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शाम 5:40 बजे दिल्ली, 7 बजे जींद की अंतिम बस
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कैथल। बस अड्डा पर शाम सात बजे के बाद लंबे रूटों के साथ-साथ लोकल रूटों पर भी यात्रियों को बसें नहीं मिल पा रही। कई-कई घंटों के इंतजार के बाद यात्री अन्य वाहनों को पकड़कर घर जाते नजर आए। शाम 5:40 बजे दिल्ली और 7 बजे जींद के लिए अंतिम बस यहां पर उपलब्ध है।
पिछले साल लगे लॉकडाउन के कारण देर रात्रि के लिए बंद की गई बस सेवा अभी तक बहाल नहीं हुई। पहले कैथल से दिल्ली के लिए 6 बजकर 40 मिनट व करनाल के लिए रात्रि 9 बजे और कुरुक्षेत्र के लिए रात्रि आठ बजे भी बस सेवा की सुविधा थी लेकिन अब शाम सात बजे के बाद यहां सन्नाटा पसरने लगता है। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने बस अड्डे की पड़ताल की तो यहां काफी संख्या में यात्री बसों का इंतजार करते नजर आए। कैथल से जींद, कुरुक्षेत्र व करनाल की ओर जाने वाले यात्री बस अड्डा पर बसों के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए।
बता दें कि बसों की लगातार कम हो रही संख्या लोगों पर भारी पड़ रही है। कई शहरों के लिए शाम छह या सात बजे के बाद बस नहीं मिलती। इस कारण लोग बस अड्डे से निराश होकर निजी वाहनों की ओर दौड़ते हैं। कई बार निजी वाहन भी नहीं मिल पाने के कारण लोगों को काफी परेशानियां होती हैं। यही हालात लंबे रूटों पर है, जहां कई रूटों पर बसें बंद हो गई हैं, कई रूटों पर उनके फेरे कम हो गए हैं। जिस कारण डिपो में लगातार घट रही बसों की संख्या है।
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कैथल बस स्टैंड से विभिन्न लंबे और लोकल रूटों के लिए रोजाना 18 हजार से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। ऐसे में यात्रियों की संख्या को देखते हुए यहां करीब 200 बसों की जरूरत है, लेकिन इस समय डिपो की मात्र 85 बसें विभिन्न रूटों पर दौड़ रही हैं। शाम के समय ज्यादातर रूटों पर बसें जानी बंद हो जाती हैं, जिस कारण यात्रियों को अन्य वाहनों के माध्यम से अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। लंबे रूटों को जाने वाली कई बसें शाम पांच बजे के बाद बंद हो जाती है।
कर्मचारियों का ओवरटाइम बंद होने से भी बढ़ी दिक्कतें
रोडवेज में कर्मचारियों का ओवरटाइम बंद होने के कारण भी दिक्कतें बढ़ी हैं। शाम को पांच-छह बजे के बाद एकाध बस ही रूटों पर निकलती है। शाम को जैसी ही बस किसी रूट से आकर बस स्टैंड में प्रवेश करती है, उसी समय बस के लिए यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। कई बार तो यात्रियों को बसों की खिड़कियों में लटक कर सफर करना पड़ता हैं। दूर-दराज जाने वाले यात्री ट्रेन को विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पिछले करीब दो सालों से कैथल से पैसेंजर ट्रेन भी बंद है।
इससे यात्रियों की मुश्किलें और भी बढ़ गई है। शहर से गांवों को जोडऩे वाले कई ऐसे रूट हैं, जहां आज भी बस सेवा न के बराबर है। लंबे रूटों पर जाने के लिए तो बाहर के डिपो की एकाध बस छह बजे के बाद मिल भी जाती है, लेकिन लोकल रूटों पर दिक्कतें ज्यादा हैं। पाई की ओर गांव सेरधा तक जाने वाली अंतिम बस शाम छह बजे तक है। उसके बाद पूंडरी तक पहुंचकर निजी वाहनों में सफर करना पड़ता है। 5:40 बजे के बाद दिल्ली की ओर जाने के लिए बसों की दिक्कत आती है। कैथल से कुरुक्षेत्र सात बजे कोई बस नहीं मिलती। करनाल के लिए सवा सात बजे के बाद बस बंद हो जाती है। टोहाना की तरफ अंतिम बस 5:30 बजे जाती है, उसके बाद डिपो की कोई बस वहां नहीं जाती।
इन रूटों को बहाल करने की मांग
कुरुक्षेत्र, करनाल, पूंडरी, असंध, गुहला-चीका व राजौंद रूट पर यात्रियों को सात बजे के बाद बस नहीं मिलती है। यात्रियों ने इन रूटों को बहाल करने की मांग की है। यात्रियों ने कहा कि जल्द से जल्द बसों को चलाया जाए ताकि आने जाने में परेशानी न हो।
गुहला चीका जाने वाले यात्री शुभम शर्मा ने बताया कि वे रोजाना कैथल आते-जाते हैं। शाम को सात बजे के बाद बस न मिलने से परेशानी होती है। निजी वाहनों के लिए सीवन रोड पर ऑटो पकडक़र जाते हैं। उसके बाद निजी वाहनों से घर पहुंचना पड़ता है। बस अड्डे से बसें नहीं मिलती है।
कुरुक्षेत्र रूट पर आने-जाने वाले रामकिशन का कहना है कि कोरोना काल से पहले बस आठ बजे जाती थी, लेकिन अब बस बंद है। छह बजकर 20 मिनट के बाद कोई बस नहीं मिलती। आठ बजे जाने वाली बस को दोबारा चलाया जाए ताकि लोगों को परेशानी न हो।
