फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   district hospital, blood bank, purched, not stand, three month, kaithal

जांच में हुई खून बेचने की पुष्टि, नहीं हुई कार्रवाई

Sat, 27 May 2017 11:58 PM IST
ब्यूरो कैथ्ाल
ब्यूरो कैथ्ाल Updated Sat, 27 May 2017 11:58 PM IST
विज्ञापन
district hospital, blood bank, purched, not stand, three month,  kaithal
जिला अस्पताल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
लोगों द्वारा किसी की जान बचाने के लिए दान में दिए गए खून को अवैध तरीके से बेचे जाने की जांच में भी पुष्टि हो गई है। लेकिन पिछले करीब तीन माह से चल रही जांच में अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई न होने के कारण विभाग मुख्यालय की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। वहीं जानकारों का मानना है कि मामले को दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिस तरीके से कैथल में ब्लड बैंक में फर्जीवाड़ा किया गया है। यदि प्रदेश के सभी ब्लड बैंकों में जांच की जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
विज्ञापन


फर्जी तरीके से निकाला जाता था ब्लड बैंक से खून
जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मुस्तैदी के चलते पकड़ में आए मामले के अनुसार फर्जी तरीके से ब्लड बैंक से रक्त निकाल कर उसे बाहर बेचा जाता था। इसका खुलासा होने के बाद जांच में 6 महीनों में ही 750 से ज्यादा ब्लड यूनिट्स का गोलमाल पाया गया है।
विज्ञापन


छह माह में लगभग 7 लाख से अधिक का खून बेचे जाने की संभावनाएं
सीएमओ द्वारा नियुक्त कमेटी की जांच में पता चला कि पिछले छह माह में 186 ब्लड यूनिट जिला अस्पताल में दाखिल मरीजों के नाम से फर्जी जारी की गई। जबकि उन मरीजों को खून चढ़ा ही नहीं। इसे कहां बेचा गया। यह अगली जांच में पता चल सकेगा। इसके अलावा 186 ब्लड यूनिट ऐसी पाई गईं, जो फर्जी तरीके से ब्लड बैंक से निकाल कर प्राइवेट अस्पतालों में दाखिल मरीजों को चढ़ाया गया। लेकिन इसे जिला अस्पताल से ले जाने में नियमों का पालन नहीं किया गया। इस मामले में कई बड़े अस्पतालों के कर्मचारी भी संलिप्त हो सकते हैं। जांच में पता चला कि 386 ब्लड यूनिट ऐसी हैं, जो जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में तो पहुंच गईं। वहां से वे कहां भेजी गई। यह रक्त किसे चढ़ाया गया। इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। जाहिर है कि यह सारा ब्लड कहीं ना कहीं अवैध तरीके से लोगों को बेचा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इमरजेंसी में 2 हजार से 3 हजार रुपये वसूले जाते हैं
जानकारों के अनुसार सामान्य तौर पर रक्त की एक यूनिट के लिए 1000 से 1200 रुपये तक लिए जाते हैं। लेकिन आपात स्थिति का फायदा उठाकर कुछ निजी लोग रक्त के लिए 2 से 3 हजार रुपये तक भी लेते हैं। ऐसे में यह 750 रुपये से अधिक का रक्त कहां और कैसे बेचा गया। यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा।

विभागीय खामोशी पर हैरानी
जिलास्तर पर जांच के बाद रिपोर्ट के बावजूद आला स्तर पर कार्रवाई न होना भी हैरानी भरा है। आखिर जांच के बाद मामला ठंडे बस्ते में क्यों जा रहा है? यह बात किसी के गले नहीं उतर रही। स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारियों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी गड़बड़ी पर भी पर्दा डल सकता है तो यहां कुछ भी हो सकता है।


रक्त यूनिट्स की जांच के लिए गठित टीम को 6 माह में 386 यूनिट्स ऐसी मिली हैं, जो ब्लड बैंक तो पहुंची थी, वहां से कहां गईं? इसका रिकॉर्ड नहीं मिला। 186 यूनिट्स ऐसी हैं, जो जिला अस्पताल में मरीजों को चढ़ाई हुई दिखाई गईं। लेकिन जिला अस्पताल में उन मरीजों को यह खून नहीं चढ़ाया गया। करीब 186 यूनिट्स ही प्राइवेट अस्पतालों में बिना नियमों का पालन किए भेजी गई पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट पर अभी काम चल रहा है। नियमानुसार अगली कार्रवाई होगी।
डा. मनीष बंसल, सीएमओ, कैथल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed