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एमबीबीएस में एडमीशन करवाने का झांसा देकर 7 लाख रुपये की ठगी के आरोपी दो काबू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jan 2020 02:18 AM IST
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पुलिस ने एमबीबीएस में दाखिला दिलवाने के नाम पर सात लाख रुपये की ठगी के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों से 13 हजार रुपये की नकदी बरामद की है। पुलिस ने आरोपी अविनाश को न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि आरोपी अरुण का शेष नकदी की बरामदगी के लिए न्यायालय से एक दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया है।
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कलायत मंडी निवासी विश्वास ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसने वर्ष 2012-13 में मेडिकल साइंस से बारहवीं की परीक्षा के बाद पीएमटी की परीक्षा दी थी। अंक कम आने पर उसने अगले वर्ष फिर परीक्षा दी। इसके बाद उसके पिता के पास नई दिल्ली में साउथ एक्सटेंशन पार्क शेफाली एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कार्यालय चलाने वाले अरुण कुमार का फोन आया कि वह उसका एमबीबीएस में दाखिला करवा देगा। इसके लिए उसने 25 लाख रुपये का बजट बताया। उसने मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में काम करवाने का आश्वासन देकर कई बार उससे करीब 7 लाख रुपये ऐंठ लिए। बाद में आरोपी के बुलाने पर वह 30 अप्रैल 2016 को परिजनों के साथ दिल्ली पहुंचा। यहां पर आरोपियों ने विश्वास व उसके परिजनों को एक होटल में रुकवाकर उनसे 25 लाख रुपये का ब्लैंक चैक और असल दस्तावेज लेे लिए। एक मई को स्टूडेंट ने अपने पिता को फोन करके बताया कि जिस पेपर की आरोपी तैयारी करवा रहे थे, असल में वह पेपर वर्ष 2012 का पुराना पेपर है और उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद जब उन्होंने आरोपियों से संपर्क किया तो वे पैसे वापस करने का आश्वासन देने लगे और बाद में अपने ठिकानों से लापता हो गए।
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वहीं शिकायत मिलने के बाद थाना प्रबंधक कलायत सबइंस्पेक्टर बिलाशा राम की अगुवाई में एसआई रघुबीर सिंह की टीम ने अरुण कुमार रॉय निवासी वैशाली थुकरिया टोला जिला वैशाली बिहार और अविनाश नायक निवासी माधुपटना कटक जिला कटक उड़ीसा को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी इस मामले में 2 नवंबर 2019 को न्यायालय द्वारा उद्घोषित अपराधी करार दिए जा चुके हैं। ये आरोपी दिल्ली में कार्यालय खोलकर जालसाजी का गोरखधंधा करते हुए विद्यार्थियों से नकदी ऐंठ रहे थे। जांच के दौरान एसआई रघबीर सिंह ने आरोपी अरुण के कब्जे से 8 हजार रुपये और अविनाश के कब्जे से 5 हजार रुपये नकदी बरामद की है। मुख्य आरोपी अरुण ने कुबूला कि शेष नकदी वह अपने संतनगर दिल्ली स्थित ठिकाने से बरामद करवा सकता है।
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दूसरे आरोपी अविनाश ने पूछताछ के दौरान कुबूल किया कि वह 2014 में युक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया था, जहां से करीब 8/9 माह बाद पैसे की तंगी कारण वापस भारत आ गया, जिसकी 2015 में अरुण के साथ मुलाकात हुई। जो 15 हजार रुपये प्रतिमाह सैलरी और शिकार से मिलने वाली राशी से कमीशन देने की एवज में उसके साथ काम करने लगा। वह अरुण कुमार की कंपनी ज्ञान फाउंडेशन के नाम से इंटरनेट व अखबार के माध्यम से विदेश में एमबीबीएस करवाने के लिए प्रकाशन करवाता था। उसे कमीशन के तौर पर 50 हजार रुपए मिले थे, जिनमें से वह 45 हजार रुपये खर्च कर चुका है, जबकि 5 हजार रुपये पुलिस द्वारा बरामद कर लिए गये है।
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