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Kaithal News: दमघोंटू प्रदूषण से जीना दुश्वार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Nov 2023 01:03 AM IST
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Difficult to live with suffocating pollution
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। इन दिनों जिले में दमघोंटू प्रदूषण से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो रहा है। बढ़ते प्रदूषण से लोगों को गले में खराश, आखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्मॉग के हालात देखते हुए राहत की उम्मीद भी नहीं दिख रही है।

सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 369 दर्ज किया गया। सोमवार को फसल अवशेष जलाने के दो मामले भी सामने आए हैं। दूसरी ओर वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए डीसी ने पटाखे की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं।
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आंकड़ों के अनुसार, अब तक फसल अवशेष जलाने के कुल 350 मामले हो चुके हैं। इससे चिंतित कृषि विभाग के अधिकारी किसानों से फिर से अपील की हैं कि वे पराली न जलाएं, क्योंकि यह प्रदूषण उनके स्वयं के स्वास्थ्य, उनके बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव डाल रहा है। यह धुआं पराली अब मानवता के लिए खतरा बन गई है और किसानों को पराली जलाकर इस मानवता विरोधी कार्य का भागीदार नहीं बनना चाहिए। उधर, पेड़ों पर पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है।
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सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने कहा कि जिले में अब तक हर्ष एप और नॉन हर्षक एप के माध्यम से 350 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें किसानों से पांच लाख 25 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है व 55 किसानों पर केस दर्ज किया है।

उधर, अब जिला नागरिक अस्पताल में एक्सरे करवाने वाले मरीज भी बढ़ गए हैं। अब खांसी व बुखार के मरीजों का एक्सरे करवाया जा रहा है। हवा प्रदूषित होने के बाद बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। एलर्जी, आंखों में जलन और सांस से संबंधित बीमारियों के मरीजों की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। इस महीने अब तक सभी बीमारियों की ओपीडी दो हजार से अधिक हो चुकी है। इसमें से 40 प्रतिशत ओपीडी सांस, आंखों में जलन और एलर्जी की है।

जिला नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन मांडले ने बताया कि खांसी और जुकाम के मरीजों की जांच को लेकर डॉक्टरों को विशेष हिदायतें जारी की गई है। इसके तहत डॉक्टर इन मरीजों का इलाज कर रहे हैं।


रविवार को 470 और शनिवार को 405 एक्यूआई दर्ज किया जा चुका है। सोमवार को थोड़ी राहत रही। दरअसल, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

(सीपीसीबी) के मुताबिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को 0-50 के बीच ''बेहतर'', 51-100 के बीच ''संतोषजनक'', 101 से 200 के बीच ''सामान्य'', 201 से 300 के बीच ''खराब'', 301 से 400 के बीच ''बहुत खराब'' माना जाता है। इससे ज्यादा एक्यूआई होना ज्यादा गंभीर माना जाता है।
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