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Kaithal News: शिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए उमड़े श्रद्धालु
Wed, 12 Aug 2026 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 12 Aug 2026 01:42 AM IST
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खडालवा शिव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ । संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/कलायत। जिलेभर में मंगलवार को शिवरात्रि पर्व बड़े ही धूमधाम और आस्था के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु उमड़ पड़ेे। प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री मंदिर, प्रताप गेट स्थित काली माता मंदिर, हनुमान वाटिका का शिव मंदिर, सूरजकुंड, शिव शक्ति धाम और ढांड रोड स्थित शिव मंदिरों में भोर से ही हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंजते रहे।
श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया। महिलाओं और पुरुषों ने व्रत रखकर पूरे दिन भगवान शिव की आराधना की। मंदिरों में जगह-जगह भंडारे और प्रसाद वितरण भी किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कलायत के गांव खडालवा स्थित प्राचीन शिव मंदिर में जलाभिषेक के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जो सायंकाल चार बजे तक बनी रही। पुजारी गोपाल शर्मा ने बताया कि जलाभिषेक का पहला मुहूर्त सुबह 4:15 बजे शुरू हुआ। डाक कांवड़ चढ़ने के बाद कांवड़ियों ने गंगाजल से महाकांत का जलाभिषेक किया।
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उन्होंने बताया कि सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए कतारों में लगने शुरू हो गए थे। मान्यता है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग करीब पांच हजार वर्ष पुराना है और पाताल से प्रकट हुआ था। भोले बाबा को यहां पातालेश्वर और खट्वांगेश्वर के नाम से जाना जाता है। महंत रघुनाथ गिरी ने बताया कि श्रावण मास की शिवरात्रि पर हजारों कांवड़िए गोमुख और हरिद्वार से कांवड़ लेकर पहुंचे और भगवान शिव का अभिषेक किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर के सेवादारों के साथ स्थानीय पुलिस भी तैनात रही। कैथल के 11 रुद्री मंदिर और हनुमान वाटिका में भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।
कलायत स्थित श्री कपिल मुनि मंदिर और बाबा रूढ़पुरी मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। पुजारी संजय शास्त्री ने बताया कि अमृतवेला से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर में प्रसाद वितरित किया गया। बाबा रूढ़पुरी मंदिर में गुरुवार रात से धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए थे। महंत ने बताया कि परिसर स्थित प्राचीन शिवालय राजा शालिवाहन द्वारा करीब छह हजार वर्ष पूर्व बनवाया गया था। यहां अलसुबह से ही श्रद्धालु अभिषेक के लिए कतारों में लग गए। ग्यारह रुद्री मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।
शिवरात्रि के अवसर पर नगर में विभिन्न स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई स्थानों पर गन्ने के रस, पंचामृत और गंगाजल से महारुद्राभिषेक कराया गया। पंडित विशाल शांडिल्य ने कहा कि सनातन वैदिक परंपरा में भगवान शिव को देवों के देव महादेव और महाकाल माना गया है।
उधर, हरिद्वार से कांवड़ लाकर कांवडि़यों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। गंगाजल, बेलपत्र, आक, धतूरा, शहद, फल-फूल अर्पित कर पूजन किया और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना की। मंदिरों में भंडारे भी आयोजित किए गए।
रंग-बिरंगी पोशाकों
में पहुंचे कांवड़िये
डाक कांवड़ लेकर आए शिव भक्तों के नगर आगमन पर श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। रंग-बिरंगी पोशाकों में ढोल की थाप पर थिरकते कांवड़िए पूरे शहर को शिवमय बना गए। करीब 250 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पहुंचे कांवड़ियों ने हर-हर महादेव का उद्घोष कर जलाभिषेक किया।
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कैथल/कलायत। जिलेभर में मंगलवार को शिवरात्रि पर्व बड़े ही धूमधाम और आस्था के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु उमड़ पड़ेे। प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री मंदिर, प्रताप गेट स्थित काली माता मंदिर, हनुमान वाटिका का शिव मंदिर, सूरजकुंड, शिव शक्ति धाम और ढांड रोड स्थित शिव मंदिरों में भोर से ही हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंजते रहे।
श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया। महिलाओं और पुरुषों ने व्रत रखकर पूरे दिन भगवान शिव की आराधना की। मंदिरों में जगह-जगह भंडारे और प्रसाद वितरण भी किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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कलायत के गांव खडालवा स्थित प्राचीन शिव मंदिर में जलाभिषेक के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जो सायंकाल चार बजे तक बनी रही। पुजारी गोपाल शर्मा ने बताया कि जलाभिषेक का पहला मुहूर्त सुबह 4:15 बजे शुरू हुआ। डाक कांवड़ चढ़ने के बाद कांवड़ियों ने गंगाजल से महाकांत का जलाभिषेक किया।
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उन्होंने बताया कि सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए कतारों में लगने शुरू हो गए थे। मान्यता है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग करीब पांच हजार वर्ष पुराना है और पाताल से प्रकट हुआ था। भोले बाबा को यहां पातालेश्वर और खट्वांगेश्वर के नाम से जाना जाता है। महंत रघुनाथ गिरी ने बताया कि श्रावण मास की शिवरात्रि पर हजारों कांवड़िए गोमुख और हरिद्वार से कांवड़ लेकर पहुंचे और भगवान शिव का अभिषेक किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर के सेवादारों के साथ स्थानीय पुलिस भी तैनात रही। कैथल के 11 रुद्री मंदिर और हनुमान वाटिका में भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।
कलायत स्थित श्री कपिल मुनि मंदिर और बाबा रूढ़पुरी मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। पुजारी संजय शास्त्री ने बताया कि अमृतवेला से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर में प्रसाद वितरित किया गया। बाबा रूढ़पुरी मंदिर में गुरुवार रात से धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए थे। महंत ने बताया कि परिसर स्थित प्राचीन शिवालय राजा शालिवाहन द्वारा करीब छह हजार वर्ष पूर्व बनवाया गया था। यहां अलसुबह से ही श्रद्धालु अभिषेक के लिए कतारों में लग गए। ग्यारह रुद्री मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।
शिवरात्रि के अवसर पर नगर में विभिन्न स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई स्थानों पर गन्ने के रस, पंचामृत और गंगाजल से महारुद्राभिषेक कराया गया। पंडित विशाल शांडिल्य ने कहा कि सनातन वैदिक परंपरा में भगवान शिव को देवों के देव महादेव और महाकाल माना गया है।
उधर, हरिद्वार से कांवड़ लाकर कांवडि़यों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। गंगाजल, बेलपत्र, आक, धतूरा, शहद, फल-फूल अर्पित कर पूजन किया और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना की। मंदिरों में भंडारे भी आयोजित किए गए।
रंग-बिरंगी पोशाकों
में पहुंचे कांवड़िये
डाक कांवड़ लेकर आए शिव भक्तों के नगर आगमन पर श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। रंग-बिरंगी पोशाकों में ढोल की थाप पर थिरकते कांवड़िए पूरे शहर को शिवमय बना गए। करीब 250 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पहुंचे कांवड़ियों ने हर-हर महादेव का उद्घोष कर जलाभिषेक किया।

खडालवा शिव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ । संवाद

खडालवा शिव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ । संवाद

खडालवा शिव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ । संवाद

खडालवा शिव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ । संवाद