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रोडवेज विभाग में बसों को टोटा
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जोनी दक्ष
कैथल। हरियाणा रोडवेज में बसों का बेड़ा साल दर साल छोटा होता जा रहा है। जबकि यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले पांच सालों में कैथल डिपो में विभाग की ओर से नई बसों की बढ़ोतरी न के बराबर हुई है। इस साल 2021 में 22 बसें कंडम होने जा रही हैं। इससे यात्रियों व विभाग की परेशानी बढ़ने वाली है। मार्च माह में 8 बसें कंडम हो जाएंगी। पिछले साल 14 बसें कंडम हुई थीं। पांच सालों में डिपो में महज 17 बसें ही नई मिल पाई हैं। जिला की आबादी को देखते हुए डिपो में 200 बसों की स्वीकृति विभाग द्वारा दी गई, लेकिन डिपो में 127 बसें आन रूट हैं।
विभाग ने पिछले साल 15 व इस साल 8 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत रोडवेज बेड़े में शामिल की हैं। इसके बाद भी डिपो में बसों की कमी नजर आ रही है। यात्रियों को शाम के समय बसें न मिलने से मायूस होकर लौटना पड़ता है। जिले के रोजाना दस हजार यात्री अलग-अलग रूटों पर बसों में सफर तय करते हैं।
नई बस की आयु सीमा आठ वर्ष
नई बस जब रोडवेज बेड़े में शामिल होती है तो उसकी आयु सीमा व किलोमीटर तय होते हैं। नई बस की आयु सीमा आठ वर्ष होती है। इनको आठ वर्ष तक रूटों पर दौड़ाया जाता है और आठ लाख किलोमीटर तय करने होते हैं। जब बसों की आयु और किलोमीटर पूरे हो जाते हैं तो बसों को कंडम घोषित कर दिया जाता है।
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इस तरह से घटी बसों की संख्या
2015 में रोडवेज डिपो के पास 156 बसें थीं।
2016 में 13 बसें कंडम हुईं, 143 बसें बचीं।
2017 चार कंडम, 139 रहीं।
2018 में 10 कंडम बसें, 129 रहीं।
2019 में 8 बसें कंडम, 121 रहीं।
2020 में 14 बसे कंडम, 107 रहीं।
2021 में 22 बसें कंडम व 127 शेष रह जाएंगी।
पांच सालों में इस तरह से डिपो में शामिल हुई बसें
2015 कोई नहीं
2016 08 बसें
2017 कोई नहीं
2018 04 बसें
2019 कोई नहीं
2020 05 मिनी बसें
किलोमीटर स्कीम
2020 15 बसें
2021 08 बसें
58 बसें आयु पूरी कर चुकीं
जानकारी के अनुसार डिपो में 58 बसें अपनी आयु पूरी कर चुकी हैं। जिनमें 31 बसें नौ साल की आयु से ज्यादा चल रही हैं। वहीं 37 बसें आठ साल की आयु से ज्यादा आयु पूरी कर चुकी हैं।
डिपो में 467 चालक व परिचालक
वर्तमान समय में कैथल डिपो में 467 चालक व परिचालक हैं। इनमें 257 चालक व 210 परिचालक हैं। बसों की कमी के चलते अधिकतर चालकों को बस स्टैंड या फिर बस अड्डा के मुख्य द्वार सहित विभाग के अन्य कार्यों में लगाया जा रहा है।
लंबे रूटों पर भी बसों का नहीं हो पा रहा संचालन
कैथल से हरिद्वार, देहरादून, शिमला व जयपुर जैसे लंबे रूटों पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है। बसों की कमी के चलते लगभग दो साल से इन रूटों पर बस सेवा शुरू नहीं करवाई जा रही है। इसके लिए हेड ऑफिस पत्र भेजा जा चुका है। लेकिन स्थिति ज्यों कि त्यों है।
बसों की समस्या के बारे में विभाग को करवाया अवगत
जीएम अजय गर्ग ने बताया कि यात्रियों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए सरकार व विभाग को अवगत करवाया है, ताकि यात्रियों को असुविधा का सामना न करना पड़े। इसी सप्ताह हेड ऑफिस में अधिकारियों के साथ बैठक थी। बैठक के दौरान भी बसों की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर अधिकारियों के समक्ष पेश किया गया। विभाग की ओर से जल्द बसों का प्रपोजल बनाया जाएगा। उम्मीद है डिपो में जल्द नई बसें शामिल होंगी। लंबे समय से डिपो में विभाग द्वारा बसें नहीं भेजी गई। इस साल डिपो से 22 बसें कंडम होने जा रही हैं।
