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जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए कराना होगा कोरोना टेस्ट
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जिला नागरिक अस्पताल में सामान्य से लेकर गंभीर बीमारियों तक की ओपीडी से पहले मरीजों के लिए कोविड टेस्ट करवाना अनिवार्य किया गया है। ऐसे में जांच और इलाज के लिए आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पांच रुपये की पर्ची कटवाते ही उस पर सबसे पहले लिखा जाता है कि कोविड टेस्ट करवाएं। पर्ची काटने वाले कर्मचारी मरीज से ये तक नहीं पूछते कि उसका पहले से कोरोना टेस्ट हुआ है या नहीं, सीधा कोविड टेस्ट लिखकर दे देते हैं।
नागरिक अस्पताल में रोजाना 700 से लेकर 800 तक विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीज जांच व इलाज के लिए अस्पताल में आते हैं। कुछेक तो कोविड टेस्ट से बचने के लिए बिना जांच या इलाज के ही वापस चले जाते हैं। वहां से पर्ची लेकर जैसे ही मरीज ओपीडी के लिए जाते हैं तो सबसे पहले डॉक्टर भी उन्हें टेस्ट करवाने के लिए संबंधित कक्ष में भेज देते हैं। ऐसे में मरीजों को पहले कोविड टेस्ट के लिए इंतजार करना पड़ता है और बाद में उस बीमारी की जांच करवानी पड़ती है, जिसके लिए वह अस्पताल में आया है। इनमें कई मरीज तो ऐसे भी होते हैं, जो पहले से कोविड टेस्ट करवा चुके हैंह, लेकिन अशिक्षित होने के कारण और जानकारी के अभाव में दोबारा फिर सेंपल देने के लिए पहुंच जाते हैं। कभी एक तो कभी दूसरे कमरे के चक्कर लगाते हैं, जिससे उनका काफी समय अस्पताल में ही लग जाता है। अस्पताल पहुंचे मरीजों ने बताया कि अगर व्यक्ति कोविड पॉजिटिव मिल जाए तो समस्या और भी ज्यादा हो जाती है। ऐसे में विभाग द्वारा कोरोना के इलाज को तो प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन जिस बीमारी का इलाज करवाने वे अस्पताल में आते हैं, उसे थोड़ी बहुत दवाइयां देकर बाद में इलाज के लिए कहा जाता है। यही हालात कोरोना की रिपोर्ट मिलने तक रहते हैं। अगर रिपोर्ट दो दिन में आए तो मरीज को उस समय तक दवाइयों के सहारे ही काम चलाना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में आते तो हैं सुविधा के लिए, लेकिन टेस्ट दुविधा में डाल रहा है।
हालांकि अस्पताल में पहुंचने वाले किसी गंभीर बीमार या दुर्घटना का शिकार हुए व्यक्ति को तुरंत प्रभाव से दाखिल तो किया जा रहा है, लेकिन कोविड टेस्ट उसका भी करवाया जा रहा है। इलाज के साथ-साथ टेस्ट लेने वाले कर्मचारी व्यक्ति के सैंपल लेकर जाते हैं। जैसी भी रिपोर्ट आती है, उसके बारे में मरीज को बताकर रिपोर्ट
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पथरी से संबंधित इलाज करवाने राजपुरा पंजाब से नागरिक अस्पताल में पहुंची सुखविंद्र कौर ने बताया कि उसने पथरी का ऑपरेशन करवाया था, लेकिन उसके बाद से पेट में काफी दर्द रहता है। इसके इलाज के लिए वह कैथल आई है। अब उसे पर्ची पर कोरोना टेस्ट करवाने के लिए लिखकर दिया गया है। वह तो संबंधित दस्तावेज भी पूरे नहीं लेकर आई है। टेस्ट नहीं लिखते तो आज ही इलाज हो जाता, लेकिन अब फिर कभी आना पड़ेगा।
गांव चंदाना से अपनी गर्भवती पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल में पहुंचे विजय कुमार ने बताया कि उसे उसकी पत्नी का अल्ट्रासाउंड करवाना है। यहां से डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर भेजा तो वहां कोरोना रिपोर्ट मांगी गई। यहां आकर टेस्ट करवाया तो दो दिन में रिपोर्ट आने की बात कही गई। डॉक्टर द्वारा लिखा गया समय आज खत्म हो जाएगा। अल्ट्रासाउंड वाले कहते हैं कि बाद में फ्री अल्ट्रासाउंड नहीं होगा। इसके लिए उसे एक हजार रुपये लगाने पड़ेंगे।
गांव ड्योडखेड़ी से अस्पताल में पहुंची रेशमा देवी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उसके सिर में एलर्जी की दिक्कत है। सिर पर खारिश ज्यादा हो रही है। वह आई तो है इस बीमारी के इलाज के लिए, लेकिन यहां कर्मचारियों ने कोविड टेस्ट लिख दिया है। अब वह असमंजस में है कि अपना इलाज सरकारी अस्पताल से करवाए या फिर किसी प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए जाए।
जिला वासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही करवाया जा रहा है कोरोना टेस्ट
सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि जिला वासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही कोरोना टेस्ट करवाया जा रहा है। अगर फिर भी किसी मरीज को दिक्कत आती है तो उन्हें बता सकते हैं। प्राथमिकता के आधार पर मरीजों की समस्या का समाधान करवाया जाएगा। कर्मचारियों को भी सख्ती से कहा जाएगा कि वे पर्ची काटते समय पहले पूछ लें कि संबंधित व्यक्ति ने कोरोना टेस्ट पहले करवा रखा है या नहीं।
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नागरिक अस्पताल में रोजाना 700 से लेकर 800 तक विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीज जांच व इलाज के लिए अस्पताल में आते हैं। कुछेक तो कोविड टेस्ट से बचने के लिए बिना जांच या इलाज के ही वापस चले जाते हैं। वहां से पर्ची लेकर जैसे ही मरीज ओपीडी के लिए जाते हैं तो सबसे पहले डॉक्टर भी उन्हें टेस्ट करवाने के लिए संबंधित कक्ष में भेज देते हैं। ऐसे में मरीजों को पहले कोविड टेस्ट के लिए इंतजार करना पड़ता है और बाद में उस बीमारी की जांच करवानी पड़ती है, जिसके लिए वह अस्पताल में आया है। इनमें कई मरीज तो ऐसे भी होते हैं, जो पहले से कोविड टेस्ट करवा चुके हैंह, लेकिन अशिक्षित होने के कारण और जानकारी के अभाव में दोबारा फिर सेंपल देने के लिए पहुंच जाते हैं। कभी एक तो कभी दूसरे कमरे के चक्कर लगाते हैं, जिससे उनका काफी समय अस्पताल में ही लग जाता है। अस्पताल पहुंचे मरीजों ने बताया कि अगर व्यक्ति कोविड पॉजिटिव मिल जाए तो समस्या और भी ज्यादा हो जाती है। ऐसे में विभाग द्वारा कोरोना के इलाज को तो प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन जिस बीमारी का इलाज करवाने वे अस्पताल में आते हैं, उसे थोड़ी बहुत दवाइयां देकर बाद में इलाज के लिए कहा जाता है। यही हालात कोरोना की रिपोर्ट मिलने तक रहते हैं। अगर रिपोर्ट दो दिन में आए तो मरीज को उस समय तक दवाइयों के सहारे ही काम चलाना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में आते तो हैं सुविधा के लिए, लेकिन टेस्ट दुविधा में डाल रहा है।
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हालांकि अस्पताल में पहुंचने वाले किसी गंभीर बीमार या दुर्घटना का शिकार हुए व्यक्ति को तुरंत प्रभाव से दाखिल तो किया जा रहा है, लेकिन कोविड टेस्ट उसका भी करवाया जा रहा है। इलाज के साथ-साथ टेस्ट लेने वाले कर्मचारी व्यक्ति के सैंपल लेकर जाते हैं। जैसी भी रिपोर्ट आती है, उसके बारे में मरीज को बताकर रिपोर्ट
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पथरी से संबंधित इलाज करवाने राजपुरा पंजाब से नागरिक अस्पताल में पहुंची सुखविंद्र कौर ने बताया कि उसने पथरी का ऑपरेशन करवाया था, लेकिन उसके बाद से पेट में काफी दर्द रहता है। इसके इलाज के लिए वह कैथल आई है। अब उसे पर्ची पर कोरोना टेस्ट करवाने के लिए लिखकर दिया गया है। वह तो संबंधित दस्तावेज भी पूरे नहीं लेकर आई है। टेस्ट नहीं लिखते तो आज ही इलाज हो जाता, लेकिन अब फिर कभी आना पड़ेगा।
गांव चंदाना से अपनी गर्भवती पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल में पहुंचे विजय कुमार ने बताया कि उसे उसकी पत्नी का अल्ट्रासाउंड करवाना है। यहां से डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर भेजा तो वहां कोरोना रिपोर्ट मांगी गई। यहां आकर टेस्ट करवाया तो दो दिन में रिपोर्ट आने की बात कही गई। डॉक्टर द्वारा लिखा गया समय आज खत्म हो जाएगा। अल्ट्रासाउंड वाले कहते हैं कि बाद में फ्री अल्ट्रासाउंड नहीं होगा। इसके लिए उसे एक हजार रुपये लगाने पड़ेंगे।
गांव ड्योडखेड़ी से अस्पताल में पहुंची रेशमा देवी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उसके सिर में एलर्जी की दिक्कत है। सिर पर खारिश ज्यादा हो रही है। वह आई तो है इस बीमारी के इलाज के लिए, लेकिन यहां कर्मचारियों ने कोविड टेस्ट लिख दिया है। अब वह असमंजस में है कि अपना इलाज सरकारी अस्पताल से करवाए या फिर किसी प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए जाए।
जिला वासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही करवाया जा रहा है कोरोना टेस्ट
सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि जिला वासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही कोरोना टेस्ट करवाया जा रहा है। अगर फिर भी किसी मरीज को दिक्कत आती है तो उन्हें बता सकते हैं। प्राथमिकता के आधार पर मरीजों की समस्या का समाधान करवाया जाएगा। कर्मचारियों को भी सख्ती से कहा जाएगा कि वे पर्ची काटते समय पहले पूछ लें कि संबंधित व्यक्ति ने कोरोना टेस्ट पहले करवा रखा है या नहीं।