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Kaithal News: बीडीपीओ कार्यालय ढांड पर प्रदर्शन
Tue, 10 Jun 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 10 Jun 2025 01:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। मनरेगा के तहत काम की मांग को लेकर पवनवा, ढांड और जडौला गांवों के मजदूरों ने युवा भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव आर्य के नेतृत्व में बीडीपीओ कार्यालय ढांड के बाहर प्रदर्शन किया। युवा भाकियू के नेतृत्व में मनरेगा मजदूरों ने नाराजगी जताकर काम मांगा।
प्रदर्शन में शामिल रामपाल (जडौला), विकास कुमार, सुनील कुमार, श्याम लाल, मूर्ति देवी, महेंद्रो देवी, बोहती देवी, रामरति देवी, भतेरी देवी और अंगूरी देवी ने आरोप लगाया कि उन्हें मनरेगा योजना के अंतर्गत कार्यालय कर्मियों द्वारा काम से वंचित रखा जा रहा है, जो उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।
महिलाओं ने बताया कि उन्हें जून 2024 में सिर्फ 10 दिन का काम दिया गया, उसके बाद से उन्हें कोई काम नहीं मिला। अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद सिर्फ एक ही जवाब मिलता है- जब डिमांड आएगी, तब काम मिलेगा।
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मजदूर महिलाओं का कहना है कि वे बेहद गरीब परिवारों से हैं और दिहाड़ी मजदूरी ही उनके परिवार की एकमात्र आजीविका है। काम न मिलने के कारण उनके घरों में चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है।
राजीव आर्य ने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत साल में 100 दिन का रोजगार मिलना चाहिए, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से यह संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही काम नहीं दिया गया तो संगठन को सड़कों पर उतरना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
मनरेगा योजना के तहत काम की मांग को लेकर दो-तीन गांवों की महिलाएं उनसे कार्यालय में मिली थीं। उनकी समस्या को गंभीरता से लिया गया है और उन्हें जल्द ही योजना के तहत काम उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
-जगजीत सिंह, बीडीपीओ ढांड
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ढांड। मनरेगा के तहत काम की मांग को लेकर पवनवा, ढांड और जडौला गांवों के मजदूरों ने युवा भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव आर्य के नेतृत्व में बीडीपीओ कार्यालय ढांड के बाहर प्रदर्शन किया। युवा भाकियू के नेतृत्व में मनरेगा मजदूरों ने नाराजगी जताकर काम मांगा।
प्रदर्शन में शामिल रामपाल (जडौला), विकास कुमार, सुनील कुमार, श्याम लाल, मूर्ति देवी, महेंद्रो देवी, बोहती देवी, रामरति देवी, भतेरी देवी और अंगूरी देवी ने आरोप लगाया कि उन्हें मनरेगा योजना के अंतर्गत कार्यालय कर्मियों द्वारा काम से वंचित रखा जा रहा है, जो उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।
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महिलाओं ने बताया कि उन्हें जून 2024 में सिर्फ 10 दिन का काम दिया गया, उसके बाद से उन्हें कोई काम नहीं मिला। अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद सिर्फ एक ही जवाब मिलता है- जब डिमांड आएगी, तब काम मिलेगा।
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मजदूर महिलाओं का कहना है कि वे बेहद गरीब परिवारों से हैं और दिहाड़ी मजदूरी ही उनके परिवार की एकमात्र आजीविका है। काम न मिलने के कारण उनके घरों में चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है।
राजीव आर्य ने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत साल में 100 दिन का रोजगार मिलना चाहिए, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से यह संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही काम नहीं दिया गया तो संगठन को सड़कों पर उतरना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
मनरेगा योजना के तहत काम की मांग को लेकर दो-तीन गांवों की महिलाएं उनसे कार्यालय में मिली थीं। उनकी समस्या को गंभीरता से लिया गया है और उन्हें जल्द ही योजना के तहत काम उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
-जगजीत सिंह, बीडीपीओ ढांड