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Kaithal News: खाली पैकेट मिलने पर कंपनी दोषी करार, 5 हजार का देना होगा मुआवजा
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कैथल। जिला उपभोक्ता फोरम ने सीलबंद कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट का पैकेट अंदर से खाली निकलने के मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने निर्माता कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी मानते हुए चॉकलेट की कीमत लौटाने के साथ कुल पांच हजार रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही तीन हजार रुपये मानसिक पीड़ा के मुआवजे और दो हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश दिए हैं। आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करने पर पूरी राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। कैथल शहर निवासी रवि गोयल ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि 26 मई 2023 को उन्होंने एक किराना दुकान से 20 कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट और अन्य सामान खरीदा था। घर पहुंचकर पैकेट खोलने पर एक चॉकलेट का रैपर पूरी तरह सीलबंद मिला लेकिन उसके भीतर चॉकलेट नहीं थी। उन्होंने दुकानदार से इसे बदलने की मांग की लेकिन मना कर दिया गया।
इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। सुनवाई के दौरान निर्माता कंपनी ने खरीद का पर्याप्त प्रमाण नहीं होने और पहले किसी शिकायत के न मिलने की दलील दी। वहीं दुकानदार ने संबंधित चॉकलेट बेचने से ही इन्कार कर दिया। आयोग ने शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत गूगल पे भुगतान का रिकॉर्ड और खाली सीलबंद रैपर का परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि रैपर दोनों तरफ से फैक्टरी सील था और उसके भीतर कोई चॉकलेट मौजूद नहीं थी। आयोग ने माना कि खरीद के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं और उत्पाद में खामी के लिए निर्माता कंपनी जिम्मेदार है।
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साथ ही तीन हजार रुपये मानसिक पीड़ा के मुआवजे और दो हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश दिए हैं। आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करने पर पूरी राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। कैथल शहर निवासी रवि गोयल ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि 26 मई 2023 को उन्होंने एक किराना दुकान से 20 कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट और अन्य सामान खरीदा था। घर पहुंचकर पैकेट खोलने पर एक चॉकलेट का रैपर पूरी तरह सीलबंद मिला लेकिन उसके भीतर चॉकलेट नहीं थी। उन्होंने दुकानदार से इसे बदलने की मांग की लेकिन मना कर दिया गया।
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इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। सुनवाई के दौरान निर्माता कंपनी ने खरीद का पर्याप्त प्रमाण नहीं होने और पहले किसी शिकायत के न मिलने की दलील दी। वहीं दुकानदार ने संबंधित चॉकलेट बेचने से ही इन्कार कर दिया। आयोग ने शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत गूगल पे भुगतान का रिकॉर्ड और खाली सीलबंद रैपर का परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि रैपर दोनों तरफ से फैक्टरी सील था और उसके भीतर कोई चॉकलेट मौजूद नहीं थी। आयोग ने माना कि खरीद के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं और उत्पाद में खामी के लिए निर्माता कंपनी जिम्मेदार है।
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