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Kaithal News: ठेकेदारों ने गेहूं उठान की नई शर्त पर जताया विरोध
Fri, 21 Mar 2025 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 21 Mar 2025 01:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। अनाज मंडियों में गेहूं उठान करने वाले ट्रांसपोर्ट के ठेकेदारों ने इस बार गेहूं उठान की लागू की गई शर्त पर विरोध किया है। ऐसे कोई भी ठेकेदार उठान का निविदा सूचना भरने के लिए आगे नहीं आ रहा है।
गौरतलब है कि प्रदेश में गेहूं खरीद एक अप्रैल से शुरू होनी है। सभी ठेकेदारों को टेंडर लेने के लिए 24 मार्च से पहले का समय दिया गया है, लेकिन अभी तक किसी भी ठेकेदार ने टेंडर नहीं भरा है।ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रामपाल राविश ने बताया कि इसका सबसे बड़ा कारण सरकार की ओर से लिफ्टिंग के लिए दिए जाने वाले समय में कटौती और समय पर लिफ्टिंग न होने पर जुर्माना राशि में बढ़ोतरी है।
रामपाल ने बताया कि पहले सरकार ने लिफ्टिंग के लिए ठेकेदारों को 72 घंटे का समय दिया था। ऐसे में अगर लिफ्टिंग नहीं होती तो सिर्फ 500 रुपये जुर्माना देना पड़ता था। अब इसे बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया है। सिर्फ 48 घंटे का समय दिया गया, जिसमें उठान संभव नहीं है।
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उल्लेखनीय है कि कैथल में करीब 20 ट्रांसपोर्ट ठेकेदार हैं। किसी ने भी टेंडर नहीं लिया है। यदि समय और जुर्माना राशि को ठीक नहीं किया गया तो कैथल से ही करोड़ों रुपये जुर्माना के तौर पर उन्हें देने पड़ेंगे।
जिस तरह से ट्रांसपोर्टरों ने उठान का विरोध किया है, उससे मंडी में टनों में गेहूं जमा हो जाएगा। किसानों को अपनी फसल रखने के लिए मंडी में जगह नहीं मिलेगी। ऐसे में मंडी में जाम की स्थिति बन सकती है। नाराज ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से जल्द ही उनकी मांगों पर विचार करने की मांग की है।
दूसरी ओर इस मामले में डीएफएससी निशांत राठी ने बताया कि इस संबंध में सरकार को अवगत करा दिया गया है।
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कैथल। अनाज मंडियों में गेहूं उठान करने वाले ट्रांसपोर्ट के ठेकेदारों ने इस बार गेहूं उठान की लागू की गई शर्त पर विरोध किया है। ऐसे कोई भी ठेकेदार उठान का निविदा सूचना भरने के लिए आगे नहीं आ रहा है।
गौरतलब है कि प्रदेश में गेहूं खरीद एक अप्रैल से शुरू होनी है। सभी ठेकेदारों को टेंडर लेने के लिए 24 मार्च से पहले का समय दिया गया है, लेकिन अभी तक किसी भी ठेकेदार ने टेंडर नहीं भरा है।ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रामपाल राविश ने बताया कि इसका सबसे बड़ा कारण सरकार की ओर से लिफ्टिंग के लिए दिए जाने वाले समय में कटौती और समय पर लिफ्टिंग न होने पर जुर्माना राशि में बढ़ोतरी है।
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रामपाल ने बताया कि पहले सरकार ने लिफ्टिंग के लिए ठेकेदारों को 72 घंटे का समय दिया था। ऐसे में अगर लिफ्टिंग नहीं होती तो सिर्फ 500 रुपये जुर्माना देना पड़ता था। अब इसे बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया है। सिर्फ 48 घंटे का समय दिया गया, जिसमें उठान संभव नहीं है।
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उल्लेखनीय है कि कैथल में करीब 20 ट्रांसपोर्ट ठेकेदार हैं। किसी ने भी टेंडर नहीं लिया है। यदि समय और जुर्माना राशि को ठीक नहीं किया गया तो कैथल से ही करोड़ों रुपये जुर्माना के तौर पर उन्हें देने पड़ेंगे।
जिस तरह से ट्रांसपोर्टरों ने उठान का विरोध किया है, उससे मंडी में टनों में गेहूं जमा हो जाएगा। किसानों को अपनी फसल रखने के लिए मंडी में जगह नहीं मिलेगी। ऐसे में मंडी में जाम की स्थिति बन सकती है। नाराज ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से जल्द ही उनकी मांगों पर विचार करने की मांग की है।
दूसरी ओर इस मामले में डीएफएससी निशांत राठी ने बताया कि इस संबंध में सरकार को अवगत करा दिया गया है।