{"_id":"5d780b4e8ebc3e013b28475e","slug":"corrupation-kaithal-news-knl4718813","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक्सईएन के डोंगल से लगा दिए गए नगर परिषद के 10 करोड़ से अधिक के टेंडर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक्सईएन के डोंगल से लगा दिए गए नगर परिषद के 10 करोड़ से अधिक के टेंडर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर परिषद कैथल में 10 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य नियमों की स्पष्टता न होने के कारण लटक गए हैं। लगभग 12 वार्डों के 94 विकास कार्यों के लिए एक्सईएन के डोंगल से टेंडर लगा दिए गए। जब पता चला कि एक्सईएन के डोंगल से टेंडर लगा ही नहीं सकते तो इन टेंडरों को खोला ही नहीं गया। मामला उलझता देख कर टेंडरों को खोलने के लिए डीसी से मार्गदर्शन मांग लिया।
डीसी ने भी विभाग मुख्यालय को फाइल भेजकर मार्गदर्शन मांग लिया है। कुछ लोगों ने डीसी को शिकायत दी थी कि एक्सईएन के डोंगल से टेंडर लग ही नहीं सकते और संभावनाएं ये भी जताई जा रही हैं कि इन सभी में टेंडर ठेकेदारों ने आपसी मिलीभगत करके पूल बनाते हुए सरकारी रेटों से ऊंची दरों पर भरे हुए हैं। जिसका खुलासा टेंडर खुलने पर ही हो पाएगा।
नगर परिषद सूत्रों ने बताया कि पिछले महीने 12 से अधिक वार्डों के लिए 10 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के लिए टेंडर लगा दिए गए। परिषद के एमई ने अज्ञात कारणों के चलते इन टेंडरों को लगाने से हाथ खड़े कर दिए तो नगर परिषद के एक्सईएन ने ये टेेंडर लगा दिए। इसी बीच मामले की सूचना कुछ लोगों को मिल गई और डीसी तक यह शिकायत पहुंचा दी गई कि इन टेंडरों को एक्सईएन के डोंगल से लगाया गया है। जिनमें कोई न कोई गड़बड़ी हो सकती है। टेंडर खोलने के लिए पहले 2 और फिर 5 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई, लेकिन टेंडर नहीं खोले गए। मामला डीसी तक पहुंचा तो परिषद के अधिकारियों को भी अपनी गलती का एहसास हुआ। इसके बाद टेंडर खोलने की बजाए डीसी कार्यालय में भेजकर मार्गदर्शन मांग लिया गया।
विज्ञापन
डीसी डॉ. प्रियंका सोनी ने पूरे मामले की अपने स्तर पर भी जानकारी हासिल की और सोमवार को इन टेंडरों की फाइल को विभाग मुख्यालय में भेज दिया गया। परिषद सूत्रों ने बताया कि इन टेंडरों में सरकारी रेटों से ऊंची दरों पर टेंडर लगाए गए हैं। डीसी को 25 प्रतिशत तक ऊंची दरों पर टेंडर लगाने की अनुमति है, लेकिन डीसी ने भी विवाद में न पड़ कर सभी टेंडरों के लिए विभाग मुख्यालय भेजकर मार्गदर्शन मांग लिया है। इस तरह से करीब 12 वार्डों में होने वाले ये विकास कार्य अब लटक सकते हैं, क्योंकि शीघ्र ही चुनाव आचार संहिता लगने वाली है और आचार संहिता लग जाने के बाद टेंडर नहीं खुल सकते।
पार्षद प्रतिनिधि धर्मबीर भोला व पार्षद राकेश सरदाना ने भी इस मामले की डीसी को शिकायत दी थी। उन्होंने कहा कि एक्सईएन के डोंगल से टेंडर लग ही नहीं सकते। गड़बड़ी की आशंका के चलते यह शिकायत की गई थी।
एक्सईएन सुरेंद्र कुमार ने कहा कि जब एक्ट बना था, उस समय एक्सईएन का पद नहीं था। ऑनलाइन टेंडर किसी एक अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर से नहीं लग सकते। अब जब एक्सईएन का पद स्वीकृत हो गया तो तकनीकी हेड होने के चलते उनके पास भी पॉवर हैं, लेकिन एक्ट में केवल एमई द्वारा टेंडर लगाए जाने की बात कही गई है। विभाग ने वर्ष 2013 में एमई, सचिव, ईओ एक्सईएन सभी के डिजिटल हस्ताक्षर बनवाए थे। इन टेंडरों को लगाने के बाद नियमों की अस्पष्टता के कारण डीसी से मार्गदर्शन मांगा गया है। साथ ही विभाग से भी मार्गदर्शन मांगा गया है कि एक्सईएन टेंडर लगा सकते हैं या नहीं। इसी कारण ये टेंडर खुल नहीं पाए हैं।
