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डीसी, एडीसी के घर के बाहर नहीं लगा बिजली का मीटर
अमर उजाला ब्यूरो, कैथल
Updated Sun, 18 Sep 2016 02:14 AM IST
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कैथ्ाल
- फोटो : कैथ्ाल
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कैथल। डीसी और एसडीएम आवास पर प्रदर्शन करने पहुंचे वकीलों ने अधिकारियों के आवास के बाहर मीटर ना मिलने व कई अधिकारियों के आवास के बंद पड़े मीटरों को लेकर जमकर बवाल काटा। डीसी व एडीसी आवास के बाहर मीटर ही नहीं मिला तो सीटीएम व अन्य अधिकारियों के आवास के बाहर लगे मीटर बंद मिलने पर बिजली चोरी का आरोप लगाकर वकील भड़क उठे। वकीलों ने बिजली निगम के अधिकारियों को बुलाकर कार्रवाई की मांग की। लेकिन दो घंटे तक कोई बिजली अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। बाद में बार एसोसिएशन ने प्रस्ताव डाल कर अधिकारियों की बिजली चोरी करने एवं बिजली निगम द्वारा कार्रवाई ना करने की शिकायत देने का निर्णय लिया।
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दरअसल शुक्रवार रात को डीसी द्वारा चैंबर्स में पुलिस भेजने से भड़के वकील डीसी आवास पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। जहां डीसी के खिलाफ नारेबाजी करने के बाद एसडीएम आवास के बाहर नारेबाजी को पहुंचे। यहां नारेबाजी करते समय बिजली के खंभों पर लगे मीटरों की ओर वकीलों का ध्यान गया तो वकील भड़क उठे। यहां लगे एक बॉक्स में तो मीटर ही नहीं था। बाकी बॉक्स में लगे मीटर ठप पड़े थे। उनमें रीडिंग ही दिखाई नहीं दे रही थी। वहीं एक मीटर के बाहर से ही तार निकाली हुई थी। एडीसी आवास के बाहर मीटर ही नहीं मिला। बाद में देखने पर डीसी आवास के बाहर भी मीटर नहीं पाया गया। इसे देखकर वकीलों ने बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बाद में बिजली निगम के एससी, एक्सईएन, एसडीओ सहित पुलिस के अधिकारियों को सूचित किया गया कि यहां आकर बिजली चोरी की जांच की जाए। करीब दो घंटे तक वकीलों वे प्रधान अशोक गौतम के नेतृत्व मेें अधिकारियों के आवास के बाहर प्रदर्शन किया और अधिकारियों का इंतजार किया। लेकिन कोई बिजली अधिकारी जांच के लिए नहीं पहुंचा। बाद में वकीलों ने बिजली चोरी एवं चैंबर्स में पुलिस भेजने के मामले को लेकर सत्र न्यायाधीश से मुलाकात की और कार्रवाई की मांग की।
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बार एसोसिएशन के प्रधान अशोक गौतम ने कहा कि एक आम आदमी के घर यदि मीटर की तार भी खुली मिल जाए तो यही बिजली निगम पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर उस पर लाखों रुपया जुर्माना करता है। लेकिन आज जब अधिकारी सरेआम बिजली चोरी कर रहे हैं तो कोई भी बिजली निगम का अधिकारी जांच के लिए नहीं आया। जबकि डीसी व एडीसी के आवास के बाहर मीटर ही नहीं हैं। बाकी अधिकारियों के आवास के बाहर जो मीटर लगे हैं, उनमें दो मीटर पूरी तरह से बंद हैं, रीडिंग नहीं हैं। एक बॉक्स में मीटर ही नहीं, एक में से डायरेक्ट सप्लाई हो रही है।
यह अंधेरगर्दी करते हुए प्रशासन लोगों को बेवजह परेशान कर रहा है और जनता के खून पसीने की कमाई को बिजली के फिजूलखर्ची में अधिकारी उड़ा रहे हैं। कई अधिकारियों के बाथरूम में भी एसी लगे हुए हैं। जिला बार एसोसिएशन इस मामले की शिकायत करती है। प्रस्ताव डालकर बिजली निगम से जांच की मांग करती है। इन पर जो भी जुर्माना बनता है, उसका नियमानुसार 10 प्रतिशत हिस्सा बार को दिया जाए।
