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निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य ना करें : डीसी
Sat, 05 Apr 2025 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 05 Apr 2025 01:11 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हर साल की तरह इस बार भी प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी अपने चरम पर है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन उन्हें न केवल बढ़ती फीस के बोझ तले दबा रहा है, बल्कि महंगी किताबों के सेट खरीदने के लिए भी मजबूर कर रहा है। इस संदर्भ में उपायुक्त का कहना है कि निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए स्कूल अभिभावकों को बाध्य ना करें।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की ओर से तय दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते अभिभावकों को पांच हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इस स्थिति से तंग आकर अभिभावक व्यवस्था को कोसते नजर आ रहे हैं।
स्कूल और पुस्तक विक्रेताओं की मिलीभगत का असर ः मामला तब और गंभीर हो गया जब किताबें खरीदने पहुंचे अभिभावकों ने मीडिया के सामने अपनी आप-बीती सुनाई। उन्होंने बताया कि निजी स्कूल और पुस्तक विक्रेता मिलकर एक ऐसा जाल बुन रहे हैं जिसमें अभिभावकों की मेहनत की कमाई लूट रही है। कई अभिभावकों ने स्कूलों के नाम गिनाते हुए बुक सेलरों के साथ उनकी सेटिंग का खुलासा किया। मीडिया ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और इस गठजोड़ की पोल खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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अभिभावक कोमल ने बताया कि सिर्फ किताबों की कीमत का विषय नहीं है, बल्कि हर साल फीस में होने वाली बेतहाशा वृद्धि भी उनकी कमर तोड़ रही है। एक ने कहा हमारी मेहनत की कमाई स्कूल और पुस्तक विक्रेता की जेब में जा रही है। कविता ने बताया कि सरकार मूकदर्शक दिख रही है।
रमेश ने कहा कि स्कूल जिस पुस्तक विक्रेता का का नाम बताता है। पूरे शहर में सिर्फ उसी पर ही बुक सेट मिलता है और कहीं नहीं। हमें परेशानी हो रही है।
इस संदर्भ में डीसी ने प्रीति ने कहा कि निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं वे अपने स्कूलों में एनसीआरईटी की किताबें ही लगवाएं। डीसी ने चेतावनी देती हुए कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। कहा कि कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें ही मान्य होंगी। वहीं, अभिभावकों की मांग है कि सरकार इस मनमानी पर लगाम लगाए व किताबों की कीमत को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए।
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कैथल। हर साल की तरह इस बार भी प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी अपने चरम पर है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन उन्हें न केवल बढ़ती फीस के बोझ तले दबा रहा है, बल्कि महंगी किताबों के सेट खरीदने के लिए भी मजबूर कर रहा है। इस संदर्भ में उपायुक्त का कहना है कि निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए स्कूल अभिभावकों को बाध्य ना करें।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की ओर से तय दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते अभिभावकों को पांच हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इस स्थिति से तंग आकर अभिभावक व्यवस्था को कोसते नजर आ रहे हैं।
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स्कूल और पुस्तक विक्रेताओं की मिलीभगत का असर ः मामला तब और गंभीर हो गया जब किताबें खरीदने पहुंचे अभिभावकों ने मीडिया के सामने अपनी आप-बीती सुनाई। उन्होंने बताया कि निजी स्कूल और पुस्तक विक्रेता मिलकर एक ऐसा जाल बुन रहे हैं जिसमें अभिभावकों की मेहनत की कमाई लूट रही है। कई अभिभावकों ने स्कूलों के नाम गिनाते हुए बुक सेलरों के साथ उनकी सेटिंग का खुलासा किया। मीडिया ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और इस गठजोड़ की पोल खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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अभिभावक कोमल ने बताया कि सिर्फ किताबों की कीमत का विषय नहीं है, बल्कि हर साल फीस में होने वाली बेतहाशा वृद्धि भी उनकी कमर तोड़ रही है। एक ने कहा हमारी मेहनत की कमाई स्कूल और पुस्तक विक्रेता की जेब में जा रही है। कविता ने बताया कि सरकार मूकदर्शक दिख रही है।
रमेश ने कहा कि स्कूल जिस पुस्तक विक्रेता का का नाम बताता है। पूरे शहर में सिर्फ उसी पर ही बुक सेट मिलता है और कहीं नहीं। हमें परेशानी हो रही है।
इस संदर्भ में डीसी ने प्रीति ने कहा कि निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं वे अपने स्कूलों में एनसीआरईटी की किताबें ही लगवाएं। डीसी ने चेतावनी देती हुए कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। कहा कि कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें ही मान्य होंगी। वहीं, अभिभावकों की मांग है कि सरकार इस मनमानी पर लगाम लगाए व किताबों की कीमत को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए।