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Kaithal News: ध्रुव, प्रह्लाद के चरित्र सुनाकर किया भाव-विभोर
Thu, 27 Mar 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 27 Mar 2025 01:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। डेरा बाबा नागा योग आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य भागवत भास्कर गिरधारी भैय्या ने श्रद्धालुओं को ध्रुव, प्रह्लाद और राजा बलि के प्रेरणादायक चरित्रों का वर्णन प्रस्तुत किया। उनके प्रवचनों से उपस्थित भक्तगण भाव-विभोर हो उठे।
आचार्य गिरधारी भैय्या ने ध्रुव चरित्र का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार पांच वर्ष के बालक ध्रुव ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और एकाग्र मन से कठिन तपस्या कर भगवान के दर्शन प्राप्त किए।
उन्होंने कहा यदि मनुष्य में अटूट संकल्प और ध्यान की शक्ति हो, तो वह ध्रुव की भांति अल्पायु में ही परमात्मा का साक्षात्कार कर सकता है।
प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए आचार्य ने बताया कि प्रह्लाद की अटूट भक्ति और विश्वास ने भगवान को नरसिंह अवतार लेने पर विवश कर दिया। उन्होंने कहा प्रह्लाद की निष्कपट भक्ति देखकर भगवान स्वयं प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का वध कर धर्म की स्थापना की। इससे यह सिद्ध होता है कि सच्ची भक्ति में वह शक्ति है जो असंभव को भी संभव बना सकती है।
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राजा बलि की कथा का उल्लेख करते हुए आचार्य ने उनके दानशीलता और समर्पण की भावना पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राजा बलि ने वामन रूप में आए भगवान को तीन पग भूमि दान में देकर अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया। आचार्य जी ने कहा राजा बलि का यह चरित्र हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और त्याग से ही भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्त को अपने सान्निध्य का वरदान देते हैं।
कथा के मुख्य यजमान दर्शन कुमार और कमलेश रहे। इस अवसर पर पूर्व वाइस चेयरमैन संगीत बंसल, डॉ. बृजमोहन सिंगला, कृष्ण कुमार गर्ग , रमेश शास्त्री, संतोष आदि उपस्थित रहे।
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सीवन। डेरा बाबा नागा योग आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य भागवत भास्कर गिरधारी भैय्या ने श्रद्धालुओं को ध्रुव, प्रह्लाद और राजा बलि के प्रेरणादायक चरित्रों का वर्णन प्रस्तुत किया। उनके प्रवचनों से उपस्थित भक्तगण भाव-विभोर हो उठे।
आचार्य गिरधारी भैय्या ने ध्रुव चरित्र का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार पांच वर्ष के बालक ध्रुव ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और एकाग्र मन से कठिन तपस्या कर भगवान के दर्शन प्राप्त किए।
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उन्होंने कहा यदि मनुष्य में अटूट संकल्प और ध्यान की शक्ति हो, तो वह ध्रुव की भांति अल्पायु में ही परमात्मा का साक्षात्कार कर सकता है।
प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए आचार्य ने बताया कि प्रह्लाद की अटूट भक्ति और विश्वास ने भगवान को नरसिंह अवतार लेने पर विवश कर दिया। उन्होंने कहा प्रह्लाद की निष्कपट भक्ति देखकर भगवान स्वयं प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का वध कर धर्म की स्थापना की। इससे यह सिद्ध होता है कि सच्ची भक्ति में वह शक्ति है जो असंभव को भी संभव बना सकती है।
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राजा बलि की कथा का उल्लेख करते हुए आचार्य ने उनके दानशीलता और समर्पण की भावना पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राजा बलि ने वामन रूप में आए भगवान को तीन पग भूमि दान में देकर अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया। आचार्य जी ने कहा राजा बलि का यह चरित्र हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और त्याग से ही भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्त को अपने सान्निध्य का वरदान देते हैं।
कथा के मुख्य यजमान दर्शन कुमार और कमलेश रहे। इस अवसर पर पूर्व वाइस चेयरमैन संगीत बंसल, डॉ. बृजमोहन सिंगला, कृष्ण कुमार गर्ग , रमेश शास्त्री, संतोष आदि उपस्थित रहे।