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Kaithal News: डेरा सुर्यकूंड में मेले का शुभारंभ

Sun, 30 Mar 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 30 Mar 2025 01:30 AM IST
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Fair inaugurated at Dera Suryakund
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। शहर के माता गेट स्थित डेरा सुर्यकूंड में शनिवार को दो दिवसीय विश्व प्रसिद्ध मेले की शुरुआत हुई। यह मेला चैत्र नवरात्र पर अमावस्या पर लगता है। इसके बाद पहले नवरात्र पर शाम के समय इस मेले का समापन होगा होगा। डेरे में काली माता मंदिर बाजीगर समाज की कुलदेवी का मंदिर है। मेले को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है।

श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर मां काली के दरबार में माथा टेका और मनोकामनाएं मांगी। मेले को पुलिस की ओर से भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत 50 से अधिक पुलिसकर्मी व 200 सेवादारों को व्यवस्था बनाने के लिए लगाया गया है। इस दौरान सीवन गेट से माता गेट और हिंद सिनेमा से माता गेट जाने वाले रास्ते को पूरी तरह से बंद किया गया है।
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यह है मंदिर का इतिहास ः डेरे के महंत रमन पुरी महाराज ने बताया कि करीब 150 वर्ष पहले सूर्यकुंड डेरे में पंजाब निवासी बाजीगर समाज का एक बुजुर्ग व्यक्ति यहां पर विश्राम करने के लिए ठहरा। उसने पूरी रात यहां पर बिताई। यहां पर काली माता ने बुजुर्ग को सुबह के समय दर्शन दिए। उन्होंने कहा कि आज के बाद से हर वर्ष चैत्र नवरात्र पर्व के पहले दिन बाजीगर समाज के लोगों की पूजा-अर्चना करने पर वे उनकी मनोकामनाएं पूरी करेंगी। तभी से यह मंदिर बाजीगर समाज के लोगों के लिए कुल देवी का मंदिर बन गया।
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बाजीगर समाज में विवाह होने के बाद सबसे पहले नवविवाहित जोड़ा इस मंदिर में माथा टेकता है और उसके बाद ही गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है।

डेरे का इतिहास महाभारत काली से जुड़ा ः महंत ने बताया कि इस डेरे का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। यह कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि का तीर्थ है। प्राचीन मान्यता के अनुसार महाभारत काल में ज्येष्ठ पांडव पुत्र युुधिष्ठिर ने कैथल में ही नवग्रह कुंडों की स्थापना की थी। इनमें से सबसे बड़ा कुंड सूर्यकुंड के नाम से स्थापित किया गया था। इसके साथ ही यहां पर स्थित माता काली देवी के मंदिर को बाजीगर समाज की कुलदेवी माना जाता है। इसलिए यहां बाजीगर समाज के लोग ज्यादा संख्या में पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं।
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