डिपो महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बताया कि डिपो में इस समय बसों की कमी हो रही है। यात्रियों की संख्या के अनुसार डिपो में 200 बसों की जरूरत है। फिलहाल डिपो में 85 बसें है। इन्हें यात्रियों की जरूरत अनुसार रूटों पर भेजा जा रहा है।
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पिछले साल लगे लॉकडाउन के कारण देर रात्रि के लिए बंद की गई बस सेवा अभी तक बहाल नहीं हुई। पहले कैथल से दिल्ली के लिए 6 बजकर 40 मिनट व करनाल के लिए रात्रि 9 बजे और कुरुक्षेत्र के लिए रात्रि आठ बजे भी बस सेवा की सुविधा थी लेकिन अब शाम सात बजे के बाद यहां सन्नाटा पसरने लगता है। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने बस अड्डे की पड़ताल की तो यहां काफी संख्या में यात्री बसों का इंतजार करते नजर आए। कैथल से जींद, कुरुक्षेत्र व करनाल की ओर जाने वाले यात्री बस अड्डा पर बसों के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए।
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बता दें कि बसों की लगातार कम हो रही संख्या लोगों पर भारी पड़ रही है। कई शहरों के लिए शाम छह या सात बजे के बाद बस नहीं मिलती। इस कारण लोग बस अड्डे से निराश होकर निजी वाहनों की ओर दौड़ते हैं। कई बार निजी वाहन भी नहीं मिल पाने के कारण लोगों को काफी परेशानियां होती हैं। यही हालात लंबे रूटों पर है, जहां कई रूटों पर बसें बंद हो गई हैं, कई रूटों पर उनके फेरे कम हो गए हैं। जिस कारण डिपो में लगातार घट रही बसों की संख्या है।
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कैथल बस स्टैंड से विभिन्न लंबे और लोकल रूटों के लिए रोजाना 18 हजार से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। ऐसे में यात्रियों की संख्या को देखते हुए यहां करीब 200 बसों की जरूरत है, लेकिन इस समय डिपो की मात्र 85 बसें विभिन्न रूटों पर दौड़ रही हैं। शाम के समय ज्यादातर रूटों पर बसें जानी बंद हो जाती हैं, जिस कारण यात्रियों को अन्य वाहनों के माध्यम से अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। लंबे रूटों को जाने वाली कई बसें शाम पांच बजे के बाद बंद हो जाती है।
कर्मचारियों का ओवरटाइम बंद होने से भी बढ़ी दिक्कतें
रोडवेज में कर्मचारियों का ओवरटाइम बंद होने के कारण भी दिक्कतें बढ़ी हैं। शाम को पांच-छह बजे के बाद एकाध बस ही रूटों पर निकलती है। शाम को जैसी ही बस किसी रूट से आकर बस स्टैंड में प्रवेश करती है, उसी समय बस के लिए यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। कई बार तो यात्रियों को बसों की खिड़कियों में लटक कर सफर करना पड़ता हैं। दूर-दराज जाने वाले यात्री ट्रेन को विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पिछले करीब दो सालों से कैथल से पैसेंजर ट्रेन भी बंद है।
इससे यात्रियों की मुश्किलें और भी बढ़ गई है। शहर से गांवों को जोडऩे वाले कई ऐसे रूट हैं, जहां आज भी बस सेवा न के बराबर है। लंबे रूटों पर जाने के लिए तो बाहर के डिपो की एकाध बस छह बजे के बाद मिल भी जाती है, लेकिन लोकल रूटों पर दिक्कतें ज्यादा हैं। पाई की ओर गांव सेरधा तक जाने वाली अंतिम बस शाम छह बजे तक है। उसके बाद पूंडरी तक पहुंचकर निजी वाहनों में सफर करना पड़ता है। 5:40 बजे के बाद दिल्ली की ओर जाने के लिए बसों की दिक्कत आती है। कैथल से कुरुक्षेत्र सात बजे कोई बस नहीं मिलती। करनाल के लिए सवा सात बजे के बाद बस बंद हो जाती है। टोहाना की तरफ अंतिम बस 5:30 बजे जाती है, उसके बाद डिपो की कोई बस वहां नहीं जाती।
इन रूटों को बहाल करने की मांग
कुरुक्षेत्र, करनाल, पूंडरी, असंध, गुहला-चीका व राजौंद रूट पर यात्रियों को सात बजे के बाद बस नहीं मिलती है। यात्रियों ने इन रूटों को बहाल करने की मांग की है। यात्रियों ने कहा कि जल्द से जल्द बसों को चलाया जाए ताकि आने जाने में परेशानी न हो।
गुहला चीका जाने वाले यात्री शुभम शर्मा ने बताया कि वे रोजाना कैथल आते-जाते हैं। शाम को सात बजे के बाद बस न मिलने से परेशानी होती है। निजी वाहनों के लिए सीवन रोड पर ऑटो पकडक़र जाते हैं। उसके बाद निजी वाहनों से घर पहुंचना पड़ता है। बस अड्डे से बसें नहीं मिलती है।
कुरुक्षेत्र रूट पर आने-जाने वाले रामकिशन का कहना है कि कोरोना काल से पहले बस आठ बजे जाती थी, लेकिन अब बस बंद है। छह बजकर 20 मिनट के बाद कोई बस नहीं मिलती। आठ बजे जाने वाली बस को दोबारा चलाया जाए ताकि लोगों को परेशानी न हो।
डिपो महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बताया कि डिपो में इस समय बसों की कमी हो रही है। यात्रियों की संख्या के अनुसार डिपो में 200 बसों की जरूरत है। फिलहाल डिपो में 85 बसें है। इन्हें यात्रियों की जरूरत अनुसार रूटों पर भेजा जा रहा है।