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कक्षा छठी और आठवीं के विद्यार्थियों को नहीं आती एबीसीडी
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
Updated Mon, 04 Jul 2016 11:53 PM IST
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शिक्षण व्यवस्था
- फोटो : ब्यूरो
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कैथल। सरकारी स्कूलों में अध्यापक तमाम दावे करें। वेतन के लिए आंदोलन करें। लेकिन यदि कक्षा छठी से आठवीं तक के बच्चे एबीसीडी भी ना लिख पाएं तो यह उन अध्यापकों के लिए वाकई शर्म का विषय है। यहां एक स्कूल के 40 विद्यार्थियों में से केवल 7 विद्यार्थियों को एबीसीडी आती है। वहीं 515 अंक की संख्या को पांच से भाग देने के सवाल को महज 5 विद्यार्थी ही हल कर पाए।
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में डिप्टी डीईओ शमशेर सिरोही एक समारोह में गए थे। उन्होंने कक्षा छठी से लेकर आठवीं तक की छात्राओं को एबीसीडी लिखने के लिए कहा तो परिणाम चौंकाने वाले सामने आए। कक्षा में मौजूद 40 छात्राओं में से केवल 7 छात्राएं ही एबीसीडी सही लिख सकी। वहीं गणित का एक सवाल किया गया।
जिसमें डिप्टी डीओ ने 515 की एक संख्या को पांच से भाग देने के लिए कहा। जिसमें केवल पांच छात्राओं ने ही जवाब सही दिया। 35 छात्राओं का जवाब गलत रहा। कई छात्राओं को 515 तक की संख्या भी नहीं लिखनी आई। ऐसे में डिप्टी डीओ ने गणित व अंग्रेजी अध्यापिकाओं को बुलाकर बच्चों की स्थिति से अवगत करवाया। विद्यालय की अध्यापिकाओं को आदेश दिए हैं कि वह पहले अक्षर ज्ञान दें।
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डिप्टी डीओ ने कहा कि छठी से आठवीं की कक्षाओं में पहुंचने के बाद भी अगर पांच से भाग विद्यार्थियों को नहीं आता है तो यह बहुत की नाजुक स्थिति है। ऐसे में अध्यापकों को बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। पांच वर्ष में अगर बच्चे को एबीसीडी का ज्ञान नहीं है तो हालात काफी खराब हैं। ऐसे में कमजोर बच्चों के लिए नई शरूआत करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्कूल अध्यापिकाओं को आदेश दिए हैं कि विद्यार्थियों को आधार मजबूत करें। ताकि भविष्य में उन्हें परेशानी न झेलनी पड़े।
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राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में डिप्टी डीईओ शमशेर सिरोही एक समारोह में गए थे। उन्होंने कक्षा छठी से लेकर आठवीं तक की छात्राओं को एबीसीडी लिखने के लिए कहा तो परिणाम चौंकाने वाले सामने आए। कक्षा में मौजूद 40 छात्राओं में से केवल 7 छात्राएं ही एबीसीडी सही लिख सकी। वहीं गणित का एक सवाल किया गया।
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जिसमें डिप्टी डीओ ने 515 की एक संख्या को पांच से भाग देने के लिए कहा। जिसमें केवल पांच छात्राओं ने ही जवाब सही दिया। 35 छात्राओं का जवाब गलत रहा। कई छात्राओं को 515 तक की संख्या भी नहीं लिखनी आई। ऐसे में डिप्टी डीओ ने गणित व अंग्रेजी अध्यापिकाओं को बुलाकर बच्चों की स्थिति से अवगत करवाया। विद्यालय की अध्यापिकाओं को आदेश दिए हैं कि वह पहले अक्षर ज्ञान दें।
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डिप्टी डीओ ने कहा कि छठी से आठवीं की कक्षाओं में पहुंचने के बाद भी अगर पांच से भाग विद्यार्थियों को नहीं आता है तो यह बहुत की नाजुक स्थिति है। ऐसे में अध्यापकों को बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। पांच वर्ष में अगर बच्चे को एबीसीडी का ज्ञान नहीं है तो हालात काफी खराब हैं। ऐसे में कमजोर बच्चों के लिए नई शरूआत करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्कूल अध्यापिकाओं को आदेश दिए हैं कि विद्यार्थियों को आधार मजबूत करें। ताकि भविष्य में उन्हें परेशानी न झेलनी पड़े।