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Kaithal News: मुश्किल हुईं आपातकालीन सेवाएं
Sat, 16 Mar 2024 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 16 Mar 2024 01:56 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की समस्याएं कम नहीं हो रही है। अब अस्पताल में सामान्य ओपीडी में चिकित्सकों की कमी के साथ भी आपातकालीन वार्ड में चिकित्सकों की कमी हो गई है। इस कारण इस वार्ड में आने वाले मरीजों को आपातकालीन सेवाएं नहीं मिल पा रही है।
गौरतलब है कि अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में इस समय छह एमबीबीएस चिकित्सक चाहिए, लेकिन यहां पर केवल दो चिकित्सक ही कार्यरत हैं। यहां पर पहले तीन चिकित्सक कार्यरत थे, लेकिन पिछले सप्ताह ही एक चिकित्सक डॉ. कर्मजीत का तबादला रोहतक में हो गया था। इसके बाद से आपातकालीन वार्ड में आने वाले मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। यहां पर अधिकतर समय में चिकित्सक न मिलने की स्थिति में मरीजों को चंडीगढ़ या रोहतक के पीजीआई में रेफर कर दिया जाता है। जबकि जिला स्तर पर मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता है।
अस्पताल में 54 स्वीकृत पद में महज 16 चिकित्सक हैं कार्यरत
नागरिक अस्पताल में पहले से चिकित्सकों का टोटा हैं। जिला स्तर पर अस्पताल में चिकित्सकों के 54 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इस समय इनमें से महज 16 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। इसमें से भी 13 चिकित्सक ही ओपीडी में मरीजों का इलाज करते हैं। जबकि अन्य तीन चिकित्सकों को कार्यालय का कार्यभार सौंपा गया है। ऐसे में वे बहुत कम समय ओपीडी में बिता पाते हैं। अस्पताल में लगातार मरीजों की समस्या बढ़ने के कारण उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।
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रोहतक जाने को कहा है
कुछ दिन पहले बेटे के साथ सड़क दुघर्टना हो गई थीं। हादसे में उसकी टांग टूट गई थी। इसके बाद आपातकालीन वार्ड में ही उसका इलाज जारी था, लेकिन अब चिकित्सकों की कमी की वजह से डॉक्टरों ने बेटे का इलाज और कहीं से करवाने के लिए की सलाह दी है। यहां मौजूद अन्य चिकित्सक ने कहा कि वे रोहतक में जाकर उसकी टांग का ऑपरेशन करवा लें तो ज्यादा बेहतर होगा।
-रीना, शहरवासी, कैथल।
बाहर से दवा को कहा
पिछले कुछ दिन से सांस की बीमारी के कारण पत्नी का इलाज सामान्य अस्पताल से जारी है। पिछले सप्ताह ही दवा लेकर गया था, लेकिन अब शुक्रवार को दवा लेने के लिए पहुंचा था, लेकिन चिकित्सक न होने के चलते उसे बाहर से दवा लेने के लिए कहा। इस कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। यहां पर मरीजों की संख्या के आधार पर चिकित्सक होने चाहिए। -राजबीर सिंह, शहरवासी, कैथल।
पिछले सप्ताह ही चिकित्सक डॉ. कर्मजीत का तबादला रोहतक में हो गया था। इस कारण कुछ काम प्रभावित जरूर हो रहा है। यहां पर इस समय छह एमबीबीएस चिकित्सक चाहिए। इस समय यहां पर दो चिकित्सक ही कार्यरत हैं। चिकित्सकों की कमी की समस्या को लेकर आला अधिकारियों के साथ पत्राचार किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही आपातकाल वार्ड में चिकित्सक आएंगे। - डॉ. सचिन मांडले, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल, कैथल।
चिरायु योजना के परिवारों का इलाज से किया इंकार
कैथल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपने बकाया 300 करोड़ रुपये के लिए सरकार से संघर्ष का मन बना लिया है। निजी डॉक्टरों ने 16 मार्च से चिरायु योजना के पात्रों का इलाज बंद करने का फैसला किया है। डॉक्टरों ने सरकार से अपनी बकाया राशि मांगी है। आंकड़ों के अनुसार, कैथल में 5,39,467 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं। सरकार की ओर से पिछले चार माह से निजी अस्पतालों को मरीजों के इलाज का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे निजी अस्पतालों के संचालक नाराज हैं। अब लोगों को अपनी जेब से पैसे देकर अपना इलाज कराना पड़ेगा। यह जानकारी देते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ बीबी कक्कड़ ने बताया कि राज्य कार्यकारिणी के अनुसार ही आगामी फैसला लिया जाएगा। संवाद
