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Kaithal News: सिविल सर्जन ने दिए जांच के आदेश
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कैथल। गत रविवार को एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण गंभीर हालत में 23 वर्षीय गर्भवती महिला की ई-रिक्शा में डिलीवरी होने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला ने मामले में इंक्वायरी मार्क कर दी है।
उनका कहना है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि महिला को रेफर किए जाने के बाद समय पर एंबुलेंस क्यों उपलब्ध नहीं हो सकी और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था में किस स्तर पर खामी रही। गंभीर हालत में गर्भवती महिला रेफर की गई थी तो उसके साथ किसी स्टाफ सदस्य का होना जरूरी था लेकिन महिला के साथ डिलीवरी के दौरान कोई भी स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद नहीं था और आशा वर्कर भी परिवार के साथ महिला को ई-रिक्शा में बैठाकर खुद अपनी स्कूटी से अस्पताल पहुंची थी।
सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही किसी भी स्तर पर हुई हो, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही जांच का उद्देश्य केवल जिम्मेदारी तय करना ही नहीं बल्कि व्यवस्था में सुधार करना भी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। पंत नगर निवासी मुस्कान को रविवार को माता गेट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला नागरिक अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। उसका बीपी काफी कम हो गया था।
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उनका कहना है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि महिला को रेफर किए जाने के बाद समय पर एंबुलेंस क्यों उपलब्ध नहीं हो सकी और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था में किस स्तर पर खामी रही। गंभीर हालत में गर्भवती महिला रेफर की गई थी तो उसके साथ किसी स्टाफ सदस्य का होना जरूरी था लेकिन महिला के साथ डिलीवरी के दौरान कोई भी स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद नहीं था और आशा वर्कर भी परिवार के साथ महिला को ई-रिक्शा में बैठाकर खुद अपनी स्कूटी से अस्पताल पहुंची थी।
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सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही किसी भी स्तर पर हुई हो, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही जांच का उद्देश्य केवल जिम्मेदारी तय करना ही नहीं बल्कि व्यवस्था में सुधार करना भी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। पंत नगर निवासी मुस्कान को रविवार को माता गेट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला नागरिक अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। उसका बीपी काफी कम हो गया था।
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