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टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन में गए जिले से दूसरे किसान की मौत
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वर्ष 2020 जाते-जाते भी पाई क्षेत्र के लोगों के लिए दुखद रहा है। साल के आखिरी दिन निकटवर्ती भाना गांव का एक किसान आंदोलन के दौरान शहीद हो गया। इससे पूर्व गांव सेरहधा से 32 वर्षीय किसान की किसान आंदोलन में मौत हो चुकी है। मृतक किसान का गांव में भारी संख्या में उमड़ी किसानों की भीड़ के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी गांव में पहुंच कर मृतक किसान को श्रद्धांजलि दी।
पाई के उसके साथी वीरेंद्र ढुल पाई ने बताया कि गांव का यह रामकुमार नामक किसान 20 दिन पहले क्षेत्र के किसानों के साथ टिकरी बार्डर पर गया था और पाई की रसोई में किसान मजदूरों के लिये खाना देने का कार्य कर रहा था। 30 दिसंबर को लगभग तीन बजे यह रात के खाने के लिये सब्जी लेने के लिए बल्लभगढ़ सब्जी मंडी में गया था, जहां पर उसके दिमाग की नस पट गई। जिस कारण से उसको तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से उसको प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। जहां पर उसने दम तोड़ दिया। उसने बताया कि वहां से उसको कैथल अस्पताल पोस्टमार्टम के लिये लाया गया। पोस्टमार्टम के बाद उसको पाई सिसमोर रोड़ से सेकड़ों ट्रैक्टरों व अन्य वाहन के काफिले के साथ नारे लगाते हुए भाना ले जाया गया। उसके अंतिम संस्कार में कांग्रेस के नेता सतगबीर भाना, सुदीप सुरजेवाला तथा दर्जनों नजदीकी गांव के लोगों ने भाग लिया। संस्कार पर ले जाते हुए लोगों न सरकार के नारे लगाये और कहा कि जब तक सूरज चांद रहेगा, राम कुमार तेरा नाम रहेगा, इंकलाब जिंदा बाद। किसानों ने कहा की सरकार की किसान मजदूर विरोधी काले कानूनों के चलते हमारा यह किसान शहीद हुआ है। जिसको कभी भुलाया नही जा सकता।
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा वीरवार को किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। आंदोलन के दौरान कैथल स्थित सेरहदा गांव के अमरपाल और भाणा गांव के रामकुमार की मौत हो गई थी। हुड्डा ने दोनों किसानों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधवाया। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार से शहीद किसान परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा और एक-एक सरकारी नौकरी देने की मांग की। हुड्डा ने आंदोलन के दौरान लगातार हो रही शहादतों पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि 36 दिन में 40 से ज्यादा किसानों की जान जा चुकी है। रोज कोई ना कोई किसान अपनी जान गंवाता है। लेकिन सरकार लगातार अन्नदाता की अनदेखी कर रही है। सरकार को किसानों के प्रति संवेदनशीलता बरतनी चाहिए और जल्द से जल्द उनकी मांगों को मानते हुए आंदोलन समाप्त करवाना चाहिए। शहीद किसानों को श्रद्धांजलि देने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने पूंडरी में पत्रकारों को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में तीन कृषि कानून के खिलाफ आंदोलनरत किसानों के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही राज्यपाल को एकबार फिर महामहीम राज्यपाल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए पत्र लिखा है। इससे पहले हमने 7 दिसंबर को महामहीम राज्यपाल के नाम एक पत्र लिखा था, जिसमें विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की गई थी। लेकिन राज्यपाल ने आजतक उस मांग को नहीं माना।
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पाई के उसके साथी वीरेंद्र ढुल पाई ने बताया कि गांव का यह रामकुमार नामक किसान 20 दिन पहले क्षेत्र के किसानों के साथ टिकरी बार्डर पर गया था और पाई की रसोई में किसान मजदूरों के लिये खाना देने का कार्य कर रहा था। 30 दिसंबर को लगभग तीन बजे यह रात के खाने के लिये सब्जी लेने के लिए बल्लभगढ़ सब्जी मंडी में गया था, जहां पर उसके दिमाग की नस पट गई। जिस कारण से उसको तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से उसको प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। जहां पर उसने दम तोड़ दिया। उसने बताया कि वहां से उसको कैथल अस्पताल पोस्टमार्टम के लिये लाया गया। पोस्टमार्टम के बाद उसको पाई सिसमोर रोड़ से सेकड़ों ट्रैक्टरों व अन्य वाहन के काफिले के साथ नारे लगाते हुए भाना ले जाया गया। उसके अंतिम संस्कार में कांग्रेस के नेता सतगबीर भाना, सुदीप सुरजेवाला तथा दर्जनों नजदीकी गांव के लोगों ने भाग लिया। संस्कार पर ले जाते हुए लोगों न सरकार के नारे लगाये और कहा कि जब तक सूरज चांद रहेगा, राम कुमार तेरा नाम रहेगा, इंकलाब जिंदा बाद। किसानों ने कहा की सरकार की किसान मजदूर विरोधी काले कानूनों के चलते हमारा यह किसान शहीद हुआ है। जिसको कभी भुलाया नही जा सकता।
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पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा वीरवार को किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। आंदोलन के दौरान कैथल स्थित सेरहदा गांव के अमरपाल और भाणा गांव के रामकुमार की मौत हो गई थी। हुड्डा ने दोनों किसानों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधवाया। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार से शहीद किसान परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा और एक-एक सरकारी नौकरी देने की मांग की। हुड्डा ने आंदोलन के दौरान लगातार हो रही शहादतों पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि 36 दिन में 40 से ज्यादा किसानों की जान जा चुकी है। रोज कोई ना कोई किसान अपनी जान गंवाता है। लेकिन सरकार लगातार अन्नदाता की अनदेखी कर रही है। सरकार को किसानों के प्रति संवेदनशीलता बरतनी चाहिए और जल्द से जल्द उनकी मांगों को मानते हुए आंदोलन समाप्त करवाना चाहिए। शहीद किसानों को श्रद्धांजलि देने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने पूंडरी में पत्रकारों को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में तीन कृषि कानून के खिलाफ आंदोलनरत किसानों के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही राज्यपाल को एकबार फिर महामहीम राज्यपाल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए पत्र लिखा है। इससे पहले हमने 7 दिसंबर को महामहीम राज्यपाल के नाम एक पत्र लिखा था, जिसमें विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की गई थी। लेकिन राज्यपाल ने आजतक उस मांग को नहीं माना।
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