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Kaithal News: जिला नागरिक अस्पताल, दवाइयों का अभाव, कैसे हो इलाज
Tue, 28 Feb 2023 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 28 Feb 2023 02:07 AM IST
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कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में दवाओं की कमी के कारण मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में इस समय खांसी, खाली पेट सिरप, आंखों में डालने की दवा जैसी सामान्य दवाइयां भी नहीं मिल पा रही हैं। जिस कारण उन्हें मजबूरन अस्पताल के बाहर स्थित निजी दुकानों से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। मुख्य रूप से सांस व दमा के मरीजों के लिए दिए जाने वाले इन हेलर भी खत्म हो चुके हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में इस समय कुल 38 डॉक्टर कार्यरत हैं। यहां पर जिले के विभिन्न जगहों से मरीज अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं। एक दिन में 800 से एक हजार ओपीडी होती है। यहीं मरीज इलाज के तहत दवा लेने के लिए पहुंचते हैं। मौसम में हो रहे बदलाव के बीच इस समय ओपीडी की संख्या एक हजार से बढ़कर 1200 से अधिक हो जाती है। इस स्थिति में दवाइयां भी अधिक लगती हैं।
अस्पताल में इन दवाइयों की है कमी
जिला नागरिक अस्पताल में दर्द निवारक में डाइक्लोपारा और एंटीबायोटिक में अमोक्सी, अमोक्सीक्लेव, पेट के संक्रमण के लिए सिप्रोफ्लोक्सासिन खत्म हो चुकी है। इसके अलावा गुम चोट के लिए डिक्लो जेल व आंख के लिए आई ड्रॉप सिपरो भी खत्म है। मरीजों का कहना है अस्पताल में दवाइयां नहीं मिली तो पर्ची पर लिखी दवाई बाहर से लेनी पड़ रही है।
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बाहर से लेनी पड़ी दवाई
यहां पर दवाई लेने पहुंचे दमा के मरीज हरि सिंह ने बताया कि उसका इलाज सरकारी अस्पताल से चल रहा है। सोमवार को भी वह दवाई लेने के लिए पहुंचा था। उन्हें एसे इन हेलर की जरूरत थी। यहां यह निशुल्क मिलते हैं। उन्हें यह नहीं मिले। जिस कारण उसे बारह रुपये खर्च करके यह दवा खरीदनी पड़ी।
खांसी की दवाई नहीं मिली, बाहर से लेनी पड़ी
महिला रीना देवी ने बताया कि उसके बेटे रवि को खांसी की दिक्कत थी। इसके लिए वह अस्पताल में दवा लेने के लिए पहुंची थी। उसके बेटे को खांसी की दवा नहीं मिली। यदि सरकार अस्पताल में दवाएं ही नहीं रख सकती तो वाहवाही क्यों लूटी जा रही है।
बिना दवाई का कैसा मुफ्त इलाज
अस्पताल में आए राजेश ने कहा कि उसे पत्थरी के दर्द की दिक्कत है। यहां मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना चलाई जाती है। यहां पत्थरी की दवा ही नहीं मिली। उसे यह बाहर से खरीदनी पड़ेगी।
दवाइयां खरीदने का यह है नियम
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्थानीय स्तर पर दवाएं खरीदने के लिए अलग से पंचकूला में एक प्रकोष्ठ बनाया है। यदि जिला नागरिक अस्पताल में दवाएं खत्म हो जाती हैं तो पंचकूला में बनाए गए इस प्रकोष्ठ से अनुमति मांगी जाती है। अनुमति मिलने के बाद जरूरत की दवाएं सरकारी दाम पर ही निजी एजेंसी से खरीदी जा सकती है। इस समय अस्पताल में दवाएं खत्म होने पर पीएमओं ने इस आधार पर ही अनुमति मांगी है।
अस्पताल में खाली है डॉक्टरों के 18 पद
जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों के 18 पद खाली है। डॉक्टरों के रिक्त पदों में एनेस्थीसिया समेत कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद भी शामिल है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यहां डॉक्टरों के कुल 56 पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष वर्तमान में यहां 38 डॉक्टर तैनात है।
