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Kaithal News: गुरु पूर्णिमा पर कपिल तीर्थ पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
Mon, 22 Jul 2024 07:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 22 Jul 2024 07:09 AM IST
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कलायत। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कलायत स्थित श्री कपिल मुनि तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा से कपिल तीर्थ में डुबकी लगा कर अपने आराध्य की पूजा की। मंदिर परिसर में ही पुजारी अनिरुद्ध गौतम की ओर से पूर्णिमा की कथा सुनाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि वैसे तो सभी पूर्णिमा पर तीर्थ स्नान का बड़ा महत्व है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष को पड़ने वाली गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व समझा जाता है।
उन्होंने कहा कि सभी आध्यात्मिक और शैक्षणिक गुरुओं को समर्पित एक परंपरा है। इसे व्यास पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह वेद व्यास के जन्मदिन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि गुरु का स्थान सर्वश्रेष्ठ होता है। गुरु भगवान से भी ऊपर होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो गुरु ही होता है जो व्यक्ति को अज्ञानता के अंधकार से उबारकर सही रास्ता दिखाता है। पूर्णिमा पर उमड़े श्रद्धालुओं की आस्था पर तीर्थ का गंदा जल भारी पड़ा।
श्रद्धालुओं ने इस बात पर आपत्ति जताई की आषाढ़ पूर्णिमा पर तो दूर दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान और पूजा के लिए पहुंचते हैं। तीर्थ में पर्याप्त जल ही नहीं और जो थोड़ा बहुुत है वह भी गंदा ही है। रामदेई, संतोष, सुनीता, पुष्पा, राजेंद्र कुमार, भवानी आदी श्रद्धालुओं का कहना था कि हर पूर्णिमा पर कपिल तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। केडीबी और तीर्थ प्रबंधकों को आने वाले श्रद्धालुओं की भावना और आस्था को ध्यान में रखते हुए सरोवर में पर्याप्त व शुद्ध जल की तो व्यवस्था रखना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि सभी आध्यात्मिक और शैक्षणिक गुरुओं को समर्पित एक परंपरा है। इसे व्यास पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह वेद व्यास के जन्मदिन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि गुरु का स्थान सर्वश्रेष्ठ होता है। गुरु भगवान से भी ऊपर होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो गुरु ही होता है जो व्यक्ति को अज्ञानता के अंधकार से उबारकर सही रास्ता दिखाता है। पूर्णिमा पर उमड़े श्रद्धालुओं की आस्था पर तीर्थ का गंदा जल भारी पड़ा।
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श्रद्धालुओं ने इस बात पर आपत्ति जताई की आषाढ़ पूर्णिमा पर तो दूर दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान और पूजा के लिए पहुंचते हैं। तीर्थ में पर्याप्त जल ही नहीं और जो थोड़ा बहुुत है वह भी गंदा ही है। रामदेई, संतोष, सुनीता, पुष्पा, राजेंद्र कुमार, भवानी आदी श्रद्धालुओं का कहना था कि हर पूर्णिमा पर कपिल तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। केडीबी और तीर्थ प्रबंधकों को आने वाले श्रद्धालुओं की भावना और आस्था को ध्यान में रखते हुए सरोवर में पर्याप्त व शुद्ध जल की तो व्यवस्था रखना चाहिए।
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