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डॉक्टर बोले-परिवार और ड्यूटी दोनों थे जरूरी, दोनों को संभाला
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एक तरफ परिवार के कोरोना संक्रमित सदस्यों की देखभाल का जिम्मा था तो दूसरी तरफ ड्यूटी भी महत्वपूर्ण थी। ऐसे में दोनों जिम्मेदारियों का प्रमुखता से निर्वहन किया। डॉक्टरों ने बताया कि एक तो दिन में ड्यूटी का समय भी पहले से ज्यादा होता था। ऐसे में परिवार के सदस्य कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद काफी दिक्कतें हो गई थी। फिर भी वे डटे रहे और दोनों कार्यों को देखते रहे। हालांकि ज्यादातर समय अस्पताल में ही रहना पड़ता था, लेकिन फिर भी साथ में परिवार की चिंता रहती थी। उन्होंने बताया कि भले ही परिस्थितियां विपरीत रही, लेकिन उन्होंने अपनी दोनों जिम्मेदारियां निभाई।
जिला नागरिक अस्पताल में तैनात डॉ. कविता गोयल ने बताया कि बीते वर्ष जिस समय कोरोना पीक पर था। उस समय उनके पति और बच्चे की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई थी। उस समय उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ ड्यूटी भी की। हालांकि उन्हें भी कोरोना जांच करने के बाद रिपोर्ट आने तक क्वारंटीन कर दिया गया था, लेकिन वे फिर भी फोन कॉल और अन्य तरीके से अपने पास आने वाले मरीजों का हर संभव प्रकार से इलाज करतीं रही। रिपोर्ट नेगेटिव आते ही फिर से अस्पताल में आना शुरू कर दिया। उस समय मरीजों को संभालना और परिवार की देखभाल करना दोनों ही जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण थी।
पुराने अस्पताल में तैनात डॉ. संदीप जैन ने बताया कि अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में जिस समय कोरोना से बचाव के लिए जिले में टीका उत्सव मनाया जा रहा था। उस दौरान उनकी माता और उनकी पत्नी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई थी। एक तो उस समय टीका उत्सव पीक पर था और दूसरा परिवार के सदस्य पॉजिटिव हो गए। फिर भी उन्होंने इस स्थिति का डटकर मुकाबला किया। परिवार को संभालने के साथ-साथ उन्होंने अपनी ड्यूटी भी निभाई। जो कार्य उन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा सौंपे गए थे और जो परिवार के प्रति जिम्मेदारी थी, दोनों को बखूबी निभाया।
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जिला नागरिक अस्पताल में तैनात डॉ. कविता गोयल ने बताया कि बीते वर्ष जिस समय कोरोना पीक पर था। उस समय उनके पति और बच्चे की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई थी। उस समय उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ ड्यूटी भी की। हालांकि उन्हें भी कोरोना जांच करने के बाद रिपोर्ट आने तक क्वारंटीन कर दिया गया था, लेकिन वे फिर भी फोन कॉल और अन्य तरीके से अपने पास आने वाले मरीजों का हर संभव प्रकार से इलाज करतीं रही। रिपोर्ट नेगेटिव आते ही फिर से अस्पताल में आना शुरू कर दिया। उस समय मरीजों को संभालना और परिवार की देखभाल करना दोनों ही जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण थी।
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पुराने अस्पताल में तैनात डॉ. संदीप जैन ने बताया कि अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में जिस समय कोरोना से बचाव के लिए जिले में टीका उत्सव मनाया जा रहा था। उस दौरान उनकी माता और उनकी पत्नी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई थी। एक तो उस समय टीका उत्सव पीक पर था और दूसरा परिवार के सदस्य पॉजिटिव हो गए। फिर भी उन्होंने इस स्थिति का डटकर मुकाबला किया। परिवार को संभालने के साथ-साथ उन्होंने अपनी ड्यूटी भी निभाई। जो कार्य उन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा सौंपे गए थे और जो परिवार के प्रति जिम्मेदारी थी, दोनों को बखूबी निभाया।
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