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आढ़तियों ने किया डीएफएससी को ऑनलाइन खरीद से इंकार
ब्यूरो कैथल
Updated Tue, 20 Sep 2016 12:02 AM IST
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बैठक लेती डीएफएससी मोनिका मलिक
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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धान की खरीद का समय जैसे-जैसे निकट आ रहा है, वैसे-वैसे ऑनलाइन खरीद को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। सोमवार को डीएफएससी मोनिका मलिक ने आढ़तियों को ऑनलाइन खरीद की जानकारी देकर इस योजना को अपनाने के लिए विशेष बैठक का आयोजन किया। लेकिन आढ़तियों ने स्पष्ट इंकार कर दिया। आढ़ती डीएफएससी की आढ़त खत्म करने की चेतावनी पर भी नहीं झुके और 22 सितंबर को कुरुक्षेत्र में होने वाली राज्य स्तरीय बैठक में लिए जाने वाले निर्णय पर अडिग रहने का एलान कर दिया।
सोमवार को खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मोनिका मलिक मार्केट कमेटी कार्यालय में आढ़तियों को ई-नेम का प्रशिक्षण देने के लिये पहुंची। जहां काफी संख्या में पहुंचे आढ़तियों को डीएफएससी ने ऑनलाइन योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैसे ही किसान की फसल आती है तो मंडी के गेट पर कमेटी के कर्मचारी मिलेंगे। बस उनसे फसल का गेट पास कटवा कर इंद्राज करवाना है। कमेटी की लैब में इसकी जांच करके पूरा विवरण ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इसके बाद इसकी खरीद कहीं से भी की जा सकेगी। आढ़तियों को इसके लिये अपने पास कंप्यूटर व प्रिंटर रखने होंगे। भुगतान के लिए आढ़ती या किसान के बताए खाते में ही पैसा दिया भेजा जाएगा।
वहीं एसडीएम की बात सुनने के बाद आढ़तियों ने एक सुर में इस योजना को नकार दिया। साथ ही इसके कारण आने वाली समस्याओं का समाधान भी मांगा। डीएफएससी के बार-बार आढ़तियों को समझाने के बावजूद इस योजना पर काम करने से इंकार कर दिया। यहां तक कि डीएफएससी ने सरकार द्वारा उनकी आढ़त खत्म किए जाने की चेतावनी तक दी। इसके बावजूद आढ़तियों ने कहा कि सरकार चाहे तो सीधा खेतों से धान खरीद ले। पंजाब की तर्ज पर होने वाली बदहाली से सरकार को पता चल जाएगा।
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इस अवसर पर डी एम हैफेड सतपाल, एग्रो से ललित मोहन नरूला, मान सिंह, मंडी प्रधान सुरेश मितल, पूर्व प्रधान अश्वनी शोरेवाला, कृष्ण मितल, कृष्ण शर्मा, पिंका, रामा तितरम, रामनारायण, राधे श्याम, रमेश जैन, कृष्ण चंदाना, जगदीश राय, जतीन शर्मा, शीशपाल पाई, मांगेराम खुरानियां, दिलबाग संधू, विजय कुमार, विपन, सुरजीत श्योराण आदि अनेक आढ़ती उपस्थित थे।
ये उठाए सवाल
1- मात्र 10 से 15 प्रतिशत फसल मंडी में क्षेत्र कम होने की वजह से आता है, बाकी सारी फसल बाहर ही डालनी पड़ती है? योजना के लिए ज्यादा जगह की जरूरत होगी। कैथल मंडी में इतनी जगह नहीं है।
2- मंडी में 24 घंटे कार्य होता है और हर समय गेट पास कटवाना मुश्किल है।
3- गेट पास कटवाने में ही समय बीत जायेगा और ट्रालियों की लंबी कतार लग जाएगी।
4- आढ़तियों को कई-कई कर्मचारी रखने पड़ेंगे, जबकि उनको इन पर आने वाले खर्च जितनी आढ़त भी नहीं मिलेगी।
5- किसानों को सेंपल करवाने में एक-एक दिन लग जाएगा, ऐसे में वे इतने समय तक कैसे उनकी फसल को बिना बेचे रख सकता है।
6- लैब में पास होकर बिकने के बाद उसके उठान व पेमेंट की क्या गारंटी है?
