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दो विभागों के बीच अखाड़ा बना आईटीआई बिल्डिंग

Tue, 14 Jun 2016 12:11 AM IST
beauro kaithal
beauro kaithal Updated Tue, 14 Jun 2016 12:11 AM IST
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बीरबांगड़ा आईटीआई बिल्डिंग इन दिनों दो विभागों के बीच अखाड़ा बना हुआ है। एक तरफ इंडस्ट्रियल विभाग इस नवनिर्मित भवन में अनेकों खामियां निकाली है वहीं पीडब्ल्यूडी को भवन में कोई कमी नजर नहीं आ रही है। जबकि इन दोनों विभागों की इस लड़ाई में राजौंद क्षेत्र के 400 बच्चे पिस रहे हैं, जो हर रोज कक्षाएं लगाने के लिए करीब 28 किलोमीटर दूर कैथल आईटीआई में आते-जाते हैं।
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बता दें कि कागजों में तो सीएम ने गत 9 मई को बीरबांगड़ा आईटीआई बिल्डिंग का उद्घाटन कर दिया है। लेकिन असलियत में दो विभागों के बीच यह मामला विवाद का कारण बना हुआ है। 6 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार हुए भवन को टेक ओवर करने से पूर्व इंडस्ट्रियल विभाग ने भवन में अनेकों खामियां निकाली हैं, जिन्हें दूर करने के लिए लोक निर्माण विभाग को लिखा है। वहीं पीडब्ल्यूडी को इस भवन में कोई कमी नजर नहीं आती। अलबत्ता पीडब्ल्यूडी द्वारा इंडस्ट्रियल विभाग को स्पष्ट लिखा जा चुका है कि भवन को टेक ओवर कर लिया जाए, अन्यथा किसी अन्य जरूरतमंद विभाग को भवन दिया जा सकता है।
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गांव बीरबांगड़ा में बनी है राजौंद की आईटीआई :
इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग विभाग द्वारा गांव बीरबांगड़ा की जमीन में आईटीआई भवन का निर्माण करवाया गया है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने करीब 6 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है। निर्माण कार्य करीब साल भर पहले पूरा हो चुका है। लेकिन इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग विभाग के अधिकारियों को इस भवन के निर्माण में अनेकों खामियां नजर आ रही हैं। जिस कारण इसे टेक ओवर नहीं किया जा रहा है।
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खामियों के बावजूद मुख्यमंत्री से करवा दिया गया बिल्डिंग का उद्घाटन :
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर गत 9 मई को गांव क्योड़क में आए थे। उसी समय उन्होंने क्योड़क से इस भवन का उद्घाटन कर दिया था। इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग विभाग के बीच की खींचतान दूर नहीं हुई है।


किसी और विभाग को दी जा सकती है बिल्डिंग :
21 मार्च 2016 को लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता की ओर से लिखे गए पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि इस भवन के निर्माण को लेकर जो सवाल उठाए गए हैं, उनका कोई मतलब नहीं बनता है। इसे टेक ओवर करने में जानबूझ कर देरी की जा रही है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि भवन पूरी तरह से तैयार है। लेकिन इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग विभाग ने इसकी सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं किया। इसमें कहा गया है कि विभाग से प्रार्थना की जाती है कि भवन को तुरंत प्रभाव से टेक ओवर कर लिया जाए। अन्यथा इस मामले को सरकार के समक्ष रखा जाएगा कि आपको बिल्डिंग की आवश्यकता नहीं है। इसलिए बिल्डिंग को जरूरतमंद किसी अन्य विभाग को सौंपा जा सकता है।

गिनवाई जा रही हैं खामियां :
मुख्यमंत्री द्वारा इस भवन के उद्घाटन से महज 4 दिन पूर्व 5 मई 2016 को इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग विभाग द्वारा पत्र लिखकर इस भवन की खामियां गिनवाई गईं। जिसमें मुख्य निमभनलिखित है :
1. मेन गेट के पास वाटर टैंक के स्लैब व पाइप के जोड़ में स्लैब टूटी हुई है
2. ट्यूबवेल कनेक्शन के कमरे की ओर जाने वाली सड़क नीची है।
3. मेन वर्कशॉप व प्रशासनिक भवन के प्रवेश द्वार फ्रेम के साइज अनुसार नहीं है। भवन के दरवाजों में कुुंडी नहीं लगती व जाली व फ्रेम निमभन स्तर के हैं, मुड़े हुए हैं।
4. सीढ़ियों की मोंटी की छत का एक किनारा बिना प्लस्तर के है।
5. वर्कशॉप की सीढ़ियों के पत्थर उखड़े हुए हैं। फर्श में दरारें हैं। स्कोटिंग स्टोन न लगाकर रफ सीमेंट से वर्कशॉप बनाई गई है।
6. वर्कशॉप के भवन को ध्वनि शोषक नहीं बनाया गया है। जिस कारण आवाज गूंजती है।
7. दरवाजे व खिड़कियों के स्लाइडिंग बोल्ट आसानी से बंद व खुलते नहीं हैं।
8. प्रथम तल की रेंप की लेवलिंग सही नहीं है।

यदि खामियां थीं तो कैसे हो गया उद्घाटन :
उधर, विभागीय खींचतान में यह भी सवाल उठता है कि जब भवन में खामियां निकाली जा रही हैं तो मुख्यमंत्री से इसका उद्घाटन कैसे करवा दिया गया। इस पूरे मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकती है कि इसमें वास्तव में खामियां हैं या नहीं। यदि नहीं तो इसमें कक्षाएं लगाने में देरी क्यों की जा रही है?

40 डिग्री सेल्सियस तापमान में 28 किलोमीटर दूर आते-जाते हैं विद्यार्थी :
गर्मी के इस मौसम में विद्यार्थियों को भवन बन जाने के बावजूद कैथल आईटीआई में आकर कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। विभिन्न ट्रेडों के करीब 400 विद्यार्थी हर रोज कैथल आते हैं और 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान में विभिन्न वाहनों में लटकते हुए वापस जाते हैं। जो उनके लिए बड़ी समस्या है। इन बच्चों की समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं हैं।

भवन निर्माण के बाद भी एक निर्धारित अवधि तक ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है कि वह कमियों को दूर करवाए। जो कमियां हैं, उन्हें दूर कर दिया जाएगा। विभाग इस भवन को टेक ओवर कर ले। ज्यादा कमी नहीं हैं। भवन के खाली रहने के कारण कुछ कमियां आ गई होंगी, उन्हें दूर कर दिया जाएगा। इस तरह के भवन दूसरे विभाग को नहीं दिए जा सकते।

बीएस दहिया, एससी, पीडब्ल्यूडी, कैथल।

भवन में जो खामियां थीं, उस बारे में करीब साल भर से पीडब्ल्यूडी को सूचित किया जा रहा है। अब राजौंद आईटीआई के लिए दूसरे प्रिंसिपल आ चुके हैं। इसलिए वे बता सकते हैं कि इस समय भवन को लेकर क्या चल रहा है।
भूपेंद्र सिंह, प्रिंसिपल, आईटीआई कैथल।
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