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Kaithal News: तुलसी-शालिग्राम विवाह में झूमे भक्त
Thu, 14 Nov 2024 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 14 Nov 2024 01:40 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। श्री सनातन धर्म मंदिर में तुलसी- शालिग्राम विवाह महोत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर में माता तुलसी को सजाया गया और मंडप सजा कर यह विवाह महोत्सव मनाया। श्रद्धालुओं ने नाच गाकर खुशी का इजहार किया।
इस अवसर पर मंदिर के महंत महेश शर्मा ने बताया कि देव उठनी एकादशी के दिन ही तुलसी शालिग्राम का विवाह महोत्सव मनाया जाता है। हर साल कार्तिक मास की एकादशी तिथि को तुलसी विवाह कराया जाता है। इस दिन देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम भगवान और माता तुलसी का विवाह रचाया जाता है और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना की जाती है।
उन्होंने बताया कि तुलसी विवाह के लिए एक सुन्दर मंडप तैयार किया गया और मंडप को फूलों से सजाया गया। माता तुलसी के पौधे को सजाया गया और लाल रंग की चुनरी ओढाई गई। उन्होंने बताया कि तुलसी को वरदान प्राप्त है कि जिस घर में तुलसी रहेंगी, वहां यम के दूत भी असमय नहीं जा सकते। मृत्यु के समय जिसके प्राण मंजरी रहित तुलसी और गंगा जल मुख में रखकर निकल जाते हैं, वह पापों से मुक्त होकर वैकुंठ धाम को प्राप्त होता है। जो मनुष्य तुलसी व आंवलों की छाया में अपने पितरों का श्राद्ध करता है, उसके पितर मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु अब देव उठनी एकादशी के दिन योगनिद्रा से जाग गए हैं। इसके साथ ही शादियों का सीजन भी आरंभ हो गया है। सभी मंगल कार्य भी अब होंगे। इस अवसर पर विनेश मेहता, तजिंद्र मिड्ढा, वीना मेहता, नवीता, रानी, वीना तनेजा व अन्य मौजूद रहे।
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सीवन। श्री सनातन धर्म मंदिर में तुलसी- शालिग्राम विवाह महोत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर में माता तुलसी को सजाया गया और मंडप सजा कर यह विवाह महोत्सव मनाया। श्रद्धालुओं ने नाच गाकर खुशी का इजहार किया।
इस अवसर पर मंदिर के महंत महेश शर्मा ने बताया कि देव उठनी एकादशी के दिन ही तुलसी शालिग्राम का विवाह महोत्सव मनाया जाता है। हर साल कार्तिक मास की एकादशी तिथि को तुलसी विवाह कराया जाता है। इस दिन देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम भगवान और माता तुलसी का विवाह रचाया जाता है और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना की जाती है।
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उन्होंने बताया कि तुलसी विवाह के लिए एक सुन्दर मंडप तैयार किया गया और मंडप को फूलों से सजाया गया। माता तुलसी के पौधे को सजाया गया और लाल रंग की चुनरी ओढाई गई। उन्होंने बताया कि तुलसी को वरदान प्राप्त है कि जिस घर में तुलसी रहेंगी, वहां यम के दूत भी असमय नहीं जा सकते। मृत्यु के समय जिसके प्राण मंजरी रहित तुलसी और गंगा जल मुख में रखकर निकल जाते हैं, वह पापों से मुक्त होकर वैकुंठ धाम को प्राप्त होता है। जो मनुष्य तुलसी व आंवलों की छाया में अपने पितरों का श्राद्ध करता है, उसके पितर मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु अब देव उठनी एकादशी के दिन योगनिद्रा से जाग गए हैं। इसके साथ ही शादियों का सीजन भी आरंभ हो गया है। सभी मंगल कार्य भी अब होंगे। इस अवसर पर विनेश मेहता, तजिंद्र मिड्ढा, वीना मेहता, नवीता, रानी, वीना तनेजा व अन्य मौजूद रहे।