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Kaithal News: अदालत ने आढ़ती फर्म के पक्ष में सुनाया फैसला, 11.68 लाख रुपये चुकाने के आदेश
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कैथल। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालत ने अनाज मंडी ढांड की एक आढ़ती फर्म के पक्ष में फैसला सुनाया है। मृतक किसान रघबीर सिंह के वारिसों को 11,68,272 रुपये का बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है। अदालत में चले मामले के अनुसार रघबीर सिंह कई वर्षों से संबंधित फर्म के ग्राहक थे। फसलों की बिक्री के अलावा उन्होंने समय-समय पर अग्रिम राशि भी प्राप्त की थी। वर्ष 2013-14 से 2017-18 के दौरान खाते में बकाया बढ़कर 11.68 लाख रुपये हो गया।
रघबीर सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी और दोनों बेटियों को कानूनी नोटिस भेजकर भुगतान की मांग की गई लेकिन राशि जमा नहीं कराई गई। इसके बाद फर्म ने वर्ष 2017 में दीवानी वसूली का मुकदमा दायर किया। सुनवाई के दौरान मुकद्दमा दायर करने वाले पक्ष की ओर से खाता-बही, जे-फॉर्म, आयकर रिटर्न, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज अदालत में पेश किए। जबकि मृतक किसान के पक्ष की तरफ से खातों को फर्जी बताते हुए दावा खारिज करने की मांग की और मनी लेंडिंग लाइसेंस नहीं होने का तर्क दिया। अदालत ने पाया कि फर्म के रिकॉर्ड नियमित कारोबारी अभिलेख हैं और उपलब्ध साक्ष्य उनके समर्थन में हैं, जबकि किसान पक्ष अपने दावों के पक्ष में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।
18 प्रतिशत की मांग खारिज, नौ प्रतिशत ब्याज मंजूर
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि फर्म बकाया राशि की वसूली की हकदार है। हालांकि 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की मांग स्वीकार नहीं की गई और इसे घटाकर नौ प्रतिशत कर दिया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह राशि मृतक रघबीर सिंह की संपत्ति के उत्तराधिकार में प्राप्त हिस्से की सीमा तक उनके कानूनी वारिसों से संयुक्त रूप से वसूल की जाएगी।
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रघबीर सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी और दोनों बेटियों को कानूनी नोटिस भेजकर भुगतान की मांग की गई लेकिन राशि जमा नहीं कराई गई। इसके बाद फर्म ने वर्ष 2017 में दीवानी वसूली का मुकदमा दायर किया। सुनवाई के दौरान मुकद्दमा दायर करने वाले पक्ष की ओर से खाता-बही, जे-फॉर्म, आयकर रिटर्न, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज अदालत में पेश किए। जबकि मृतक किसान के पक्ष की तरफ से खातों को फर्जी बताते हुए दावा खारिज करने की मांग की और मनी लेंडिंग लाइसेंस नहीं होने का तर्क दिया। अदालत ने पाया कि फर्म के रिकॉर्ड नियमित कारोबारी अभिलेख हैं और उपलब्ध साक्ष्य उनके समर्थन में हैं, जबकि किसान पक्ष अपने दावों के पक्ष में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।
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18 प्रतिशत की मांग खारिज, नौ प्रतिशत ब्याज मंजूर
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि फर्म बकाया राशि की वसूली की हकदार है। हालांकि 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की मांग स्वीकार नहीं की गई और इसे घटाकर नौ प्रतिशत कर दिया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह राशि मृतक रघबीर सिंह की संपत्ति के उत्तराधिकार में प्राप्त हिस्से की सीमा तक उनके कानूनी वारिसों से संयुक्त रूप से वसूल की जाएगी।
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