैं पर पानी की कमी के कारण वे सब सूखे की भेंट चढ़ रहे हैं। नहरी पानी से महरूम कलायत क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा भूमिगत पानी फसल के लायक न होने के कारण पूरी तरह से बरसात पर ही निर्भर करता है।
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कलायत क्षेत्र के अधिकांश खेतों में इस बार किसानों ने धान की 1121 किस्म की बिजाई की है। श्रावण मास में आने वाली बरसात से धान की फसल पूरी तरह से विकसित हो जाती है तथा आगे कम पानी में भी फसल की पकाई हो जाती है। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में भूमिगत पानी खेती के योग्य है वहां ट्यूबवेल से दिए जाने वाले पानी के कारण फसल पर लागत इतनी आ रही है कि किसान को कुछ भी बचने वाला नहीं है। उनका कहना है कि यदि एक सप्ताह तक और कलायत हलका के किसान मानसून से वंचित रहते हैं तो खरीफ के चल रहे इस सीजन में किसान के हाथ कर्ज के अतिरिक्त कुछ भी नहीं आने वाला।
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