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कैथल। हरियाणा रोडवेज में बसों का बेड़ा साल दर साल छोटा होता जा रहा है। जबकि यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले पांच सालों में कैथल डिपो में विभाग की ओर से नई बसों की बढ़ोतरी न के बराबर हुई है। इस साल 2021 में 22 बसें कंडम होने जा रही हैं। इससे यात्रियों व विभाग की परेशानी बढ़ने वाली है। मार्च माह में 8 बसें कंडम हो जाएंगी। पिछले साल 14 बसें कंडम हुई थीं। पांच सालों में डिपो में महज 17 बसें ही नई मिल पाई हैं। जिला की आबादी को देखते हुए डिपो में 200 बसों की स्वीकृति विभाग द्वारा दी गई, लेकिन डिपो में 127 बसें आन रूट हैं।
विभाग ने पिछले साल 15 व इस साल 8 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत रोडवेज बेड़े में शामिल की हैं। इसके बाद भी डिपो में बसों की कमी नजर आ रही है। यात्रियों को शाम के समय बसें न मिलने से मायूस होकर लौटना पड़ता है। जिले के रोजाना दस हजार यात्री अलग-अलग रूटों पर बसों में सफर तय करते हैं।
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नई बस की आयु सीमा आठ वर्ष
नई बस जब रोडवेज बेड़े में शामिल होती है तो उसकी आयु सीमा व किलोमीटर तय होते हैं। नई बस की आयु सीमा आठ वर्ष होती है। इनको आठ वर्ष तक रूटों पर दौड़ाया जाता है और आठ लाख किलोमीटर तय करने होते हैं। जब बसों की आयु और किलोमीटर पूरे हो जाते हैं तो बसों को कंडम घोषित कर दिया जाता है।
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इस तरह से घटी बसों की संख्या
2015 में रोडवेज डिपो के पास 156 बसें थीं।
2016 में 13 बसें कंडम हुईं, 143 बसें बचीं।
2017 चार कंडम, 139 रहीं।
2018 में 10 कंडम बसें, 129 रहीं।
2019 में 8 बसें कंडम, 121 रहीं।
2020 में 14 बसे कंडम, 107 रहीं।
2021 में 22 बसें कंडम व 127 शेष रह जाएंगी।
पांच सालों में इस तरह से डिपो में शामिल हुई बसें
2015 कोई नहीं
2016 08 बसें
2017 कोई नहीं
2018 04 बसें
2019 कोई नहीं
2020 05 मिनी बसें
किलोमीटर स्कीम
2020 15 बसें
2021 08 बसें
58 बसें आयु पूरी कर चुकीं
जानकारी के अनुसार डिपो में 58 बसें अपनी आयु पूरी कर चुकी हैं। जिनमें 31 बसें नौ साल की आयु से ज्यादा चल रही हैं। वहीं 37 बसें आठ साल की आयु से ज्यादा आयु पूरी कर चुकी हैं।
डिपो में 467 चालक व परिचालक
वर्तमान समय में कैथल डिपो में 467 चालक व परिचालक हैं। इनमें 257 चालक व 210 परिचालक हैं। बसों की कमी के चलते अधिकतर चालकों को बस स्टैंड या फिर बस अड्डा के मुख्य द्वार सहित विभाग के अन्य कार्यों में लगाया जा रहा है।
लंबे रूटों पर भी बसों का नहीं हो पा रहा संचालन
कैथल से हरिद्वार, देहरादून, शिमला व जयपुर जैसे लंबे रूटों पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है। बसों की कमी के चलते लगभग दो साल से इन रूटों पर बस सेवा शुरू नहीं करवाई जा रही है। इसके लिए हेड ऑफिस पत्र भेजा जा चुका है। लेकिन स्थिति ज्यों कि त्यों है।
बसों की समस्या के बारे में विभाग को करवाया अवगत
जीएम अजय गर्ग ने बताया कि यात्रियों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए सरकार व विभाग को अवगत करवाया है, ताकि यात्रियों को असुविधा का सामना न करना पड़े। इसी सप्ताह हेड ऑफिस में अधिकारियों के साथ बैठक थी। बैठक के दौरान भी बसों की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर अधिकारियों के समक्ष पेश किया गया। विभाग की ओर से जल्द बसों का प्रपोजल बनाया जाएगा। उम्मीद है डिपो में जल्द नई बसें शामिल होंगी। लंबे समय से डिपो में विभाग द्वारा बसें नहीं भेजी गई। इस साल डिपो से 22 बसें कंडम होने जा रही हैं।