डीसी डॉ. प्रियंका सोनी का कहना है कि विभाग के मुख्यालय में फाइल भेज दी गई है। जैसे ही वहां से आदेश आएंगे आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
डीसी ने भी विभाग मुख्यालय को फाइल भेजकर मार्गदर्शन मांग लिया है। कुछ लोगों ने डीसी को शिकायत दी थी कि एक्सईएन के डोंगल से टेंडर लग ही नहीं सकते और संभावनाएं ये भी जताई जा रही हैं कि इन सभी में टेंडर ठेकेदारों ने आपसी मिलीभगत करके पूल बनाते हुए सरकारी रेटों से ऊंची दरों पर भरे हुए हैं। जिसका खुलासा टेंडर खुलने पर ही हो पाएगा।
विज्ञापन
नगर परिषद सूत्रों ने बताया कि पिछले महीने 12 से अधिक वार्डों के लिए 10 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के लिए टेंडर लगा दिए गए। परिषद के एमई ने अज्ञात कारणों के चलते इन टेंडरों को लगाने से हाथ खड़े कर दिए तो नगर परिषद के एक्सईएन ने ये टेेंडर लगा दिए। इसी बीच मामले की सूचना कुछ लोगों को मिल गई और डीसी तक यह शिकायत पहुंचा दी गई कि इन टेंडरों को एक्सईएन के डोंगल से लगाया गया है। जिनमें कोई न कोई गड़बड़ी हो सकती है। टेंडर खोलने के लिए पहले 2 और फिर 5 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई, लेकिन टेंडर नहीं खोले गए। मामला डीसी तक पहुंचा तो परिषद के अधिकारियों को भी अपनी गलती का एहसास हुआ। इसके बाद टेंडर खोलने की बजाए डीसी कार्यालय में भेजकर मार्गदर्शन मांग लिया गया।
विज्ञापन
डीसी डॉ. प्रियंका सोनी ने पूरे मामले की अपने स्तर पर भी जानकारी हासिल की और सोमवार को इन टेंडरों की फाइल को विभाग मुख्यालय में भेज दिया गया। परिषद सूत्रों ने बताया कि इन टेंडरों में सरकारी रेटों से ऊंची दरों पर टेंडर लगाए गए हैं। डीसी को 25 प्रतिशत तक ऊंची दरों पर टेंडर लगाने की अनुमति है, लेकिन डीसी ने भी विवाद में न पड़ कर सभी टेंडरों के लिए विभाग मुख्यालय भेजकर मार्गदर्शन मांग लिया है। इस तरह से करीब 12 वार्डों में होने वाले ये विकास कार्य अब लटक सकते हैं, क्योंकि शीघ्र ही चुनाव आचार संहिता लगने वाली है और आचार संहिता लग जाने के बाद टेंडर नहीं खुल सकते।
पार्षद प्रतिनिधि धर्मबीर भोला व पार्षद राकेश सरदाना ने भी इस मामले की डीसी को शिकायत दी थी। उन्होंने कहा कि एक्सईएन के डोंगल से टेंडर लग ही नहीं सकते। गड़बड़ी की आशंका के चलते यह शिकायत की गई थी।
एक्सईएन सुरेंद्र कुमार ने कहा कि जब एक्ट बना था, उस समय एक्सईएन का पद नहीं था। ऑनलाइन टेंडर किसी एक अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर से नहीं लग सकते। अब जब एक्सईएन का पद स्वीकृत हो गया तो तकनीकी हेड होने के चलते उनके पास भी पॉवर हैं, लेकिन एक्ट में केवल एमई द्वारा टेंडर लगाए जाने की बात कही गई है। विभाग ने वर्ष 2013 में एमई, सचिव, ईओ एक्सईएन सभी के डिजिटल हस्ताक्षर बनवाए थे। इन टेंडरों को लगाने के बाद नियमों की अस्पष्टता के कारण डीसी से मार्गदर्शन मांगा गया है। साथ ही विभाग से भी मार्गदर्शन मांगा गया है कि एक्सईएन टेंडर लगा सकते हैं या नहीं। इसी कारण ये टेंडर खुल नहीं पाए हैं।
डीसी डॉ. प्रियंका सोनी का कहना है कि विभाग के मुख्यालय में फाइल भेज दी गई है। जैसे ही वहां से आदेश आएंगे आगे की कार्रवाई की जाएगी।