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Kaithal News: ध्यान शिविर में बच्चे और बुजुर्ग ले रहे आत्मिक शांति का अनुभव
Thu, 27 Nov 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 27 Nov 2025 01:01 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गंगा घाट, ब्रह्मसरोवर, कुरुक्षेत्र में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत नारायण पिरामिड ध्यान केंद्र द्वारा आयोजित ध्यान शिविर में सभी आयु वर्ग के लोगों की बड़ी सहभागिता देखने को मिल रही है। 16 से 30 नवंबर तक चल रहे इस शिविर में प्रतिदिन हजारों आगंतुक पहुंचकर आनापानसति ध्यान सीख रहे हैं और मानसिक शांति, स्थिरता तथा सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं।
शिविर में बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों और छोटे बच्चों तक की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि ध्यान की सरल विधि लोगों के जीवन में सहजता से अपनाई जा रही है।
वरिष्ठ ध्यान प्रशिक्षक मीनाक्षी खुरानिया और निखिल खुरानिया प्रतिदिन आयोजित सत्रों में ध्यान के वैज्ञानिक, आध्यात्मिक, और व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाल रहे हैं। उनके अनुसार, नियमित ध्यान अभ्यास तनाव कम करता है, करुणा बढ़ाता है और जीवन में धैर्य, संतुलन व स्पष्टता लाता है। दिल्ली से आए वरिष्ठ पिरामिड मास्टर्स भूपेश सर और भानु सर भी शिविर में सेवाएं दे रहे हैं, जिससे शिविर का ऊर्जा स्तर और प्रेरक प्रभाव और अधिक बढ़ा है।
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शिविर के दौरान स्वयंसेवक पूरी निष्ठा से पंपलेट वितरण, मार्गदर्शन और ध्यान-प्रचार की सेवाएं निभा रहे हैं। केंद्र के सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक शांति, ध्यान और आत्म-विकास का संदेश पहुंचाना है।
आनापानसति
एक ध्यान पद्धति है जिसका अर्थ है सांस लेने के प्रति सजगता। यह गौतम बुद्ध द्वारा सिखाई गई ध्यान की एक मौलिक विधि है, जिसमें श्वास के भीतर और बाहर आने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यह अभ्यास एकाग्रता बढ़ाता है, मानसिक शांति देता है और तनाव कम करता है।
आनापानसति के मुख्य बिंदु ः आनापान शब्द का अर्थ है सांस लेना और छोड़ना, और सति शब्द का अर्थ है सजगता या जागरूकता। विधि: ध्यान के दौरान, अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, और जब मन भटकने लगे, तो धीरे से ध्यान वापस सांसों पर लाया जाता है।
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कैथल। गंगा घाट, ब्रह्मसरोवर, कुरुक्षेत्र में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत नारायण पिरामिड ध्यान केंद्र द्वारा आयोजित ध्यान शिविर में सभी आयु वर्ग के लोगों की बड़ी सहभागिता देखने को मिल रही है। 16 से 30 नवंबर तक चल रहे इस शिविर में प्रतिदिन हजारों आगंतुक पहुंचकर आनापानसति ध्यान सीख रहे हैं और मानसिक शांति, स्थिरता तथा सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं।
शिविर में बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों और छोटे बच्चों तक की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि ध्यान की सरल विधि लोगों के जीवन में सहजता से अपनाई जा रही है।
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वरिष्ठ ध्यान प्रशिक्षक मीनाक्षी खुरानिया और निखिल खुरानिया प्रतिदिन आयोजित सत्रों में ध्यान के वैज्ञानिक, आध्यात्मिक, और व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाल रहे हैं। उनके अनुसार, नियमित ध्यान अभ्यास तनाव कम करता है, करुणा बढ़ाता है और जीवन में धैर्य, संतुलन व स्पष्टता लाता है। दिल्ली से आए वरिष्ठ पिरामिड मास्टर्स भूपेश सर और भानु सर भी शिविर में सेवाएं दे रहे हैं, जिससे शिविर का ऊर्जा स्तर और प्रेरक प्रभाव और अधिक बढ़ा है।
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शिविर के दौरान स्वयंसेवक पूरी निष्ठा से पंपलेट वितरण, मार्गदर्शन और ध्यान-प्रचार की सेवाएं निभा रहे हैं। केंद्र के सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक शांति, ध्यान और आत्म-विकास का संदेश पहुंचाना है।
आनापानसति
एक ध्यान पद्धति है जिसका अर्थ है सांस लेने के प्रति सजगता। यह गौतम बुद्ध द्वारा सिखाई गई ध्यान की एक मौलिक विधि है, जिसमें श्वास के भीतर और बाहर आने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यह अभ्यास एकाग्रता बढ़ाता है, मानसिक शांति देता है और तनाव कम करता है।
आनापानसति के मुख्य बिंदु ः आनापान शब्द का अर्थ है सांस लेना और छोड़ना, और सति शब्द का अर्थ है सजगता या जागरूकता। विधि: ध्यान के दौरान, अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, और जब मन भटकने लगे, तो धीरे से ध्यान वापस सांसों पर लाया जाता है।