एसडीएम ने किया वकीलों से बातचीत का प्रयास
उधर, एसडीएम आवास पर पहुंचे वकीलों से बातचीत का प्रयास करते हुए एसडीएम मनदीप कौर ने बार एसोसिएशन के प्रधान को कर्मचारी के माध्यम से बुलाया। लेकिन प्रधान से बातचीत से इंकार कर दिया और कहा कि बातचीत करनी है तो सभी वकीलों के बीच में आकर करें।
बाहर मीटर न होने की बात पर चुप्पी साध गए डीसी
उधर, डीसी से जब पूछा गया कि अधिकारियों के घर के बाहर मीटर नहीं हैं, जो हैं वे बंद पड़े हैं। आपके घर के बाहर मीटर क्यों नहीं हैं? तो उन्होंने कहा कि आप डीपीआरओ से बात कर लिजिए। मैं अभी व्यस्त हूं।
उनके पास ऐसी कोई सूचना नहीं आई। यदि कहीं बिजली चोरी हो रही है तो विभागीय कर्मचारी भेजकर जांच करवाई जाएगी।
पीसी सैनी, एक्सईएन, बिजली निगम
मैं वकीलों और बार का हमेशा सम्मान करती हूं : एसडीएम
एसडीएम मनदीप कौर ने कहा कि बार और वकीलों को लेकर उनके मन में हमेशा सम्मान रहा है। वकीलों से राय लेकर उन्होंने सोमवार व शुक्रवार के दिन तय किए थे। इसके बाद से आज तक कभी ऐसा दिन नहीं आया कि वे निर्धारित समय पर कोर्ट में ना बैठी हों। वे वकीलों के साथ सदैव सद्भावनापूर्ण माहौल बनाने तथा जनता को त्वरित न्याय प्रदान के मामले में हर समय मिलने को तैयार हैं। वे एक शहीद की विधवा होने पर गर्व करतीं हैं कि उनके पति ने देश की शान के लिए अपनी कुर्बानी दी। ऐसे परिवार से ताल्लुक रखने वाली कोई भी महिला किसी का अपमान नहीं कर सकती। तबादला करना सरकार का एकाधिकार है, चूंकि हम अनुशासित सरकारी अधिकारी हैं, ऐसे में सरकार के आदेश मानने के लिए बाध्य हैं। एसडीएम आवास में शिफ्ट हुए उन्हें महज 3 सप्ताह हुए हैं। उनके समय का बिल आना अभी बाकी है। यहां किसी प्रकार की बिजली चोरी का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने जुलाई, अगस्त और सितंबर में 332 केसों का निपटारा किया है। जो किसी भी राजस्व अदालत का सर्वाधिक आंकड़ा है। न्यायालय के अलावा मंडियों, नगरपालिकाएं, हुडा तथा आरकेएसडी कालेज के कार्यों को भी संभाल रही हैं। 24 घंटे जनता के लिए उनके कार्यालय के द्वार खुले हैं। उन्होंने आज भी वकीलों को बातचीत के लिए बुलाया था। वे जब चाहें उनसे बात कर सकते हैं।
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दरअसल शुक्रवार रात को डीसी द्वारा चैंबर्स में पुलिस भेजने से भड़के वकील डीसी आवास पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। जहां डीसी के खिलाफ नारेबाजी करने के बाद एसडीएम आवास के बाहर नारेबाजी को पहुंचे। यहां नारेबाजी करते समय बिजली के खंभों पर लगे मीटरों की ओर वकीलों का ध्यान गया तो वकील भड़क उठे। यहां लगे एक बॉक्स में तो मीटर ही नहीं था। बाकी बॉक्स में लगे मीटर ठप पड़े थे। उनमें रीडिंग ही दिखाई नहीं दे रही थी। वहीं एक मीटर के बाहर से ही तार निकाली हुई थी। एडीसी आवास के बाहर मीटर ही नहीं मिला। बाद में देखने पर डीसी आवास के बाहर भी मीटर नहीं पाया गया। इसे देखकर वकीलों ने बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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बाद में बिजली निगम के एससी, एक्सईएन, एसडीओ सहित पुलिस के अधिकारियों को सूचित किया गया कि यहां आकर बिजली चोरी की जांच की जाए। करीब दो घंटे तक वकीलों वे प्रधान अशोक गौतम के नेतृत्व मेें अधिकारियों के आवास के बाहर प्रदर्शन किया और अधिकारियों का इंतजार किया। लेकिन कोई बिजली अधिकारी जांच के लिए नहीं पहुंचा। बाद में वकीलों ने बिजली चोरी एवं चैंबर्स में पुलिस भेजने के मामले को लेकर सत्र न्यायाधीश से मुलाकात की और कार्रवाई की मांग की।
