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Kaithal News: पेयजल से परेशान ग्रामीणों का प्रदर्शन
Tue, 28 May 2024 05:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 28 May 2024 05:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत में पेयजल संकट से नाराज महिलाओं ने रेलवे रोड स्थित सुभाष नगर से लेकर जन स्वास्थ्य विभाग कार्यालय तक लगभग एक करीब मीटर दूरी तक रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान वे उप मंडल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करती हुई जन स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में पहुंची। एक घंटे से अधिक चले इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए कर्मी इधर-उधर दुबक गए।
अधिकारियों के कार्यालयों की चौखट पर बैठी बुजुर्ग महिलाओं ने कहा कि पानी की किल्लत ने उन्हें दर-दर की ठोकरें खिला दी हैं। घरों में साफ-सफाई तो दूर की बात पीने के लिए कैंफर का पानी खरीदने को वे विवश हैं।
कलायत में पेयजल संकट के साथ-साथ अब जनस्वास्थ्य विभाग के बजट उपयोग पर भी सवाल उठ गए हैं। देवी दयाल गर्ग, विकास और कृष्ण ने पूरी पेयजल व्यवस्था से संबंधित बजट की सिरे से जांच करवाने के लिए एसआईटी गठित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार पेयजल प्रबंधन के लिए करोड़ों रुपये का बजट जारी करती है।
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नहरी पेयजल योजना स्थल पर मोटरें, पाइप लाइप और दूसरे उपकरण बेहद बदहाल स्थिति में हैं। इनसे घरों तक कम और पानी व्यर्थ ज्यादा हो रहा है। पूरी व्यवस्था जुगाड़ के सहारे है। इन हालातों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अविलंब कार्यवाही जरूरी है।
उधर, कलायत के साथ-साथ मटौर गांव में भी पेजयल व्यवस्था पर ग्रामीणों ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सलिंद्र, नरेश, राजेश, राजबीर, कृष्ण, राजा, महावीर, प्रदीप, रमेश, रजनी, कमलेश और दूसरे ग्रामीणोंं का कहना है कि जल घर मेंं जिस सिंचाई स्रोत से पानी की सप्लाई दी जा रही है वह हरे सैवाल यानी काई और कीचड़ युक्त बदबूदार पानी से अटा है। यह पानी पशुओं के पीने के लायक भी नहीं है। बावजूद इसके इसे जल घर के टैंकोंं में भरा जा रहा है। इसी वजह से प्रदर्शन करना पड़ा।
नहरी पेयजल योजना टैंकों मेंं दो से तीन फीट पानी जमा हो चुका है। मोटरों के खराब होने के कारण पेयजल सप्लाई देने में जो समस्या आ रही थी उसका निवारण कर दिया गया है। अब लोगों को पानी की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा। -इंद्राज पंवार, एसडीओ-जनस्वास्थ्य विभाग कलायत
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कलायत। कलायत में पेयजल संकट से नाराज महिलाओं ने रेलवे रोड स्थित सुभाष नगर से लेकर जन स्वास्थ्य विभाग कार्यालय तक लगभग एक करीब मीटर दूरी तक रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान वे उप मंडल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करती हुई जन स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में पहुंची। एक घंटे से अधिक चले इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए कर्मी इधर-उधर दुबक गए।
अधिकारियों के कार्यालयों की चौखट पर बैठी बुजुर्ग महिलाओं ने कहा कि पानी की किल्लत ने उन्हें दर-दर की ठोकरें खिला दी हैं। घरों में साफ-सफाई तो दूर की बात पीने के लिए कैंफर का पानी खरीदने को वे विवश हैं।
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कलायत में पेयजल संकट के साथ-साथ अब जनस्वास्थ्य विभाग के बजट उपयोग पर भी सवाल उठ गए हैं। देवी दयाल गर्ग, विकास और कृष्ण ने पूरी पेयजल व्यवस्था से संबंधित बजट की सिरे से जांच करवाने के लिए एसआईटी गठित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार पेयजल प्रबंधन के लिए करोड़ों रुपये का बजट जारी करती है।
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नहरी पेयजल योजना स्थल पर मोटरें, पाइप लाइप और दूसरे उपकरण बेहद बदहाल स्थिति में हैं। इनसे घरों तक कम और पानी व्यर्थ ज्यादा हो रहा है। पूरी व्यवस्था जुगाड़ के सहारे है। इन हालातों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अविलंब कार्यवाही जरूरी है।
उधर, कलायत के साथ-साथ मटौर गांव में भी पेजयल व्यवस्था पर ग्रामीणों ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सलिंद्र, नरेश, राजेश, राजबीर, कृष्ण, राजा, महावीर, प्रदीप, रमेश, रजनी, कमलेश और दूसरे ग्रामीणोंं का कहना है कि जल घर मेंं जिस सिंचाई स्रोत से पानी की सप्लाई दी जा रही है वह हरे सैवाल यानी काई और कीचड़ युक्त बदबूदार पानी से अटा है। यह पानी पशुओं के पीने के लायक भी नहीं है। बावजूद इसके इसे जल घर के टैंकोंं में भरा जा रहा है। इसी वजह से प्रदर्शन करना पड़ा।
नहरी पेयजल योजना टैंकों मेंं दो से तीन फीट पानी जमा हो चुका है। मोटरों के खराब होने के कारण पेयजल सप्लाई देने में जो समस्या आ रही थी उसका निवारण कर दिया गया है। अब लोगों को पानी की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा। -इंद्राज पंवार, एसडीओ-जनस्वास्थ्य विभाग कलायत