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ऑनलाइन चल रहे एमटीपी किट के अवैध कारोबार का पर्दाफाश
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एमटीपी किट का अवैध कारोबार ऑनलाइन साइटों पर चल रहा है। साइट पर सर्च करके अगर एक क्लिक करें तो तुरंत किट की बुकिंग होम डिलिवरी के लिए हो रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के पीएनडीटी नोडल अधिकारी ने खुद प्रमाण के तौर पर ऑनलाइन एमटीपी किट मंगवाई। ऑनलाइन बुकिंग के मात्र एक ही सप्ताह में किट डॉक्टर द्वारा दिए गए पते पर पहुंच गई। अवैध धंधे को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने किट तैयार करने वाली कंपनी और बेचने वाली कंपनी और होम डिलिवरी देने वाली साइट अमेजॉन डॉट इन सहित चार के खिलाफ कोर्ट में केस किया है।
पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. गौरव पूनिया ने बताया कि किट की ऑनलाइन डिलिवरी के बारे में विभाग के पास शिकायतें आई थी। इस पर उन्होंने 27 मार्च को प्रमाणिकता के लिए साइट खोलकर दो किट के लिए ऑर्डर किया। 897 रुपये के खर्च में चार अप्रैल को एक डिलिवरी ब्वॉय किट लेकर उनके पते पर पहुंचा। उन्होंने तुरंत सिविल सर्जन को इसके बारे में सूचना दी। विभाग के अन्य अधिकारियों के सामने जब पैकेट खोलकर देखे गए तो उनमें दो किट ही पाई गई।
प्रतिबंधित किट गर्भपात में प्रयोग की जाती है। अधिकृत चिकित्सक ही किट को रख सकती हैं। यह गर्भवती महिलाओं पर गंभीर परिस्थितियों में ही प्रयोग की जा सकती है। ऐसे में जब किट ही सरेआम बिक रही है तो लिंग जांच और अवैध तरीके से गर्भपात होने के मामलों को नकारा नहीं जा सकता। सिविल सर्जन डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि किट जिला ड्रग्स कंट्रोल अधिकारी को सौंप दी गई है। मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा केस दायर करवा दिया गया है। विभाग गर्भपात और लिंग जांच जैसे मामलों को लेकर भी सतर्क है। अवैध धंधे को पनपने नहीं दिया जाएगा।
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पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. गौरव पूनिया ने बताया कि किट की ऑनलाइन डिलिवरी के बारे में विभाग के पास शिकायतें आई थी। इस पर उन्होंने 27 मार्च को प्रमाणिकता के लिए साइट खोलकर दो किट के लिए ऑर्डर किया। 897 रुपये के खर्च में चार अप्रैल को एक डिलिवरी ब्वॉय किट लेकर उनके पते पर पहुंचा। उन्होंने तुरंत सिविल सर्जन को इसके बारे में सूचना दी। विभाग के अन्य अधिकारियों के सामने जब पैकेट खोलकर देखे गए तो उनमें दो किट ही पाई गई।
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प्रतिबंधित किट गर्भपात में प्रयोग की जाती है। अधिकृत चिकित्सक ही किट को रख सकती हैं। यह गर्भवती महिलाओं पर गंभीर परिस्थितियों में ही प्रयोग की जा सकती है। ऐसे में जब किट ही सरेआम बिक रही है तो लिंग जांच और अवैध तरीके से गर्भपात होने के मामलों को नकारा नहीं जा सकता। सिविल सर्जन डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि किट जिला ड्रग्स कंट्रोल अधिकारी को सौंप दी गई है। मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा केस दायर करवा दिया गया है। विभाग गर्भपात और लिंग जांच जैसे मामलों को लेकर भी सतर्क है। अवैध धंधे को पनपने नहीं दिया जाएगा।
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