फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Danger of flood looms again in Guhla area

Kaithal News: गुहला क्षेत्र में फिर से मंडरा रहा बाढ़ का खतरा

Thu, 04 Jul 2024 06:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 04 Jul 2024 06:09 AM IST
विज्ञापन
Danger of flood looms again in Guhla area
गुरमीत सीड़ा
विज्ञापन

गुहला-चीका/कैथल। गुहला क्षेत्र में गत वर्ष बाढ़ से हुई तबाही से गुहला प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है यही कारण है कि बाढ़ बचाव कार्यों के जो दिखावे किए जा रहे हैं, जमीनी हकीकत उसके बिल्कुल विपरीत है। इस वर्ष भी साइफनों की सफाई ढंग से न होने की वजह से बारिश तेज होने पर इलाके में फिर से बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। पिछले साल स्थानीय लोगों ने जो दुश्वारियां झेलीं थी, उनमें से आज भी कई लोग जूझ रहे हैं।

गौरतलब है कि प्रदेश की दो बड़ी बरसाती नदियों मारकंडा व घग्गर नदी गुहला के गांव सिंह के पास आकर आपस में मिलती हैं और आगे यह घग्गर नदी के रूप में बहती है। गुहला के गांव सरोला के पास घग्गर नदी के ऊपर से हांसी बुटाना नहर को गुजारा गया है। नहर को घग्गर के ऊपर से गुजारने के लिए एक बड़े साइफन का निर्माण किया गया है और घग्गर का पानी हांसी बुटाना नहर के नीचे से आसानी से गुजार सके इसके लिए 22 फीट ऊंचा पुल बनाया गया है। बारिश के समय घग्गर नदी में पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी व रेत इन साइफनों में जमा हो जाता है जिससे पानी का बहाव बाधित होता है और ऊपरी क्षेत्र में पानी तेजी से घग्गर नदी से बाहर निकलने लगता है।
विज्ञापन


पिछले साल भी साइफनों की पर्याप्त सफाई ना होने की वजह से घग्गर नदी के पानी की निकासी नहीं हो सकी थी। नतीजा, बारिश का पानी गांव ढंढोता, खराल आदी गांव की तरफ से तेजी घग्गर नदी से बाहर निकल आया और टो वॉल व हांसी बुटाना नहर को ध्वस्त करते हुए गुहला क्षेत्र के कई गांवों में फैल गया। इसी बाढ़ के चलते गुहला क्षेत्र में चार लोगों की जान चली गई थी व लगभग तीन दर्जन पशु मारे गए थे। हजारों एकड़ में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई थी। तमाम मकान, टयूबवेलों के साथ सड़कों को नुकसान हुआ था। इसका खामियाजा गुहला के लोग एक साल बाद भी भुगत रहे हैं। ऐसा लगता है कि नहरी विभाग ने पिछले साल बाढ़ से हुई तबाह से कोई सबक नहीं लिया और इस एक साल में घग्गर नदी के साइफनों की सफाई को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। अधिकारियों की इसी लापरवाही का गुहला को इस बार भी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन


साइफनों की सफाई का समय रहते नहीं होता काम शुरू



हांसी बुटाना नहर के साइफनों में बारिश के दिनों में इतनी बड़ी मात्रा में मिट्टी जमा होती है कि उसे पूरी तरह से खाली करने में तीन से चार माह का समय लग जाए। लेकिन नहरी विभाग के अधिकारी हर बार इस काम को बारिश से मात्र कुछ दिन पहले शुरू करते है जिसके चलते काम पूरा नहीं हो पाता और बंद साइफन हर बार बाढ़ का कारण बनते हैं।

अधिकारियों व ठेकेदार पर लगे मिट्टी बेचने के आरोप

साइफनों की सफाई के लिए लगे टेंडर के अनुसार साइफन के 20 ब्लॉकों की मिट्टी निकाली जानी थी। ठेकेदार ने दो-तीन मशीनों से काम किया जो अपर्याप्त बताया जाता है। किसान यूनियन के नेता लखविंद्र सिंह किंद्र, जरनैल सिंह जैली, केवल सिंह सदरेहड़ी आदि ने आरोप लगाया कि ठेकेदार पर मिलीभगत का आरोप लगाया। इस पर डीसी कैथल ने जांच कमेटी का गठन किया तो ठेकेदार अगले ही दिन काम बंद कर गया जबकि इन दिनों में एक भी ब्लाक से पूरी तरह से मिट्टी नहीं निकाली जा सकी थी।



ठेकेदार का केवल 20 ब्लाकों से मिट्टी निकालने का ठेका था जो वह पूरा कर गया है। मिट्टी बेचे जाने के आरोप निराधार है। सरोला साइफन से माइनिंग की तर्ज पर मिट्टी निकाले जाने की जरूरत है। अगली बार सरकार को सिफारिश की जाएगी कि सही में मिट्टी निकालने का टेंडर छोड़ा जाए। ऐसा करने से जहां साइफन की पूरी तरह से सफाई हो सकेगी। वहीं, सरकार को भी करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। -अजमेर सिंह, एसडीओ, नहरी विभाग, चीका
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed