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डॉक्टर नियुक्त पर लाइसेंस नहीं, शोपीस बनीं मशीन
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कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टर नियुक्त होने के बावजूद प्लेटलेट्स निकालने की मशीन का लाइसेंस नहीं लिया जा रहा। यहां पर पिछले साल यह मशीन लगा दी गई थी और अब डॉक्टर भी उपलब्ध है, लेकिन लाइसेंस के अभाव में यह शोपीस बनी हुई है। इस संबंध में सिविल सर्जन का कहना है कि जल्द ही मशीन को शुरू करवा दिया जाएगा।
गौरतलब है कि अस्पताल में प्लेटलेट्स निकालने की मशीन बेकार पड़ी थी। वजह पूछने पर कहा जाता था कि इसे चलाने के लिए डॉक्टर नहीं मिल पा रहा। अब जब डॉक्टर ने नियुक्ति हो गई तो भी यह मरीजों के काम नहीं आ रही। दरअसल, इस मशीन के संचालन के लिए अलग से लाइसेंस की जरूरत होती है लेकिन यह उपलब्ध नहीं है। मशीन के संचालन की शर्तें भी अस्पताल प्रबंधन पूरी नहीं कर पा रहा। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार इसके लिए अलग से केबिन नहीं बनाया गया है। इसे बनाने में भी काफी देरी की जा रही है। पहले मशीन लगाने के लिए जांच टीम ने दौरा किया था। उसने कुछ हिदायतें जारी की थी पर वे पूरी नहीं की जा सकीं।
इन हालात में मशीन का संचालन न होने के कारण मरीजों को इधर-उधर जाकर प्लेटलेट्स लाने को मजबूर होना पड़ता हैं। ज्यादातर मरीज करनाल जाते हैं। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि यदि अस्पताल में इस मशीन का संचालन शुरू हो तो दिक्कतें दूर हो सकती हैं। मरीज रामकुमार ने बताया कि अक्तूबर-नवंबर में डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होता है। ऐसे में लोगों को प्लेटलेट्स लेने के लिए जगह-जगह भटकना पड़ता है। ऐसा लापरवाही के कारण है। यदि मशीन चालू हो जाए तो दिक्कतें खत्म हो सकती हैं।
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दूसरी ओर इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि प्लेटलेट्स की मशीन हमारे पास उपलब्ध है। पहले इसे चलाने के डॉक्टर नहीं था। अब डॉक्टर आने के बाद इसके संचालन के लिए टीम का निरीक्षण करवाया था। जांच टीम ने कुछ खामियां निकाली थीं। इसे दूर करवा दिया है। जल्द ही मशीन को शुरू करवाया जाएगा।
इसकी उपयोगिता
प्लेटलेट्स एफेरेसिस मशीन एडवांस तकनीक पर काम करती है। इसकी सहायता से ब्लड में से प्लेटलेट्स को अलग करने में मदद मिलती है। इसमें डोनर का ब्लड निकालने के दौरान उसमें से प्लेटलेट्स को अलग कर लिया जाता है। इस बीच मशीन रक्त को वापस बॉडी में भेज देती है। प्लेटलेट्स एफेरेसिस सिंगल डोनर प्लेटलेट्स लेने से मरीज का प्लेटलेट्स रैंडम डोनर प्लेटलेट्स से बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। रैंडम डोनर प्लेटलेट्स से तीन से पांच हजार प्लेटलेट्स बढ़ता है, जबकि सिंगल डोनर प्लेटलेट्स से 30 हजार से 1.5 लाख तक प्लेटलेट्स बढ़ जाता है। प्लेटलेट्स की जरूरत किडनी, कैंसर, डेंगू व वायरल जैसी बीमारियों में सबसे ज्यादा पड़ती है।
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गौरतलब है कि अस्पताल में प्लेटलेट्स निकालने की मशीन बेकार पड़ी थी। वजह पूछने पर कहा जाता था कि इसे चलाने के लिए डॉक्टर नहीं मिल पा रहा। अब जब डॉक्टर ने नियुक्ति हो गई तो भी यह मरीजों के काम नहीं आ रही। दरअसल, इस मशीन के संचालन के लिए अलग से लाइसेंस की जरूरत होती है लेकिन यह उपलब्ध नहीं है। मशीन के संचालन की शर्तें भी अस्पताल प्रबंधन पूरी नहीं कर पा रहा। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार इसके लिए अलग से केबिन नहीं बनाया गया है। इसे बनाने में भी काफी देरी की जा रही है। पहले मशीन लगाने के लिए जांच टीम ने दौरा किया था। उसने कुछ हिदायतें जारी की थी पर वे पूरी नहीं की जा सकीं।
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इन हालात में मशीन का संचालन न होने के कारण मरीजों को इधर-उधर जाकर प्लेटलेट्स लाने को मजबूर होना पड़ता हैं। ज्यादातर मरीज करनाल जाते हैं। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि यदि अस्पताल में इस मशीन का संचालन शुरू हो तो दिक्कतें दूर हो सकती हैं। मरीज रामकुमार ने बताया कि अक्तूबर-नवंबर में डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होता है। ऐसे में लोगों को प्लेटलेट्स लेने के लिए जगह-जगह भटकना पड़ता है। ऐसा लापरवाही के कारण है। यदि मशीन चालू हो जाए तो दिक्कतें खत्म हो सकती हैं।
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दूसरी ओर इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि प्लेटलेट्स की मशीन हमारे पास उपलब्ध है। पहले इसे चलाने के डॉक्टर नहीं था। अब डॉक्टर आने के बाद इसके संचालन के लिए टीम का निरीक्षण करवाया था। जांच टीम ने कुछ खामियां निकाली थीं। इसे दूर करवा दिया है। जल्द ही मशीन को शुरू करवाया जाएगा।
इसकी उपयोगिता
प्लेटलेट्स एफेरेसिस मशीन एडवांस तकनीक पर काम करती है। इसकी सहायता से ब्लड में से प्लेटलेट्स को अलग करने में मदद मिलती है। इसमें डोनर का ब्लड निकालने के दौरान उसमें से प्लेटलेट्स को अलग कर लिया जाता है। इस बीच मशीन रक्त को वापस बॉडी में भेज देती है। प्लेटलेट्स एफेरेसिस सिंगल डोनर प्लेटलेट्स लेने से मरीज का प्लेटलेट्स रैंडम डोनर प्लेटलेट्स से बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। रैंडम डोनर प्लेटलेट्स से तीन से पांच हजार प्लेटलेट्स बढ़ता है, जबकि सिंगल डोनर प्लेटलेट्स से 30 हजार से 1.5 लाख तक प्लेटलेट्स बढ़ जाता है। प्लेटलेट्स की जरूरत किडनी, कैंसर, डेंगू व वायरल जैसी बीमारियों में सबसे ज्यादा पड़ती है।