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Kaithal News: नशेड़ियों का अड्डा बनी ढांड की विस्तार अनाज मंडी
Mon, 14 Jul 2025 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 14 Jul 2025 11:56 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। विस्तार अनाज मंडी, ढांड इन दिनों नशेड़ियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बनती जा रही है। मंडी में दुकानों के पीछे झाड़ियों की तरह उगे भांग के बड़े-बड़े पौधे अब नशे की मुफ्त खुराक का स्रोत बन चुके हैं। इससे जहां मंडी की छवि धूमिल हो रही है, वहीं युवाओं का भविष्य भी अंधकार में डूबता नजर आ रहा है।
आढ़तियों ने बताया कि दुकानों के पीछे की सड़क ने जंगल जैसा रूप ले लिया है, जहां बारिश के मौसम में भांग जैसे पौधे स्वतः ही पनप जाते हैं। ये पौधे अब नशे के आदी युवकों के लिए यह फ्री का सामान बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि मार्केट कमेटी के कर्मचारियों को इस समस्या की ओर कई बार ध्यान दिलाया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप नशेड़ी इन पौधों के आसपास मंडराते रहते हैं और वहीं से अपनी खुराक तैयार करते हैं।
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एक नशे के आदी युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बारिश के मौसम में भांग की पत्तियों से अधिक मात्रा में नशीला पदार्थ निकलता है। बाजार में यह सामग्री 2200 प्रति तोला तक बिकती है, लेकिन मंडी में यह मुफ्त में उपलब्ध है। वह पत्तों को हाथ से मसलकर जो चिपचिपा मैल निकलता है, उसे स्क्रैप करके बीड़ी या चिलम में भरकर नशा करता है।
इस संदर्भ में भारतीय किसान संघ के प्रदेश प्रवक्ता रणदीप आर्य ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर राज्य सरकार नशा मुक्ति के लिए अभियान चला रही है और दूसरी ओर सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे नशीले पौधों का उगना नीतियों पर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि आखिर इन पौधों को पनपने कौन दे रहा है? उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन पौधों को जड़ से नष्ट नहीं किया गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
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ढांड। विस्तार अनाज मंडी, ढांड इन दिनों नशेड़ियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बनती जा रही है। मंडी में दुकानों के पीछे झाड़ियों की तरह उगे भांग के बड़े-बड़े पौधे अब नशे की मुफ्त खुराक का स्रोत बन चुके हैं। इससे जहां मंडी की छवि धूमिल हो रही है, वहीं युवाओं का भविष्य भी अंधकार में डूबता नजर आ रहा है।
आढ़तियों ने बताया कि दुकानों के पीछे की सड़क ने जंगल जैसा रूप ले लिया है, जहां बारिश के मौसम में भांग जैसे पौधे स्वतः ही पनप जाते हैं। ये पौधे अब नशे के आदी युवकों के लिए यह फ्री का सामान बन गए हैं।
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उन्होंने कहा कि मार्केट कमेटी के कर्मचारियों को इस समस्या की ओर कई बार ध्यान दिलाया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप नशेड़ी इन पौधों के आसपास मंडराते रहते हैं और वहीं से अपनी खुराक तैयार करते हैं।
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एक नशे के आदी युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बारिश के मौसम में भांग की पत्तियों से अधिक मात्रा में नशीला पदार्थ निकलता है। बाजार में यह सामग्री 2200 प्रति तोला तक बिकती है, लेकिन मंडी में यह मुफ्त में उपलब्ध है। वह पत्तों को हाथ से मसलकर जो चिपचिपा मैल निकलता है, उसे स्क्रैप करके बीड़ी या चिलम में भरकर नशा करता है।
इस संदर्भ में भारतीय किसान संघ के प्रदेश प्रवक्ता रणदीप आर्य ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर राज्य सरकार नशा मुक्ति के लिए अभियान चला रही है और दूसरी ओर सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे नशीले पौधों का उगना नीतियों पर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि आखिर इन पौधों को पनपने कौन दे रहा है? उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन पौधों को जड़ से नष्ट नहीं किया गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।