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अवशेषों में आग न लगाएं : एसडीएम

Fri, 10 Oct 2025 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 10 Oct 2025 01:22 AM IST
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Do not set fire to the remains: SDM
संवाद न्यूज एजेंसी
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गुहला-चीका। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पराली प्रबंधन के लिए गांव-गांव गोष्ठियां और शिविर आयोजित किए हैं, जिनमें किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि वे फसल अवशेष जलाने के बजाय उसका सही प्रबंधन करके अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

वीरवार को एसडीएम कैप्टन प्रमेश सिंह ने कहा कि पराली जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और अन्य हानिकारक गैसें निकलती हैं, जिससे सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, दमा और हृदय रोग बढ़ सकते हैं। इसके अलावा धुएं से दृश्यता कम होती है और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ जाती है। मिट्टी में जीवाणु नष्ट होने से उर्वरा शक्ति भी घटती है।
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एसडीएम ने कहा कि कई किसान पहले ही पराली प्रबंधन करके मिसाल कायम कर चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में जिले के गांव फर्शमाजरा के किसान वीरेंद्र यादव से इस विषय पर चर्चा भी की थी।
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सरकार पराली प्रबंधन के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देती है। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन सख्त है। यदि कोई किसान अवशेषों में आग लगाता पाया जाता है, तो उन पर 5 हजार से 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा या उनकी जानकारी मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर दर्ज की जाएगी।

गुहला एसडीओ कंचन शर्मा ने बताया कि विभाग द्वारा कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कोई भी व्यक्ति 01743-220135 या 70827-19791 पर कॉल करके सूचना दे सकता है।

दूसरी ओर एसडीएम कैप्टन प्रमेश सिंह ने किसानों को सलाह दी कि धान बेचने से पहले यह सुनिश्चित करें कि धान पूरी तरह सूखा हो। ऐसा होने पर उन्हें धान बेचने में परेशानी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि धान की कटाई के बाद अवशेषों का उचित प्रबंधन करें। इनका इस्तेमाल पशुओं के चारे के रूप में किया जा सकता है या मिट्टी में मिलाकर उर्वरा शक्ति बढ़ाई जा सकती है।

रेड, येलो और ग्रीन जोन योजना
एसडीएम ने बताया कि गुहला क्षेत्र में रैड, यैलो और ग्रीन जोन बनाए गए हैं। ये जोन पिछले वर्ष खेतों में लगी आग की घटनाओं के आधार पर बनाए गए हैं।

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रेड जोन में एक गांव ः अरनौली
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येलो जोन में 24 गांव ः बलबेहड़ा, सिंह, कलर माजरा, भागल, भूसला, सुल्तानिया, भूना, थेहभुटाना, सहजादपुर, बदसूई, चीका, खंबेड़ा, दाबा, भाटिया, गुहला, पापसर, सैर, खरकां, चक्कू लदाना, मस्तगढ़, माजरी, अंगोध, फिरोजपुर, ककराला इनायत

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ग्रीन जोन: बाकी सभी गांव

प्रत्येक जोन में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं:
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रेड और येलो जोन: 50-50 किसानों पर एक अधिकारी

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ग्रीन जोन: 100-100 किसानों पर एक अधिकारी

सभी नोडल अधिकारियों को सीआरएम एप का प्रशिक्षण दिया गया है। इस एप के माध्यम से किसानों की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
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