7- मंडी में सरकार द्वारा वाई-फाई की सुविधा भी नहीं दी गई।
8- फसल तुल जाने के बाद यदि कई दिन उठान नहीं हुआ तो फसल खराब होने व घटोत्तरी का कौन जिम्मेवार होगा।
22 सितंबर की बैठक में लिया जाएगा फैसला
आढ़तियों ने कहा कि कुरुक्षेेत्र में होने वाली आढ़ती एसोसिएशन की राज्य स्तरीय बैठक में फैसला लिया जाएगा। यदि आढ़ती कहेंगे तो इसे अपना लेंगे। यदि सभी खिलाफ हुए तो धान की खरीद का बहिष्कार भी हो सकता है।
डीएफएससी महोदया ने आढ़तियों से ऑनलाइन खरीद प्रणाली अपनाने की अपील की है। लेकिन आढ़तियों की अपनी समस्याएं हैं। इसलिए उन्हें अवगत करवा दिया गया है। 22 सितंबर को होने वाली राज्य स्तरीय बैठक में जो भी फैसला होगा, उस पर अमल किया जाएगा।
सुरेश मित्तल, प्रधान, नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन, कैथल।
इस ई-नेम प्रणाली के तहत विभाग कार्य करने को तैयार है, परन्तु आढ़तियों के द्वारा इस को अपनाने से साफ इंकार कर दिया। इसकी रिपोर्ट सरकार के पास भेज दी जाएगी और जैसे आदेश आयेंगे, उनके तहत किसानों की फसल की खरीद की जाएगी।
मोनिका मलिक, डीएफएससी, कैथल।
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सोमवार को खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मोनिका मलिक मार्केट कमेटी कार्यालय में आढ़तियों को ई-नेम का प्रशिक्षण देने के लिये पहुंची। जहां काफी संख्या में पहुंचे आढ़तियों को डीएफएससी ने ऑनलाइन योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैसे ही किसान की फसल आती है तो मंडी के गेट पर कमेटी के कर्मचारी मिलेंगे। बस उनसे फसल का गेट पास कटवा कर इंद्राज करवाना है। कमेटी की लैब में इसकी जांच करके पूरा विवरण ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इसके बाद इसकी खरीद कहीं से भी की जा सकेगी। आढ़तियों को इसके लिये अपने पास कंप्यूटर व प्रिंटर रखने होंगे। भुगतान के लिए आढ़ती या किसान के बताए खाते में ही पैसा दिया भेजा जाएगा।
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वहीं एसडीएम की बात सुनने के बाद आढ़तियों ने एक सुर में इस योजना को नकार दिया। साथ ही इसके कारण आने वाली समस्याओं का समाधान भी मांगा। डीएफएससी के बार-बार आढ़तियों को समझाने के बावजूद इस योजना पर काम करने से इंकार कर दिया। यहां तक कि डीएफएससी ने सरकार द्वारा उनकी आढ़त खत्म किए जाने की चेतावनी तक दी। इसके बावजूद आढ़तियों ने कहा कि सरकार चाहे तो सीधा खेतों से धान खरीद ले। पंजाब की तर्ज पर होने वाली बदहाली से सरकार को पता चल जाएगा।
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इस अवसर पर डी एम हैफेड सतपाल, एग्रो से ललित मोहन नरूला, मान सिंह, मंडी प्रधान सुरेश मितल, पूर्व प्रधान अश्वनी शोरेवाला, कृष्ण मितल, कृष्ण शर्मा, पिंका, रामा तितरम, रामनारायण, राधे श्याम, रमेश जैन, कृष्ण चंदाना, जगदीश राय, जतीन शर्मा, शीशपाल पाई, मांगेराम खुरानियां, दिलबाग संधू, विजय कुमार, विपन, सुरजीत श्योराण आदि अनेक आढ़ती उपस्थित थे।
ये उठाए सवाल
1- मात्र 10 से 15 प्रतिशत फसल मंडी में क्षेत्र कम होने की वजह से आता है, बाकी सारी फसल बाहर ही डालनी पड़ती है? योजना के लिए ज्यादा जगह की जरूरत होगी। कैथल मंडी में इतनी जगह नहीं है।
2- मंडी में 24 घंटे कार्य होता है और हर समय गेट पास कटवाना मुश्किल है।
3- गेट पास कटवाने में ही समय बीत जायेगा और ट्रालियों की लंबी कतार लग जाएगी।
4- आढ़तियों को कई-कई कर्मचारी रखने पड़ेंगे, जबकि उनको इन पर आने वाले खर्च जितनी आढ़त भी नहीं मिलेगी।
5- किसानों को सेंपल करवाने में एक-एक दिन लग जाएगा, ऐसे में वे इतने समय तक कैसे उनकी फसल को बिना बेचे रख सकता है।
6- लैब में पास होकर बिकने के बाद उसके उठान व पेमेंट की क्या गारंटी है?
7- मंडी में सरकार द्वारा वाई-फाई की सुविधा भी नहीं दी गई।
8- फसल तुल जाने के बाद यदि कई दिन उठान नहीं हुआ तो फसल खराब होने व घटोत्तरी का कौन जिम्मेवार होगा।
22 सितंबर की बैठक में लिया जाएगा फैसला
आढ़तियों ने कहा कि कुरुक्षेेत्र में होने वाली आढ़ती एसोसिएशन की राज्य स्तरीय बैठक में फैसला लिया जाएगा। यदि आढ़ती कहेंगे तो इसे अपना लेंगे। यदि सभी खिलाफ हुए तो धान की खरीद का बहिष्कार भी हो सकता है।
डीएफएससी महोदया ने आढ़तियों से ऑनलाइन खरीद प्रणाली अपनाने की अपील की है। लेकिन आढ़तियों की अपनी समस्याएं हैं। इसलिए उन्हें अवगत करवा दिया गया है। 22 सितंबर को होने वाली राज्य स्तरीय बैठक में जो भी फैसला होगा, उस पर अमल किया जाएगा।
सुरेश मित्तल, प्रधान, नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन, कैथल।
इस ई-नेम प्रणाली के तहत विभाग कार्य करने को तैयार है, परन्तु आढ़तियों के द्वारा इस को अपनाने से साफ इंकार कर दिया। इसकी रिपोर्ट सरकार के पास भेज दी जाएगी और जैसे आदेश आयेंगे, उनके तहत किसानों की फसल की खरीद की जाएगी।
मोनिका मलिक, डीएफएससी, कैथल।