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किसानों ने 20 से ज्यादा स्थानों पर लगाया जाम
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किसान संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने शुक्रवार को जिले में भारत बंद आंदोलन के तहत जिले में 20 से अधिक स्थानों पर जाम लगाकर रोष प्रकट किया। शहर में लोगों से अपील करते हुए बाजार बंद करवाए। मुख्य जाम तितरम मोड़ पर लगाया गया। जहां से हिसार-चंडीगढ़, जींद, पानीपत व कैथल शहर में आने-जाने वाले वाहन चालकों को परेशानी हुई। पूरे जिले में 800 से अधिक पुलिस कर्मचारियों ने स्थिति पर नजर रखी।
जाम का केंद्र शहर का तितरम मोड़ रहा, जहां 500 से ज्यादा महिलाएं और पुरुष जाम का हिस्सा बने। नेशनल व स्टेट हाइवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद रखी गई। किसानों ने ओवरब्रिज और उसके नीचे चारों तरफ ट्रैक्टर-ट्रालियां व अन्य वाहन खड़े कर दिए। इससे वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कैथल एसडीएम डॉ. संजय कुमार, डीएसपी कुलवंत सिंह व तितरम थाना प्रबंधक राजफूल सिंह ने मौके पर मौजूद रहकर किसानों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी। जाम के दौरान किसानों द्वारा केवल एंबुलेंस, शादी की गाड़ियों और किसी की मौत पर शोक प्रकट करने जा रहे लोगों को ही रास्ता दिया गया। इसके अलावा संगतपुरा में कैथल-खनौरी मार्ग, गुहला क्षेत्र में तारांवाली, खरकां, अगौंध, अजीमगढ़ में, गढ़ी में कैथल-खनौरी मार्ग, पबनावा में कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग, कलायत में संगम होटल के निकट कैथल-हिसार मार्ग पर जाम रहा। इसी प्रकार से राजौंद, पूंडरी, ढांड के कई क्षेत्रों में जाम लगाया गया।
तितरम मोड़ पर पहुंचे किसान नेताओं होशियार गिल प्यौदा, राजाराम माजरा, बिल्लू चंदाना, दर्शन चहल, मंजीत करोड़ा, महेंद्र सिंह, सुल्तान सिंह, राजबाला थुआ व अन्य ने कहा कि सरकार द्वारा कृषि कानून किसानों पर जबरदस्ती थोपे जा रहे हैं। जब तक कानून वापस नहीं होते और किसानों को एमएसपी की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक वे संघर्ष करते रहेंगे।
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पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने तितरम मोड़ पर किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे आंदोलन से सरकार चारों खाने चित नजर आ रही है। कभी चीन तो कभी पाकिस्तान का आंदोलन बताया जा रहा है। लेकिन इस आंदोलन ने पंजाब व हरियाणा के भाईचारे की मिसाल कायम की है। तीनों कृषि कानून किसानों के लिए घातक साबित होंगे। इस संघर्ष की जीत होगी।
मुख्य स्थानों पर मौजूद रहे पुलिस अधिकारी
किसानों द्वारा विभिन्न स्थानों पर लगाए गए जाम के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से 800 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। डीएसपी स्तर के अधिकारी मुख्य स्थानों पर पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर दो महिला पुलिस रिजर्व टीमें और पुरुषों की आठ रिजर्व टीमों को सुरक्षा के दृष्टिगत तैनात किया गया।
दिनभर चली लंगर सेवा
तितरम मोड़ पर गांव तितरम के किसानों और नीम साहिब गुरुद्वारा की ओर से लंगर लगाया गया। लंगर के दौरान सेवादारों ने दिनभर सेवा की। किसानों को खाने की जरूरी वस्तुएं और पेयजल व चाय मौके पर ही उपलब्ध करवाई गई। धरने में शामिल पुरुषों ने रागिनी तो महिलाओं ने हरियाणवी लोकगीतों का लुत्फ उठाया।
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जाम का केंद्र शहर का तितरम मोड़ रहा, जहां 500 से ज्यादा महिलाएं और पुरुष जाम का हिस्सा बने। नेशनल व स्टेट हाइवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद रखी गई। किसानों ने ओवरब्रिज और उसके नीचे चारों तरफ ट्रैक्टर-ट्रालियां व अन्य वाहन खड़े कर दिए। इससे वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कैथल एसडीएम डॉ. संजय कुमार, डीएसपी कुलवंत सिंह व तितरम थाना प्रबंधक राजफूल सिंह ने मौके पर मौजूद रहकर किसानों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी। जाम के दौरान किसानों द्वारा केवल एंबुलेंस, शादी की गाड़ियों और किसी की मौत पर शोक प्रकट करने जा रहे लोगों को ही रास्ता दिया गया। इसके अलावा संगतपुरा में कैथल-खनौरी मार्ग, गुहला क्षेत्र में तारांवाली, खरकां, अगौंध, अजीमगढ़ में, गढ़ी में कैथल-खनौरी मार्ग, पबनावा में कैथल-कुरुक्षेत्र मार्ग, कलायत में संगम होटल के निकट कैथल-हिसार मार्ग पर जाम रहा। इसी प्रकार से राजौंद, पूंडरी, ढांड के कई क्षेत्रों में जाम लगाया गया।
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तितरम मोड़ पर पहुंचे किसान नेताओं होशियार गिल प्यौदा, राजाराम माजरा, बिल्लू चंदाना, दर्शन चहल, मंजीत करोड़ा, महेंद्र सिंह, सुल्तान सिंह, राजबाला थुआ व अन्य ने कहा कि सरकार द्वारा कृषि कानून किसानों पर जबरदस्ती थोपे जा रहे हैं। जब तक कानून वापस नहीं होते और किसानों को एमएसपी की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक वे संघर्ष करते रहेंगे।
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पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने तितरम मोड़ पर किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे आंदोलन से सरकार चारों खाने चित नजर आ रही है। कभी चीन तो कभी पाकिस्तान का आंदोलन बताया जा रहा है। लेकिन इस आंदोलन ने पंजाब व हरियाणा के भाईचारे की मिसाल कायम की है। तीनों कृषि कानून किसानों के लिए घातक साबित होंगे। इस संघर्ष की जीत होगी।
मुख्य स्थानों पर मौजूद रहे पुलिस अधिकारी
किसानों द्वारा विभिन्न स्थानों पर लगाए गए जाम के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से 800 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। डीएसपी स्तर के अधिकारी मुख्य स्थानों पर पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर दो महिला पुलिस रिजर्व टीमें और पुरुषों की आठ रिजर्व टीमों को सुरक्षा के दृष्टिगत तैनात किया गया।
दिनभर चली लंगर सेवा
तितरम मोड़ पर गांव तितरम के किसानों और नीम साहिब गुरुद्वारा की ओर से लंगर लगाया गया। लंगर के दौरान सेवादारों ने दिनभर सेवा की। किसानों को खाने की जरूरी वस्तुएं और पेयजल व चाय मौके पर ही उपलब्ध करवाई गई। धरने में शामिल पुरुषों ने रागिनी तो महिलाओं ने हरियाणवी लोकगीतों का लुत्फ उठाया।