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Kaithal News: भारतीय नववर्ष मनाने का महत्व बताया
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कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के सामने स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान में रविवार को संस्थान की ओर से भारतीय नववर्ष के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी पलक भारती ने श्रद्धालुओं को भारतीय नववर्ष मनाए जाने का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोग एक जनवरी को नववर्ष के रूप में मनाते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति और पंचांग के अनुसार यह केवल ग्रेगोरियन केलेंडर पर आधारित अंग्रेजी नववर्ष है। उन्होंने बताया कि भारतीय विक्रम संवत के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ही नववर्ष का वास्तविक शुभारंभ माना जाता है। उन्होंने कहा कि जब हम अंग्रेजी नववर्ष शुरू होने पर प्रकृति पूरी तरह सुप्त अवस्था में होती है और ठंड अपने चरम पर होती है। वातावरण में नीरसता होती है, न तो पेड़-पौधों में हरियाली होती है और न ही कोई नवीनता का संचार दिखाई देता है।
साध्वी ने आगे कहा कि हमें अपने गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमने अंग्रेजों से अपनी सत्ता तो छीन ली लेकिन उनकी संस्कृति को अब भी ढो रहे हैं। यह स्वतंत्रता अधूरी है, यह क्रांति अधूरी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे भारतीय नववर्ष और अंग्रेजी नववर्ष के अंतर को समझें और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने बताया कि जब हम स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों को याद करते हैं तो हमें यह भी याद रखना चाहिए कि उन्होंने सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष नहीं किया, बल्कि भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना के लिए भी प्रयास किया। इसलिए यदि हमें वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त करनी है, तो हमें अंग्रेजियत से मुक्त होकर अपनी भारतीय संस्कृति को पुनः अपनाना होगा। कार्यक्रम के अंत में सभी ने भारतीय संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा को अपनाने का संकल्प लिया।
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उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोग एक जनवरी को नववर्ष के रूप में मनाते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति और पंचांग के अनुसार यह केवल ग्रेगोरियन केलेंडर पर आधारित अंग्रेजी नववर्ष है। उन्होंने बताया कि भारतीय विक्रम संवत के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ही नववर्ष का वास्तविक शुभारंभ माना जाता है। उन्होंने कहा कि जब हम अंग्रेजी नववर्ष शुरू होने पर प्रकृति पूरी तरह सुप्त अवस्था में होती है और ठंड अपने चरम पर होती है। वातावरण में नीरसता होती है, न तो पेड़-पौधों में हरियाली होती है और न ही कोई नवीनता का संचार दिखाई देता है।
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साध्वी ने आगे कहा कि हमें अपने गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमने अंग्रेजों से अपनी सत्ता तो छीन ली लेकिन उनकी संस्कृति को अब भी ढो रहे हैं। यह स्वतंत्रता अधूरी है, यह क्रांति अधूरी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे भारतीय नववर्ष और अंग्रेजी नववर्ष के अंतर को समझें और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने बताया कि जब हम स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों को याद करते हैं तो हमें यह भी याद रखना चाहिए कि उन्होंने सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष नहीं किया, बल्कि भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना के लिए भी प्रयास किया। इसलिए यदि हमें वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त करनी है, तो हमें अंग्रेजियत से मुक्त होकर अपनी भारतीय संस्कृति को पुनः अपनाना होगा। कार्यक्रम के अंत में सभी ने भारतीय संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा को अपनाने का संकल्प लिया।
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