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कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की समस्याएं कम नहीं हो रही है। अब अस्पताल में सामान्य ओपीडी में चिकित्सकों की कमी के साथ भी आपातकालीन वार्ड में चिकित्सकों की कमी हो गई है। इस कारण इस वार्ड में आने वाले मरीजों को आपातकालीन सेवाएं नहीं मिल पा रही है।
गौरतलब है कि अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में इस समय छह एमबीबीएस चिकित्सक चाहिए, लेकिन यहां पर केवल दो चिकित्सक ही कार्यरत हैं। यहां पर पहले तीन चिकित्सक कार्यरत थे, लेकिन पिछले सप्ताह ही एक चिकित्सक डॉ. कर्मजीत का तबादला रोहतक में हो गया था। इसके बाद से आपातकालीन वार्ड में आने वाले मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। यहां पर अधिकतर समय में चिकित्सक न मिलने की स्थिति में मरीजों को चंडीगढ़ या रोहतक के पीजीआई में रेफर कर दिया जाता है। जबकि जिला स्तर पर मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता है।
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अस्पताल में 54 स्वीकृत पद में महज 16 चिकित्सक हैं कार्यरत
नागरिक अस्पताल में पहले से चिकित्सकों का टोटा हैं। जिला स्तर पर अस्पताल में चिकित्सकों के 54 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इस समय इनमें से महज 16 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। इसमें से भी 13 चिकित्सक ही ओपीडी में मरीजों का इलाज करते हैं। जबकि अन्य तीन चिकित्सकों को कार्यालय का कार्यभार सौंपा गया है। ऐसे में वे बहुत कम समय ओपीडी में बिता पाते हैं। अस्पताल में लगातार मरीजों की समस्या बढ़ने के कारण उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।
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रोहतक जाने को कहा है
कुछ दिन पहले बेटे के साथ सड़क दुघर्टना हो गई थीं। हादसे में उसकी टांग टूट गई थी। इसके बाद आपातकालीन वार्ड में ही उसका इलाज जारी था, लेकिन अब चिकित्सकों की कमी की वजह से डॉक्टरों ने बेटे का इलाज और कहीं से करवाने के लिए की सलाह दी है। यहां मौजूद अन्य चिकित्सक ने कहा कि वे रोहतक में जाकर उसकी टांग का ऑपरेशन करवा लें तो ज्यादा बेहतर होगा।
-रीना, शहरवासी, कैथल।
बाहर से दवा को कहा
पिछले कुछ दिन से सांस की बीमारी के कारण पत्नी का इलाज सामान्य अस्पताल से जारी है। पिछले सप्ताह ही दवा लेकर गया था, लेकिन अब शुक्रवार को दवा लेने के लिए पहुंचा था, लेकिन चिकित्सक न होने के चलते उसे बाहर से दवा लेने के लिए कहा। इस कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। यहां पर मरीजों की संख्या के आधार पर चिकित्सक होने चाहिए। -राजबीर सिंह, शहरवासी, कैथल।
पिछले सप्ताह ही चिकित्सक डॉ. कर्मजीत का तबादला रोहतक में हो गया था। इस कारण कुछ काम प्रभावित जरूर हो रहा है। यहां पर इस समय छह एमबीबीएस चिकित्सक चाहिए। इस समय यहां पर दो चिकित्सक ही कार्यरत हैं। चिकित्सकों की कमी की समस्या को लेकर आला अधिकारियों के साथ पत्राचार किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही आपातकाल वार्ड में चिकित्सक आएंगे। - डॉ. सचिन मांडले, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल, कैथल।
चिरायु योजना के परिवारों का इलाज से किया इंकार
कैथल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपने बकाया 300 करोड़ रुपये के लिए सरकार से संघर्ष का मन बना लिया है। निजी डॉक्टरों ने 16 मार्च से चिरायु योजना के पात्रों का इलाज बंद करने का फैसला किया है। डॉक्टरों ने सरकार से अपनी बकाया राशि मांगी है। आंकड़ों के अनुसार, कैथल में 5,39,467 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं। सरकार की ओर से पिछले चार माह से निजी अस्पतालों को मरीजों के इलाज का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे निजी अस्पतालों के संचालक नाराज हैं। अब लोगों को अपनी जेब से पैसे देकर अपना इलाज कराना पड़ेगा। यह जानकारी देते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ बीबी कक्कड़ ने बताया कि राज्य कार्यकारिणी के अनुसार ही आगामी फैसला लिया जाएगा। संवाद