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कक्षा पांचवीं और आठवीं की परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थी व उनके अभिभावक असमंजस की स्थिति में
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यमुनानगर। कक्षा पांचवीं और आठवीं की परीक्षाओं के संबंध में विद्यार्थी और उनके अभिभावक असमंजस की स्थिति में हैं। उन्हें अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये परीक्षाएं इस बार बोर्ड के माध्यम से होंगी या फिर संबंधित स्कूलों द्वारा ही ली जाएंगीं। पाठ्यक्रम को लेकर भी विद्यार्थियों के मन में सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर अभी तक अधिकारियों के पास भी कोई ऐसा पत्र नहीं आया है कि परीक्षाएं बोर्ड लेगा या स्कूल स्तर पर होंगी।
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार जिले में सरकारी और निजी स्कूलों में कई हजार विद्यार्थी इन दोनों कक्षाओं अध्ययनरत हैं। इनमें से सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या भी काफी है। विद्यार्थी और उनके अभिभावक मांग कर रहे हैं कि इस बार परीक्षाएं स्कूल स्तर पर हों तो सही रहेगा।
अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को जो पाठ्यक्रम पढ़ाया गया है, उसके अनुसार तो बोर्ड की परीक्षा कुछ हद तक स्वीकारी जा सकती है। इसके विपरीत कुछ निजी स्कूलों में बच्चों को सीबीएसई का पाठ्यक्रम पढ़ाया गया है। ऐसे में वे बच्चे बोर्ड की परीक्षा कैसे देंगे, क्योंकि उनका पाठ्यक्रम अलग है। इस कारण भी विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ी है। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ का कहना है कि बोर्ड की ओर से विद्यार्थियों के एनरोलमेंट फार्म तो भरवाए जा रहे हैं, लेकिन परीक्षाएं फिर भी स्कूल स्तर पर होने की संभावना है। जिस प्रकार से कोरोना के चलते बच्चों की कक्षाएं सुचारु नहीं लग पाई, उसके अनुसार परीक्षाएं स्कूल स्तर पर ही करवाई जानी चाहिए। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कहा कि फिलहाल उनके पास विभाग की ओर से कोई परीक्षाओं को लेकर कोई लिखित सूचना या निर्देश नहीं आए हैं। जैसे विभाग के निर्देश होंगे, उन्हीं के अनुसार परीक्षाएं ली जाएंगी।
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विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार जिले में सरकारी और निजी स्कूलों में कई हजार विद्यार्थी इन दोनों कक्षाओं अध्ययनरत हैं। इनमें से सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या भी काफी है। विद्यार्थी और उनके अभिभावक मांग कर रहे हैं कि इस बार परीक्षाएं स्कूल स्तर पर हों तो सही रहेगा।
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अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को जो पाठ्यक्रम पढ़ाया गया है, उसके अनुसार तो बोर्ड की परीक्षा कुछ हद तक स्वीकारी जा सकती है। इसके विपरीत कुछ निजी स्कूलों में बच्चों को सीबीएसई का पाठ्यक्रम पढ़ाया गया है। ऐसे में वे बच्चे बोर्ड की परीक्षा कैसे देंगे, क्योंकि उनका पाठ्यक्रम अलग है। इस कारण भी विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ी है। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ का कहना है कि बोर्ड की ओर से विद्यार्थियों के एनरोलमेंट फार्म तो भरवाए जा रहे हैं, लेकिन परीक्षाएं फिर भी स्कूल स्तर पर होने की संभावना है। जिस प्रकार से कोरोना के चलते बच्चों की कक्षाएं सुचारु नहीं लग पाई, उसके अनुसार परीक्षाएं स्कूल स्तर पर ही करवाई जानी चाहिए। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कहा कि फिलहाल उनके पास विभाग की ओर से कोई परीक्षाओं को लेकर कोई लिखित सूचना या निर्देश नहीं आए हैं। जैसे विभाग के निर्देश होंगे, उन्हीं के अनुसार परीक्षाएं ली जाएंगी।
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