दवाइयों के लिए सरकार ने एक एजेंसी को कार्यभार सौंपा है। उसी एजेंसी के माध्यम से ही दवाएं अस्पताल में पहुंचती हैं। इस समय जिन भी दवाओं की कमी है। उसे मंगवाने के लिए मुख्यालय में पत्र लिखा जाएगा। इस समय जिन दवाओं की जरूरत है, उनके लिए विभाग से खरीदने की अनुमति मांगी है।
डॉ. सचिन मांडले, कार्यकारी जिला प्रधान चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल
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जिला नागरिक अस्पताल में इस समय कुल 38 डॉक्टर कार्यरत हैं। यहां पर जिले के विभिन्न जगहों से मरीज अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं। एक दिन में 800 से एक हजार ओपीडी होती है। यहीं मरीज इलाज के तहत दवा लेने के लिए पहुंचते हैं। मौसम में हो रहे बदलाव के बीच इस समय ओपीडी की संख्या एक हजार से बढ़कर 1200 से अधिक हो जाती है। इस स्थिति में दवाइयां भी अधिक लगती हैं।
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अस्पताल में इन दवाइयों की है कमी
जिला नागरिक अस्पताल में दर्द निवारक में डाइक्लोपारा और एंटीबायोटिक में अमोक्सी, अमोक्सीक्लेव, पेट के संक्रमण के लिए सिप्रोफ्लोक्सासिन खत्म हो चुकी है। इसके अलावा गुम चोट के लिए डिक्लो जेल व आंख के लिए आई ड्रॉप सिपरो भी खत्म है। मरीजों का कहना है अस्पताल में दवाइयां नहीं मिली तो पर्ची पर लिखी दवाई बाहर से लेनी पड़ रही है।
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बाहर से लेनी पड़ी दवाई
यहां पर दवाई लेने पहुंचे दमा के मरीज हरि सिंह ने बताया कि उसका इलाज सरकारी अस्पताल से चल रहा है। सोमवार को भी वह दवाई लेने के लिए पहुंचा था। उन्हें एसे इन हेलर की जरूरत थी। यहां यह निशुल्क मिलते हैं। उन्हें यह नहीं मिले। जिस कारण उसे बारह रुपये खर्च करके यह दवा खरीदनी पड़ी।
खांसी की दवाई नहीं मिली, बाहर से लेनी पड़ी
महिला रीना देवी ने बताया कि उसके बेटे रवि को खांसी की दिक्कत थी। इसके लिए वह अस्पताल में दवा लेने के लिए पहुंची थी। उसके बेटे को खांसी की दवा नहीं मिली। यदि सरकार अस्पताल में दवाएं ही नहीं रख सकती तो वाहवाही क्यों लूटी जा रही है।
बिना दवाई का कैसा मुफ्त इलाज
अस्पताल में आए राजेश ने कहा कि उसे पत्थरी के दर्द की दिक्कत है। यहां मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना चलाई जाती है। यहां पत्थरी की दवा ही नहीं मिली। उसे यह बाहर से खरीदनी पड़ेगी।
दवाइयां खरीदने का यह है नियम
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्थानीय स्तर पर दवाएं खरीदने के लिए अलग से पंचकूला में एक प्रकोष्ठ बनाया है। यदि जिला नागरिक अस्पताल में दवाएं खत्म हो जाती हैं तो पंचकूला में बनाए गए इस प्रकोष्ठ से अनुमति मांगी जाती है। अनुमति मिलने के बाद जरूरत की दवाएं सरकारी दाम पर ही निजी एजेंसी से खरीदी जा सकती है। इस समय अस्पताल में दवाएं खत्म होने पर पीएमओं ने इस आधार पर ही अनुमति मांगी है।
अस्पताल में खाली है डॉक्टरों के 18 पद
जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों के 18 पद खाली है। डॉक्टरों के रिक्त पदों में एनेस्थीसिया समेत कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद भी शामिल है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यहां डॉक्टरों के कुल 56 पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष वर्तमान में यहां 38 डॉक्टर तैनात है।
दवाइयों के लिए सरकार ने एक एजेंसी को कार्यभार सौंपा है। उसी एजेंसी के माध्यम से ही दवाएं अस्पताल में पहुंचती हैं। इस समय जिन भी दवाओं की कमी है। उसे मंगवाने के लिए मुख्यालय में पत्र लिखा जाएगा। इस समय जिन दवाओं की जरूरत है, उनके लिए विभाग से खरीदने की अनुमति मांगी है।
डॉ. सचिन मांडले, कार्यकारी जिला प्रधान चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल