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Kaithal News: गर्मी तीखी पर देसी फ्रिज के नहीं मिल रहे खरीदार

Tue, 28 May 2024 05:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 28 May 2024 05:17 AM IST
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Despite the scorching heat, there are no buyers for the indigenous refrigerators.
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। नौतपा चल रहा है और गर्मी के तेवर तीखे हैं पर ‘देसी फ्रिज’ यानी मटकों के खरीदार नहीं मिलने से कुम्हार परेशान हो रहे हैं।

गर्मी के सीजन में सभी शीतल जल की चाह रखते हैं और इस बीच हमारे जहन में एक नाम आता है और वो है गरीबों का फ्रिज कहे जाने वाला मटका। निम्न और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह नियामत फ्रिज की तरह माना जाता है लेकिन इस बार इनकी बिक्री काफी कम है।

आधुनिकता का असर कहें या बदलते जमाने की मांग कि कभी लोगों की पहली पसंद रहने वाले मिट्टी के मटके आज उपेक्षा का शिकार हैं। मटके बनाने वाले कुम्हार समाज के कारीगर प्रचंड गर्मी का सीजन होने के बावजूद खाली हाथ बैठे हैं।
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ग्रामीण इलाकों में तो हर परिवार के घर मिट्टी के मटके हर समय ठंडे जल से भरे रहते थे। बदले परिवेश में अब इन मटकों की जगह बिजली से चलने वाले उपकरणों ने लेे ली। रामनिवास ने बताया कि कभी उन लोगों के पास सीजन चालू होने से पहले बड़े आर्डर होते थे। बदल चुके परिवेश में कैंपरों, पानी की बोतलों व फ्रिजों के चलते अब मटकों की मांग नहीं रही है। जो परिवार अपने पूरे साल की कमाई गर्मी के सीजन में ही कमा लेते थे अब पूरी तरह से बेरोजगार हो कर रह गए।
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आज मटकों को बनाने वाले कुछ ही परिवार इस काम में लगे हैं और बाकी लोग इस काम को छोड़ गए। जो लोग इस काम में लगे हैं वे भी और कोई काम न सीखे होने के कारण मजबूरी में कर रहे हैं।

मिट्टी के मटके बनाने वाले गुलाब सिंह व रामनिवास ने बताया कि एक ओर तो अब मटकों की मांग नहीं है और दूसरी ओर मटके बनाने के लिए मिट्टी भी काफी महंगी मिलती है। भरी दोपहर में अपने मटके की बिक्री की आस में बैठी बुजुर्ग महिला विद्या देवी ने बताया कि मटके बनाने के लिए जो मिट्टी मंगवाई जाती है वह लगभग 15 हजार रुपये की ट्राली आती है। मिट्टी से कच्चा मटका बनाने पर लगने वाली मेहनत और फिर उसको पकाने के लिए ईंधन पर आने वाली लागत के हिसाब से एक मटके पर 70-75 रुपए से अधिक की लागत आ जाती है।

यदि वे उसे 90 रुपये का भी बेचते हैं तो ग्राहक दाम सुनते ही भडक़ जाता है। मजबूरीवश वे लोग अब मटका बनाने से परहेज कर सिरसा से मंगवाने लगे हैं। विद्या देवी ने बताया कि सिरसा से वे लोग मटका कैंपर व साधारण मटके मंगवाते हैं। मटका कैंपर में पानी लेने के लिए टोंटी लगी होती है। मटका कैंपर 250 रुपये से लेकर 400 रुपए कीमत तक के उपलब्ध हैं।


उन्होंने बताया कि चाहे साधारण मटका हो या कैंपर उन्हें बेचने पर 15 से 20 रुपए की बचते हैं। उनका यह भी कहना था कि दम तोड़ चुकी परंपरागत शैली के कारण उनके सामने परिवार को पालने में भी भारी दिक्कत है। अब इसे छोड़ कर दूसरे अन्य काम करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
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