फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Falgue Meyle bought 41 pounds of MRP for Rs 545

फल्गू मेले में 41 रुपये एमआरपी की दवा 545 रुपये में खरीदी

Sat, 27 Jul 2019 10:54 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jul 2019 10:54 PM IST
विज्ञापन
Falgue Meyle bought 41 pounds of MRP for Rs 545
कैथल। पिछले साल सितंबर माह में आयोजित हुए फल्गू मेले में आयुर्वेद विभाग द्वारा दवाओं की खरीद में बड़ी गड़बड़ी की बात सामने आई है। विभागीय अधिकारियों ने इस कद्र आंखें मूंद लीं थीं कि 41 रुपये एमआरपी लिखी हुई दवा को 545 रुपये में खरीदा गया। कई दवाओं पर कोई डिस्काउंट व एक्सपायरी डेट भी नहीं लिखी हुई। साथ ही बिल में दर्शाए गए 5 प्रतिशत जीएसटी या फिर कई दवाओं का बैच नंबर भी नहीं है।
विज्ञापन

पूरे फल्गू मेले में 1.33 लाख रुपये की दवाएं खरीदी गईं
आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल ने बताया कि उसने आरटीआई के तहत फल्गू मेले में दी गई लोगों को आयुर्वेद की दवाओं के संबंध में जानकारी मांगी थी। जिसमें पता चला कि फल्गू मेले में 15 दिनों में करीब 1.33 लाख रुपये की आयुर्वेदिक दवाएं खरीदी गईं। जिसमें लोगों को बुखार, खांसी सहित सामान्य बीमारियों के लिए होम्योपैथिक की दवाएं देने की जानकारी दी गई।
विज्ञापन

बिलों में भारी घालमेल
जयपाल ने बताया कि आरटीआई में खुलासा हुआ है कि एक बिल में एक दवा जिसका एमआरपी महज 41 रुपये है। उसकी कीमत 545 रुपये बिल में दर्शाई गई है। इसी तरह से कई दवाओं के बैच नंबर, एक्सपायरी डेट भी नहीं है। इसके अलावा अधिकतर दवाओं पर कोई डिस्काउंट नहीं लिया गया। जबकि सरकारी नियम के अनुसार सरकारी खरीद में डिस्काउंट दिया जाता है। इतना ही नहीं बिल के अंदर भी डिस्काउंट 40 प्रतिशत व जीएसटी 5 प्रतिशत दर्शाया गया है। लेकिन दवा की कीमत यदि 545 रुपये है तो उसके लिए एमआरपी, अदा की जाने वाली कीमत भी पूरी 545 रुपये है। डिस्काउंट या जीएसटी का भुगतान के समय कोई ध्यान नहीं रखा गया। इसके अलावा इन दवाओं की खरीद भी अंबाला से दिखाई गई है। जबकि कैथल में तीन फर्में रजिस्टर्ड हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

दवाएं ना खरीदे जाने की पूरी आशंका
आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल का कहना है कि उन्हें पूरी आशंका है कि येे दवाएं खरीदी ही नहीं गईं। क्योंकि सभी बिल 49 हजार रुपये से कम हैं। यदि ये 50 हजार रुपये से अधिक की खरीद होती तो ई-वे बिल बनवाने पड़ते। यदि ये दवाएं एक ही जगह से खरीदी गई हैं तो ई-वे बिल से बचने के लिए तीन बार में खरीदी हुई दिखाई गई हैं। एक सिरप, जिसकी कीमत आज भी 111 रुपये है, उसे वर्ष 2018 में 136 रुपये के हिसाब से खरीदा गया है। यदि जांच हो तो विभाग में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं।

सीएम विंडो में दी शिकायत, जिस अधिकारी ने खरीदी, वही कर रही है जांच
जयपाल ने इस संबंध में सीएम विंडो में शिकायत देकर जांच की मांग की। लेकिन हास्यास्पद बात यह है कि जिस अधिकारी द्वारा ये बिल खरीदे गए और जिसकी जांच की जानी है। उसी अधिकारी को इस शिकायत के लिए जांच अधिकारी बना दिया गया है। जयपाल ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के आदेश हैं कि जिस अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत है, वह अधिकारी उस शिकायत की जांच करेगा। लेकिन यहां इन निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जयपाल ने कहा कि इस मामले को वापिस लेने के लिए उस पर दबाव बनाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed