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महंगे दाम में प्लेटलेट्स खरीदने की मजबूरी
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कैथल। जिले में डेंगू संक्रमित मरीज प्लेटलेट्स निकालने वाली मशीन का संचालन नहीं होने के कारण महंगे दामों में प्लेटलेट्स खरीदने को मजबूर हैं। जिले में अब तक डेंगू के कुल 47 मरीज मिल चुके हैं। शनिवार को भी डेंगू के तीन नए मामे सामने आए हैं। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण जिला नागरिक अस्पताल में रखी गई मशीन नहीं चल पा रही है। हालांकि विभाग ने इस मशीन के संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है। उम्मीद जताई गई है कि अगले 15 से 20 दिन के अंदर यह मशीन शुरू हो जाएगी।
डेंगू संक्रमण होने पर मरीज की प्लेटलेट्स कम हो जाती है इससे उसकी जान पर बन आती है। ऐसे में उसे प्लेटलेट्स चढ़ानी पड़ती है। शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज करवा रहे मरीज अभय ने बताया कि उसे पिछले सप्ताह डेंगू हो गया था। इस कारण प्लेटलेट्स कम हो गई थी। पहले तो अन्य माध्यम से प्लेटलेट्स बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अब 12 हजार रुपये में प्लेटलेट्स लेकर आया। तब जाकर राहत मिली।
इसी प्रकार चंदाना गेट निवासी रामलाल ने बताया कि उसे प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ गई थी। इसके लिए पहले कैथल में प्रयास किया। यहां न तो सरकारी और न ही प्राइवेट केंद्र में प्लेटलेटस मिली। इसके बाद करनाल पता किया। वहां से भी नहीं मिली तो मजबूरन अंबाला जाना पड़ा। वहां 18 हजार रुपये में प्लेटलेट्स मिल सकी।
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ऐसे कई अन्य मरीजों ने बताया कि प्लेटलेट्स के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। साथ ही किराया-भाड़ा में अतिरिक्त खर्च हो जाता है। नाराजगी जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मशीन होते हुए भी इसे आज तक चलवा नहीं पाए। यह लापरवाही को ही दर्शाता है।
उधर, सीएमओ डा. अशोक कुमार ने कहा कि इस मशीन को शुरू करवाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही मशीन को चालू करवाकर लोगों को प्लेटलेट्स निकलवाने की सुविधा दी जाएगी।
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डेंगू संक्रमण होने पर मरीज की प्लेटलेट्स कम हो जाती है इससे उसकी जान पर बन आती है। ऐसे में उसे प्लेटलेट्स चढ़ानी पड़ती है। शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज करवा रहे मरीज अभय ने बताया कि उसे पिछले सप्ताह डेंगू हो गया था। इस कारण प्लेटलेट्स कम हो गई थी। पहले तो अन्य माध्यम से प्लेटलेट्स बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अब 12 हजार रुपये में प्लेटलेट्स लेकर आया। तब जाकर राहत मिली।
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इसी प्रकार चंदाना गेट निवासी रामलाल ने बताया कि उसे प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ गई थी। इसके लिए पहले कैथल में प्रयास किया। यहां न तो सरकारी और न ही प्राइवेट केंद्र में प्लेटलेटस मिली। इसके बाद करनाल पता किया। वहां से भी नहीं मिली तो मजबूरन अंबाला जाना पड़ा। वहां 18 हजार रुपये में प्लेटलेट्स मिल सकी।
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ऐसे कई अन्य मरीजों ने बताया कि प्लेटलेट्स के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। साथ ही किराया-भाड़ा में अतिरिक्त खर्च हो जाता है। नाराजगी जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मशीन होते हुए भी इसे आज तक चलवा नहीं पाए। यह लापरवाही को ही दर्शाता है।
उधर, सीएमओ डा. अशोक कुमार ने कहा कि इस मशीन को शुरू करवाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही मशीन को चालू करवाकर लोगों को प्लेटलेट्स निकलवाने की सुविधा दी जाएगी।