{"_id":"5d35efd58ebc3e6c9d3b4871","slug":"crowd-of-pilgrims-in-temples-on-the-occasion-of-saawan-kaithal-news-rtk506548026","type":"story","status":"publish","title_hn":"सावन महीने के पहले सोमवार को मंदिरों में जुटी श्रद्धालुओं की भारी भीड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सावन महीने के पहले सोमवार को मंदिरों में जुटी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
विज्ञापन
कैथल। जलाभिषेक..........सावन के पहले सोमवार पर सतलोक आश्रम स्थित महादेव शिव मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ?
- फोटो : Kaithal
सावन महीने के पहले सोमवार को जिले भर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सावन महीने की शिवरात्रि को लेकर शहर में सभी प्रमुख मंदिरों को भव्य ढंग से सजाया गया है। इसके साथ ही भगवान की आराधना करने वाले युवक भी कांवड़िये बन हरिद्वार पहुंचने लगे है जो 30 जुलाई को शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएंगे। सोमवार को भी श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के शिवलिंग पर पंचामृत से स्नान कराकर मन्नतें मांगी। मंदिरों में तड़के 5 पंजे से श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था।
सावन माह में विशेष उत्साह: श्रद्धालु श्याम सुंदर गौड़ ने कहा कि सावन महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना करने से श्रद्धालुओं की मन की कामना जल्द पूर्ण होती है। इस अवसर पर बेल पत्र, धतुुरा, दही, दूध और गंगाजल से शिवजी का अभिषेक किया जाता है। जो बेहद फलदायी है।
श्रद्धालु मीनाक्षी ने कहा कि सावन माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना से हर मनोकामना पूरी होती है। सोमवार को व्रत करने का भी महत्व है। उसने बताया कि सावन के महीने में वह और उसके पति विकास सावन महीने के सभी दिनों में व्रत करते हैं।
विज्ञापन
ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में पूजा की विशेष मान्यता: छोटी काशी के नाम से प्रसिद्घ जिले में महाभारत कालीन श्री ग्यारह रुद्री प्राचीन शिव मंदिर की विशेष महत्व है। यहां सावन माह में यहां विशेष पूजा-अर्चना करने के लिए भक्त पहुंचते हैं। महाभारत कालीन इस मंदिर में सावन माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना फलदायी माना गया है। अब सावन माह की शुरूआत होते ही मंदिर में भक्तों का पूजा-अर्चना करने के लिए आना-जाना शुरू हो गया है। मंदिर के पुजारी मुनिंद्र मिश्रा ने बताया कि सावन माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना फलदायी माना गया है।
महाभारत कालीन है मंदिर : सैनी
श्री ग्यारह रुद्री प्राचीन शिव मंदिर प्रधान माइलाल सैनी ने बताया कि सावन माह की तैयारियां काफी दिनों से की जा रही है। अब सावन माह शुरू हो गया है तो भक्तों की भीड़ भी आनी शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि यह मंदिर महाभारत कालीन है। बताया जाता है कि यहां भगवान श्री कृष्ण ने युद्घ में जाने से पूर्व पांडवों को पूजा-अर्चना करवाई थी और भगवान शिव ने अर्जुन को पाशुपत अस्त्र दिया था। भारत में यह इसके अलावा और कहीं ऐसा मंदिर स्थित नहीं है।
कलायत में भी मंदिरों में उमड़ी भीड़ : सावन महीने के पहले सोमवार को मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हर हर महादेव के जयघोष से नगर के सभी मंदिर गुंजायमान थे। अनेक स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। कही भगवान शिव का रुद्राभिषेक कहीं महारुद्राभिषेक तो कहीं हवन यज्ञ व भंडारों का आयोजन हुआ। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि सावन मास में भोले बाबा की पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि वैसे तो पूरे मास भोले बाबा के निमित्त अनुष्ठान चलते रहते हैं पर मास की प्रतिपदा व सोमवार को किया जाने वाला महारुद्राभिषेक विशेष फलदायी होता है। उन्होंने बताया कि महारुद्राभिषेक के बाद का जल पूरे घर में छिड़कने व आचमन करने से घर में धन धान्य की वृद्धि के साथ रोग दूर होते हैं।
विज्ञापन
सावन माह में विशेष उत्साह: श्रद्धालु श्याम सुंदर गौड़ ने कहा कि सावन महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना करने से श्रद्धालुओं की मन की कामना जल्द पूर्ण होती है। इस अवसर पर बेल पत्र, धतुुरा, दही, दूध और गंगाजल से शिवजी का अभिषेक किया जाता है। जो बेहद फलदायी है।
विज्ञापन
श्रद्धालु मीनाक्षी ने कहा कि सावन माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना से हर मनोकामना पूरी होती है। सोमवार को व्रत करने का भी महत्व है। उसने बताया कि सावन के महीने में वह और उसके पति विकास सावन महीने के सभी दिनों में व्रत करते हैं।
विज्ञापन
ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में पूजा की विशेष मान्यता: छोटी काशी के नाम से प्रसिद्घ जिले में महाभारत कालीन श्री ग्यारह रुद्री प्राचीन शिव मंदिर की विशेष महत्व है। यहां सावन माह में यहां विशेष पूजा-अर्चना करने के लिए भक्त पहुंचते हैं। महाभारत कालीन इस मंदिर में सावन माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना फलदायी माना गया है। अब सावन माह की शुरूआत होते ही मंदिर में भक्तों का पूजा-अर्चना करने के लिए आना-जाना शुरू हो गया है। मंदिर के पुजारी मुनिंद्र मिश्रा ने बताया कि सावन माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना फलदायी माना गया है।
महाभारत कालीन है मंदिर : सैनी
श्री ग्यारह रुद्री प्राचीन शिव मंदिर प्रधान माइलाल सैनी ने बताया कि सावन माह की तैयारियां काफी दिनों से की जा रही है। अब सावन माह शुरू हो गया है तो भक्तों की भीड़ भी आनी शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि यह मंदिर महाभारत कालीन है। बताया जाता है कि यहां भगवान श्री कृष्ण ने युद्घ में जाने से पूर्व पांडवों को पूजा-अर्चना करवाई थी और भगवान शिव ने अर्जुन को पाशुपत अस्त्र दिया था। भारत में यह इसके अलावा और कहीं ऐसा मंदिर स्थित नहीं है।
कलायत में भी मंदिरों में उमड़ी भीड़ : सावन महीने के पहले सोमवार को मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हर हर महादेव के जयघोष से नगर के सभी मंदिर गुंजायमान थे। अनेक स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। कही भगवान शिव का रुद्राभिषेक कहीं महारुद्राभिषेक तो कहीं हवन यज्ञ व भंडारों का आयोजन हुआ। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि सावन मास में भोले बाबा की पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि वैसे तो पूरे मास भोले बाबा के निमित्त अनुष्ठान चलते रहते हैं पर मास की प्रतिपदा व सोमवार को किया जाने वाला महारुद्राभिषेक विशेष फलदायी होता है। उन्होंने बताया कि महारुद्राभिषेक के बाद का जल पूरे घर में छिड़कने व आचमन करने से घर में धन धान्य की वृद्धि के साथ रोग दूर होते हैं।