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Kaithal News: धर्म परिवर्तन से पहले जरूरी है प्रपत्र ‘क’ में घोषणा पत्र
Tue, 12 Aug 2025 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 12 Aug 2025 01:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन निवारण अधिनियम एवं नियम, 2022 के प्रावधानों का जिले में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। डीसी प्रीति ने बताया कि प्रशासन अलर्ट मोड में है और किसी भी प्रकार की नियमों की अवहेलना पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीसी ने कहा कि अधिनियम के तहत धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को परिवर्तन से पहले प्रपत्र ‘क’ में घोषणा पत्र उपायुक्त कार्यालय में जमा करना होगा। यदि धर्मांतरण के इच्छुक नाबालिग हैं, तो जीवित माता-पिता दोनों को प्रपत्र ‘ख’ में घोषणा पत्र देना होगा।
डीसी ने बताया कि धर्मांतरण कराने वाले धार्मिक पुजारी या आयोजक को प्रपत्र ‘ग’ में पूर्व सूचना देना अनिवार्य है। सभी घोषणाओं और सूचनाओं की पावती उपायुक्त कार्यालय से जारी की जाएगी, ताकि प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण और पारदर्शिता बनी रहे।
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घोषणा के 30 दिन के भीतर कोई भी व्यक्ति लिखित में आपत्ति दर्ज करा सकता है। आपत्ति मिलने पर प्रशासन गहन जांच करेगा और यदि धर्मांतरण में बल, धोखाधड़ी, जबरदस्ती या अन्य निषिद्ध साधन पाए गए, तो धर्मांतरण की अनुमति रद्द कर दी जाएगी।
डीसी ने बताया कि अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि शादी के लिए अपना धर्म छिपाने के प्रावधान का उल्लंघन करके किया गया कोई भी विवाह अमान्य माना जाएगा। ऐसे विवाह से पैदा हुआ कोई भी बच्चा वैध माना जाएगा और उसकी संपत्ति का उत्तराधिकार उसके माता-पिता के उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार होगा।
गैरकानूनी धर्मांतरण पर सजा और जुर्माना (अधिनियम के अनुसार)
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गैरकानूनी धर्मांतरण : 1 से 5 साल की कैद और कम से कम 1 लाख रुपये जुर्माना
नशादी के लिए धर्म छुपाना : 3 से 10 साल की कैद और कम से कम 3 लाख रुपये जुर्माना
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नाबालिग, महिला, एससी/एसटी का धर्मांतरण : 4 से 10 साल की कैद और कम से कम 3 लाख रुपये जुर्माना
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सामूहिक धर्मांतरण (2 से अधिक लोगों का) : 5 से 10 साल की कैद और कम से कम 4 लाख रुपये जुर्माना
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शादी के लिए धर्म छुपाना अमान्य ः अधिनियम में प्रावधान है कि धर्म छुपाकर किया गया विवाह अमान्य होगा। हालांकि, ऐसे विवाह से जन्मा बच्चा वैध माना जाएगा और उत्तराधिकार अधिकार कानूनन सुरक्षित रहेंगे।
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कैथल। हरियाणा विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन निवारण अधिनियम एवं नियम, 2022 के प्रावधानों का जिले में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। डीसी प्रीति ने बताया कि प्रशासन अलर्ट मोड में है और किसी भी प्रकार की नियमों की अवहेलना पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीसी ने कहा कि अधिनियम के तहत धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को परिवर्तन से पहले प्रपत्र ‘क’ में घोषणा पत्र उपायुक्त कार्यालय में जमा करना होगा। यदि धर्मांतरण के इच्छुक नाबालिग हैं, तो जीवित माता-पिता दोनों को प्रपत्र ‘ख’ में घोषणा पत्र देना होगा।
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डीसी ने बताया कि धर्मांतरण कराने वाले धार्मिक पुजारी या आयोजक को प्रपत्र ‘ग’ में पूर्व सूचना देना अनिवार्य है। सभी घोषणाओं और सूचनाओं की पावती उपायुक्त कार्यालय से जारी की जाएगी, ताकि प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण और पारदर्शिता बनी रहे।
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घोषणा के 30 दिन के भीतर कोई भी व्यक्ति लिखित में आपत्ति दर्ज करा सकता है। आपत्ति मिलने पर प्रशासन गहन जांच करेगा और यदि धर्मांतरण में बल, धोखाधड़ी, जबरदस्ती या अन्य निषिद्ध साधन पाए गए, तो धर्मांतरण की अनुमति रद्द कर दी जाएगी।
डीसी ने बताया कि अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि शादी के लिए अपना धर्म छिपाने के प्रावधान का उल्लंघन करके किया गया कोई भी विवाह अमान्य माना जाएगा। ऐसे विवाह से पैदा हुआ कोई भी बच्चा वैध माना जाएगा और उसकी संपत्ति का उत्तराधिकार उसके माता-पिता के उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार होगा।
गैरकानूनी धर्मांतरण पर सजा और जुर्माना (अधिनियम के अनुसार)
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गैरकानूनी धर्मांतरण : 1 से 5 साल की कैद और कम से कम 1 लाख रुपये जुर्माना
नशादी के लिए धर्म छुपाना : 3 से 10 साल की कैद और कम से कम 3 लाख रुपये जुर्माना
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नाबालिग, महिला, एससी/एसटी का धर्मांतरण : 4 से 10 साल की कैद और कम से कम 3 लाख रुपये जुर्माना
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सामूहिक धर्मांतरण (2 से अधिक लोगों का) : 5 से 10 साल की कैद और कम से कम 4 लाख रुपये जुर्माना
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शादी के लिए धर्म छुपाना अमान्य ः अधिनियम में प्रावधान है कि धर्म छुपाकर किया गया विवाह अमान्य होगा। हालांकि, ऐसे विवाह से जन्मा बच्चा वैध माना जाएगा और उत्तराधिकार अधिकार कानूनन सुरक्षित रहेंगे।