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Kaithal News: पुस्तकालयाध्यक्ष पदों के लिए तत्काल सुधार की मांग
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कैथल। हरियाणा पुस्तकालय संघ (एचएलए) ने राज्य के सरकारी कॉलेजों और जिला पुस्तकालयों में पुस्तकालयाध्यक्ष/वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष पदों की योग्यता में संशोधन की लंबे समय से लंबित मांग के लिए एक बार फिर से आवाज उठाई है।
संघ ने हाल ही में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा को ज्ञापन सौंपा, जिसमें पांच दशकों से चली आ रही इस विसंगति को उजागर किया गया। अध्यक्ष डॉ. रूपेश गौड़ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि हरियाणा शिक्षा कॉलेज ग्रेड सेवा नियम, 1986 में निर्धारित योग्यताएं अब पुरानी हो चुकी हैं।
इन नियमों के तहत द्वितीय श्रेणी के साथ पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक डिग्री या पुस्तकालय विज्ञान में डिप्लोमा के साथ स्नातकोत्तर डिग्री की आवश्यकता है। यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों से मेल नहीं खाता, जो पुस्तकालय और सूचना विज्ञान में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री, नेट योग्यता या पीएचडी की मांग करता है।
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डॉ. गौड़ ने कहा, यह विसंगति उच्च योग्य उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है और हमारे शैक्षणिक व सार्वजनिक संस्थानों में योग्य पेशेवरों की कमी का कारण बन रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां सरकारी सहायता प्राप्त निजी कॉलेजों ने यूजीसी मानकों को अपना लिया है, वहीं राज्य संचालित संस्थान अभी भी पिछड़े हुए हैं। संघ के एक अन्य प्रतिनिधि प्रदीप बेनीवाल, ने कहा कि यह समस्या केवल कॉलेजों तक सीमित नहीं है।
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में भी यही स्थिति है। कई स्कूलों में पुस्तकालय हैं लेकिन उनमें योग्य पुस्तकालयाध्यक्ष नहीं हैं। यह छात्रों में पढ़ने की आदतों और उनकी बौद्धिक क्षमताओं के विकास को बाधित करता है। इस अवसर पर दीपक, नीलम, विनायक, दिनेश, सोहन और प्रभात आदि शोधार्थी उपस्थित थे।
यह है पुस्तकालय संघ की मुख्य मांगें :
1986 के सेवा नियमों को यूजीसी मानकों के अनुरूप संशोधित करना।
सरकारी कॉलेजों और जिला पुस्तकालयों में यूजीसी मानकों और संशोधित सेवा नियमों के अनुसार योग्य पुस्तकालयाध्यक्षों की भर्ती शुरू करना।
सीबीएसई मानकों के अनुरूप सरकारी स्कूलों में पेशेवर योग्य पुस्तकालयाध्यक्षों के पद सृजित करना।
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संघ ने हाल ही में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा को ज्ञापन सौंपा, जिसमें पांच दशकों से चली आ रही इस विसंगति को उजागर किया गया। अध्यक्ष डॉ. रूपेश गौड़ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि हरियाणा शिक्षा कॉलेज ग्रेड सेवा नियम, 1986 में निर्धारित योग्यताएं अब पुरानी हो चुकी हैं।
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इन नियमों के तहत द्वितीय श्रेणी के साथ पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक डिग्री या पुस्तकालय विज्ञान में डिप्लोमा के साथ स्नातकोत्तर डिग्री की आवश्यकता है। यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों से मेल नहीं खाता, जो पुस्तकालय और सूचना विज्ञान में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री, नेट योग्यता या पीएचडी की मांग करता है।
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डॉ. गौड़ ने कहा, यह विसंगति उच्च योग्य उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है और हमारे शैक्षणिक व सार्वजनिक संस्थानों में योग्य पेशेवरों की कमी का कारण बन रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां सरकारी सहायता प्राप्त निजी कॉलेजों ने यूजीसी मानकों को अपना लिया है, वहीं राज्य संचालित संस्थान अभी भी पिछड़े हुए हैं। संघ के एक अन्य प्रतिनिधि प्रदीप बेनीवाल, ने कहा कि यह समस्या केवल कॉलेजों तक सीमित नहीं है।
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में भी यही स्थिति है। कई स्कूलों में पुस्तकालय हैं लेकिन उनमें योग्य पुस्तकालयाध्यक्ष नहीं हैं। यह छात्रों में पढ़ने की आदतों और उनकी बौद्धिक क्षमताओं के विकास को बाधित करता है। इस अवसर पर दीपक, नीलम, विनायक, दिनेश, सोहन और प्रभात आदि शोधार्थी उपस्थित थे।
यह है पुस्तकालय संघ की मुख्य मांगें :
1986 के सेवा नियमों को यूजीसी मानकों के अनुरूप संशोधित करना।
सरकारी कॉलेजों और जिला पुस्तकालयों में यूजीसी मानकों और संशोधित सेवा नियमों के अनुसार योग्य पुस्तकालयाध्यक्षों की भर्ती शुरू करना।
सीबीएसई मानकों के अनुरूप सरकारी स्कूलों में पेशेवर योग्य पुस्तकालयाध्यक्षों के पद सृजित करना।