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बार एसोसिएशन के प्रधान अशोक गौतम ने कहा कि एक आम आदमी के घर यदि मीटर की तार भी खुली मिल जाए तो यही बिजली निगम पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर उस पर लाखों रुपया जुर्माना करता है। लेकिन आज जब अधिकारी सरेआम बिजली चोरी कर रहे हैं तो कोई भी बिजली निगम का अधिकारी जांच के लिए नहीं आया। जबकि डीसी व एडीसी के आवास के बाहर मीटर ही नहीं हैं। बाकी अधिकारियों के आवास के बाहर जो मीटर लगे हैं, उनमें दो मीटर पूरी तरह से बंद हैं, रीडिंग नहीं हैं। एक बॉक्स में मीटर ही नहीं, एक में से डायरेक्ट सप्लाई हो रही है।
यह अंधेरगर्दी करते हुए प्रशासन लोगों को बेवजह परेशान कर रहा है और जनता के खून पसीने की कमाई को बिजली के फिजूलखर्ची में अधिकारी उड़ा रहे हैं। कई अधिकारियों के बाथरूम में भी एसी लगे हुए हैं। जिला बार एसोसिएशन इस मामले की शिकायत करती है। प्रस्ताव डालकर बिजली निगम से जांच की मांग करती है। इन पर जो भी जुर्माना बनता है, उसका नियमानुसार 10 प्रतिशत हिस्सा बार को दिया जाए।
एसडीएम ने किया वकीलों से बातचीत का प्रयास
उधर, एसडीएम आवास पर पहुंचे वकीलों से बातचीत का प्रयास करते हुए एसडीएम मनदीप कौर ने बार एसोसिएशन के प्रधान को कर्मचारी के माध्यम से बुलाया। लेकिन प्रधान से बातचीत से इंकार कर दिया और कहा कि बातचीत करनी है तो सभी वकीलों के बीच में आकर करें।
बाहर मीटर न होने की बात पर चुप्पी साध गए डीसी
उधर, डीसी से जब पूछा गया कि अधिकारियों के घर के बाहर मीटर नहीं हैं, जो हैं वे बंद पड़े हैं। आपके घर के बाहर मीटर क्यों नहीं हैं? तो उन्होंने कहा कि आप डीपीआरओ से बात कर लिजिए। मैं अभी व्यस्त हूं।
उनके पास ऐसी कोई सूचना नहीं आई। यदि कहीं बिजली चोरी हो रही है तो विभागीय कर्मचारी भेजकर जांच करवाई जाएगी।
पीसी सैनी, एक्सईएन, बिजली निगम
मैं वकीलों और बार का हमेशा सम्मान करती हूं : एसडीएम
एसडीएम मनदीप कौर ने कहा कि बार और वकीलों को लेकर उनके मन में हमेशा सम्मान रहा है। वकीलों से राय लेकर उन्होंने सोमवार व शुक्रवार के दिन तय किए थे। इसके बाद से आज तक कभी ऐसा दिन नहीं आया कि वे निर्धारित समय पर कोर्ट में ना बैठी हों। वे वकीलों के साथ सदैव सद्भावनापूर्ण माहौल बनाने तथा जनता को त्वरित न्याय प्रदान के मामले में हर समय मिलने को तैयार हैं। वे एक शहीद की विधवा होने पर गर्व करतीं हैं कि उनके पति ने देश की शान के लिए अपनी कुर्बानी दी। ऐसे परिवार से ताल्लुक रखने वाली कोई भी महिला किसी का अपमान नहीं कर सकती। तबादला करना सरकार का एकाधिकार है, चूंकि हम अनुशासित सरकारी अधिकारी हैं, ऐसे में सरकार के आदेश मानने के लिए बाध्य हैं। एसडीएम आवास में शिफ्ट हुए उन्हें महज 3 सप्ताह हुए हैं। उनके समय का बिल आना अभी बाकी है। यहां किसी प्रकार की बिजली चोरी का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने जुलाई, अगस्त और सितंबर में 332 केसों का निपटारा किया है। जो किसी भी राजस्व अदालत का सर्वाधिक आंकड़ा है। न्यायालय के अलावा मंडियों, नगरपालिकाएं, हुडा तथा आरकेएसडी कालेज के कार्यों को भी संभाल रही हैं। 24 घंटे जनता के लिए उनके कार्यालय के द्वार खुले हैं। उन्होंने आज भी वकीलों को बातचीत के लिए बुलाया था। वे जब चाहें उनसे बात कर सकते हैं।