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Kaithal News: पुण्यतिथि पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को किया याद
Tue, 24 Jun 2025 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 24 Jun 2025 01:52 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक और शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर बूथ संख्या-156 पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई पूर्व विधायक लीला राम ने की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान हमें यह सिखाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन से हुई। इसके पश्चात पूर्व विधायक लीला राम ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रहित में किए गए ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि वे दूरदृष्टि संपन्न नेता और विचारक थे, जिन्होंने ‘’एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे’’ का नारा देकर भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।
उन्होंने कहा कि धारा 370 के विरोध में डॉ. मुखर्जी का संघर्ष भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा और आज जब जम्मू-कश्मीर पूरी तरह भारत से एकीकृत हो चुका है, तो यह उनके सपनों की पूर्ति की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
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सभा में मंच को भगवा और सफेद रंग के झंडों व पोस्टरों से सजाया गया था, जिनमें डॉ. मुखर्जी के विचार और उनके जीवन के प्रेरणादायक क्षण दर्शाए गए थे। एक लघु चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे उपस्थित जनों ने गहनता से देखा और सराहा। लीला राम ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज राष्ट्रवाद का जो भाव देश में जागृत हुआ है, उसमें डॉ. मुखर्जी की विचारधारा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक विचारधारा आधारित पार्टी है और डॉ. मुखर्जी इस राष्ट्रवादी विचारधारा के मूल स्तंभ थे। इस अवसर पर भाजपा के बूथ, युवा मोर्चा, महिला मोर्चा और वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कार्यकर्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और पार्टी को बूथ स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया। अंत में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
जिलाध्यक्ष ज्योति सैनी ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर अर्पित किए पुष्प
कैथल। भारतीय जनसंघ के संस्थापक और महान राष्ट्रभक्त डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर सोमवार को भाजपा कार्यालय कैथल में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिलाध्यक्ष ज्योति सैनी ने कार्यकर्ताओं के साथ डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष ज्योति सैनी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। ज्योति सैनी ने बताया कि डॉ. मुखर्जी एक प्रखर शिक्षाविद् और योग्य प्रशासक थे। वे मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने बंगाल में वित्त मंत्री के रूप में और फिर नेहरू मंत्रिमंडल में उद्योग व आपूर्ति मंत्री के रूप में सेवा दी, लेकिन 1950 में दिल्ली समझौते से असहमति जताते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। संवाद
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कैथल। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक और शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर बूथ संख्या-156 पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई पूर्व विधायक लीला राम ने की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान हमें यह सिखाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन से हुई। इसके पश्चात पूर्व विधायक लीला राम ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रहित में किए गए ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि वे दूरदृष्टि संपन्न नेता और विचारक थे, जिन्होंने ‘’एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे’’ का नारा देकर भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।
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उन्होंने कहा कि धारा 370 के विरोध में डॉ. मुखर्जी का संघर्ष भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा और आज जब जम्मू-कश्मीर पूरी तरह भारत से एकीकृत हो चुका है, तो यह उनके सपनों की पूर्ति की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
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सभा में मंच को भगवा और सफेद रंग के झंडों व पोस्टरों से सजाया गया था, जिनमें डॉ. मुखर्जी के विचार और उनके जीवन के प्रेरणादायक क्षण दर्शाए गए थे। एक लघु चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे उपस्थित जनों ने गहनता से देखा और सराहा। लीला राम ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज राष्ट्रवाद का जो भाव देश में जागृत हुआ है, उसमें डॉ. मुखर्जी की विचारधारा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक विचारधारा आधारित पार्टी है और डॉ. मुखर्जी इस राष्ट्रवादी विचारधारा के मूल स्तंभ थे। इस अवसर पर भाजपा के बूथ, युवा मोर्चा, महिला मोर्चा और वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कार्यकर्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और पार्टी को बूथ स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया। अंत में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
जिलाध्यक्ष ज्योति सैनी ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर अर्पित किए पुष्प
कैथल। भारतीय जनसंघ के संस्थापक और महान राष्ट्रभक्त डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर सोमवार को भाजपा कार्यालय कैथल में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिलाध्यक्ष ज्योति सैनी ने कार्यकर्ताओं के साथ डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष ज्योति सैनी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। ज्योति सैनी ने बताया कि डॉ. मुखर्जी एक प्रखर शिक्षाविद् और योग्य प्रशासक थे। वे मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने बंगाल में वित्त मंत्री के रूप में और फिर नेहरू मंत्रिमंडल में उद्योग व आपूर्ति मंत्री के रूप में सेवा दी, लेकिन 1950 में दिल्ली समझौते से असहमति जताते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। संवाद